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चार गुना मुआवजा देने के बाद भी भूमि देने को राजी नहीं किसान
Fri, 10 Sep 2021 05:59 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 10 Sep 2021 05:59 PM IST
सार
तपोस्थली कौशाम्बी को प्रदेश सरकार बौद्ध पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना चाहती है। इसके लिए कौशाम्बी खास में साढ़े दस हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। भूमि अधिग्रहीत होते ही पर्यटन स्थल विकसित करने का काम प्रारंभ कर दिया जाएगा। इसके लिए शासन की ओर से फरमान जारी कर दिया गया है।
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Farmers not ready to give land even after paying four times compensation
- फोटो : KAUSHAMBI
विस्तार
दो दिन की कसरत के बाद भी तथागत बुद्ध की तपोस्थली कौशाम्बी में बौद्घ पर्यटन स्थल के लिए प्रशासन भूमि अधिग्रहण नहीं कर सका। बृहस्पतिवार को डीएम सुजीत कुमार ने खुद मौके पर पहुंचकर किसानों से बातचीत की। सर्किल रेट से चार गुना ज्यादा मुआवजा देने का भरोसा दिलाया। इसके बावजूद किसान राजी नहीं हुए। नतीजतन, फिलहाल भूमि अधिग्रहण का मामला अधर में लटक गया।
तपोस्थली कौशाम्बी को प्रदेश सरकार बौद्ध पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना चाहती है। इसके लिए कौशाम्बी खास में साढ़े दस हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। भूमि अधिग्रहीत होते ही पर्यटन स्थल विकसित करने का काम प्रारंभ कर दिया जाएगा। इसके लिए शासन की ओर से फरमान जारी कर दिया गया है।
पर, स्थानीय किसान इसमें अड़ंगा डाल रहे हैं। भूमि अधिग्रहीत करने के लिए बुधवार को एसडीएम सदर राजेश श्रीवास्तव, तहसीलदार समेत पूरी राजस्व टीम के साथ दिन भर गांव में रही। इस दौरान टीम ने किसानों से जमीन देने के लिउ बात की।
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लेकिन सफलता नहीं मिली। बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी एसडीएम और क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अपराजिता सिंह सुबह से ही गांव पहुंचकर किसानों को मनाने में लगे रहे। सफलता नहीं मिलती देख जानकारी डीएम को दी। इसके बाद दोपहर में जिलाधिकारी सुजीत कुमार खुद मौके पर पहुंचे और काश्तकारों से बातचीत की।
प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद भी काश्तकार पर्यटन स्थल के लिए जमीन देने को तैयार नहीं हुए। एसडीएम ने बताया कि आपसी बंटवारा नहीं होने के कारण किसानों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। किसान सूबे लाल सिपाही लाल ,चंद्रपाल आदि का कहना है कि जब तक पट्टीदारों में बंटवारा नहीं हो जाएगा, तब तक हम लोग जमीन नहीं देंगे।
जिलाधिकारी ने वर्ष 1995 में तत्कालीन बसपा शासनकाल में अधिग्रहीत भूमि को दोबारा अधिग्रहण करने के लिए एसडीएम को आदेश दिया है। पूर्व में अधिग्रहीत की गई भूमि में कुल लगभग 111 काश्तकार हैं। जिन्हें बुला कर दोबारा एसडीएम देर शाम तक मनाने में जुटे रहे।
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तपोस्थली कौशाम्बी को प्रदेश सरकार बौद्ध पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना चाहती है। इसके लिए कौशाम्बी खास में साढ़े दस हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। भूमि अधिग्रहीत होते ही पर्यटन स्थल विकसित करने का काम प्रारंभ कर दिया जाएगा। इसके लिए शासन की ओर से फरमान जारी कर दिया गया है।
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पर, स्थानीय किसान इसमें अड़ंगा डाल रहे हैं। भूमि अधिग्रहीत करने के लिए बुधवार को एसडीएम सदर राजेश श्रीवास्तव, तहसीलदार समेत पूरी राजस्व टीम के साथ दिन भर गांव में रही। इस दौरान टीम ने किसानों से जमीन देने के लिउ बात की।
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लेकिन सफलता नहीं मिली। बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी एसडीएम और क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अपराजिता सिंह सुबह से ही गांव पहुंचकर किसानों को मनाने में लगे रहे। सफलता नहीं मिलती देख जानकारी डीएम को दी। इसके बाद दोपहर में जिलाधिकारी सुजीत कुमार खुद मौके पर पहुंचे और काश्तकारों से बातचीत की।
प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद भी काश्तकार पर्यटन स्थल के लिए जमीन देने को तैयार नहीं हुए। एसडीएम ने बताया कि आपसी बंटवारा नहीं होने के कारण किसानों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। किसान सूबे लाल सिपाही लाल ,चंद्रपाल आदि का कहना है कि जब तक पट्टीदारों में बंटवारा नहीं हो जाएगा, तब तक हम लोग जमीन नहीं देंगे।
जिलाधिकारी ने वर्ष 1995 में तत्कालीन बसपा शासनकाल में अधिग्रहीत भूमि को दोबारा अधिग्रहण करने के लिए एसडीएम को आदेश दिया है। पूर्व में अधिग्रहीत की गई भूमि में कुल लगभग 111 काश्तकार हैं। जिन्हें बुला कर दोबारा एसडीएम देर शाम तक मनाने में जुटे रहे।