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जुर्माने व एफआईआर का किसानों को डर नहीं, बेखौफ जला रहे पराली
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farmers are destroying the parali
- फोटो : KAUSHAMBI
जुर्माने व एफआईआर का किसानों को डर नहीं, बेखौफ जला रहे पराली
नवंबर माह में 41 किसानों के खिलाफ हो चुकी है कार्रवाई
शुक्रवार को भी एक किसान के खिलाफ दर्ज कराई गई रिपोर्ट
मंझनपुुर। पराली जलाना किसानों को भले ही महंगा पड़ रहा हो लेकिन वह जुर्माना व पुलिस में रिपोर्ट दर्ज होने का जोखिम उठाने के लिए मजबूर हैं। किसानों की मजबूरी है कि धान का पैरा कोई खरीद नहीं रहा और पराली कटाने में उन्हें मजदूरी भी देनी पड़ रही है। नतीजतन पुलिस के खौफ को दर किनार कर किसान खुलेआम पराली जला रहे हैं। कृषि विभाग ने नवंबर माह में 41 पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई की है।
वायु प्रदूषण को लेकर सरकार ने पराली जलाने पर रोक लगा रखी है। मंशा है कि पराली से उठने वाले धुआं से वायु मंडल को प्रदूषित होने से बचाया जा सके। किसानों को इसके लिए कृषि विभाग से सचेत किया है। इसके बाद भी गांवों में बेखौफ पराली जलाई जा रही है। कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि नवंबर माह में जिले के 41 किसानों के खिलाफ पराली जलाने के मामले में कार्रवाई की गई है। किसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया तो किसी से विभाग ने जुर्माना वसूल किया। शनिवार को भी सहायक तकनीकी प्रबंधक कृषि प्रदीप कुमार ने पूरब शरीरा के त्रियुगी नरायण के खिलाफ पश्चिमशरीरा कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। त्रियुगी नरायण पर आरोप था कि उन्होंने 25 नवंबर को अपने खेत में पराली जलाई थी। अब सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि किसान पराली का करें तो क्या करें? पराली कोई खरीद नहीं रहा है। देवखरपुर के किसान मुखिया यादव, निजामपुर नौगीरा के राजेश सिंह, धीरेंद्र श्रीवास्तव, रामजी पांडेय आदि का कहना है कि अगर सरकार गो संरक्षण केंद्र में बंद मवेशियों के लिए यह पराली खरीद लें तो किसान की समस्या भी समाप्त हो जाएगी और नकदी के रूप में फायदा भी मिल जाएगा।
किसान पुआल नहीं जला रहा है, वह पराली जलाता है। पराली मशीन से कटिंग वाले धान से होती है। गोवंश आश्रय स्थल पर भूसा खिलाने का प्रावधान है। भूसे की दिक्कत होने पर कुछ अन्य सामग्री के साथ मिलाकर पराली को खिलाने पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल अभी विभाग के पास ऐसा कोई निर्देश नहीं आया है।
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-डॉ. बीपी पाठक, सीवीओ
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नवंबर माह में 41 किसानों के खिलाफ हो चुकी है कार्रवाई
शुक्रवार को भी एक किसान के खिलाफ दर्ज कराई गई रिपोर्ट
मंझनपुुर। पराली जलाना किसानों को भले ही महंगा पड़ रहा हो लेकिन वह जुर्माना व पुलिस में रिपोर्ट दर्ज होने का जोखिम उठाने के लिए मजबूर हैं। किसानों की मजबूरी है कि धान का पैरा कोई खरीद नहीं रहा और पराली कटाने में उन्हें मजदूरी भी देनी पड़ रही है। नतीजतन पुलिस के खौफ को दर किनार कर किसान खुलेआम पराली जला रहे हैं। कृषि विभाग ने नवंबर माह में 41 पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई की है।
वायु प्रदूषण को लेकर सरकार ने पराली जलाने पर रोक लगा रखी है। मंशा है कि पराली से उठने वाले धुआं से वायु मंडल को प्रदूषित होने से बचाया जा सके। किसानों को इसके लिए कृषि विभाग से सचेत किया है। इसके बाद भी गांवों में बेखौफ पराली जलाई जा रही है। कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि नवंबर माह में जिले के 41 किसानों के खिलाफ पराली जलाने के मामले में कार्रवाई की गई है। किसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया तो किसी से विभाग ने जुर्माना वसूल किया। शनिवार को भी सहायक तकनीकी प्रबंधक कृषि प्रदीप कुमार ने पूरब शरीरा के त्रियुगी नरायण के खिलाफ पश्चिमशरीरा कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। त्रियुगी नरायण पर आरोप था कि उन्होंने 25 नवंबर को अपने खेत में पराली जलाई थी। अब सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि किसान पराली का करें तो क्या करें? पराली कोई खरीद नहीं रहा है। देवखरपुर के किसान मुखिया यादव, निजामपुर नौगीरा के राजेश सिंह, धीरेंद्र श्रीवास्तव, रामजी पांडेय आदि का कहना है कि अगर सरकार गो संरक्षण केंद्र में बंद मवेशियों के लिए यह पराली खरीद लें तो किसान की समस्या भी समाप्त हो जाएगी और नकदी के रूप में फायदा भी मिल जाएगा।
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किसान पुआल नहीं जला रहा है, वह पराली जलाता है। पराली मशीन से कटिंग वाले धान से होती है। गोवंश आश्रय स्थल पर भूसा खिलाने का प्रावधान है। भूसे की दिक्कत होने पर कुछ अन्य सामग्री के साथ मिलाकर पराली को खिलाने पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल अभी विभाग के पास ऐसा कोई निर्देश नहीं आया है।
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-डॉ. बीपी पाठक, सीवीओ