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15 दिन में तीसरी बार भूकंप, डर ही डर
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Wed, 13 May 2015 12:04 AM IST
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गंगा-यमुना की तराई में बसा कौशाम्बी यूं तो भूकंप के कहर से सुरक्षित बताया जाता है। पर, इस बार जिस तरह से बार-बार भूकंप आ रहा है उससे लोग दशहतजदा हैं। 15 दिन में तीसरी बार धरती के कांपने से लोगों के मन में डर समा गया है। मंगलवार को ही हल्के झटके महसूस होने के बाद भय से घर छोड़कर भागे लोग घंटों भीतर जाने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे। गांव-गांव लोगों का बस यही मानना है कि बार-बार के झटके किसी बड़ी आपदा का संकेत है।
कौशाम्बी के लोग 25 और 25 अप्रैल को आए भूकंप के झटकों को अभी भूल भी नहीं पाए थे। मंगलवार को फिर से अचानक धरती कांपने लगी। भूकंप का एहसास होते ही लोग सहम गए। डरवश लोग घर छोड़कर बाहर भागे थे। इसके बाद शाम तक लोग अपने ही घर में घुसने का साहस नहीं दिखा पा रहे थे। चरवा गांव की रहने वाली चांदतारा और छात्रा पल्लवी भी घर से घंटों बाहर ही बैठी रही। पल्लवी ने बताया कि वह स्कूल से जल्दी घर आ गई थी। जैसे ही गिलास उठाकर पानी पी रही थी, अचानक उसे चक्कर सा महसूस हुआ।
गिलास हाथ से छूट गया। कमरे का पंखा हिलता देख वह डर के मारे चीखते-चिल्लाते बाहर को भागी। काजू गांव के अंगद सिंह भी भूकंप के झटके से परिवार समेत घंटों बाहर बैठे रहे। अन्य लोग तो करीब घंटे भर बाद भीतर चले गए लेकिन वह शाम तक हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। उनका कहना था कि बार-बार भूकंप आ रहा है। यह किसी बड़ी आपदा का संकेत है। लोगों में भय बना हुआ है कि किसी भी दिन भूकंप यहां भी तबाही ला सकता है। सबसे ज्यादा लोग इस बात से भयभीत हैं कि रात में यदि सोते समय भूकंप का बड़ा झटका आता है तब तो उनकी जान चली जाएगी।
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अंगद जैसी ही दहशत बेरुआ गांव के जय नारायण शुक्ल, समस्तपुर गांव के चाय विक्रेता मुनीम और सब्जी कारोबारी चरई निवासी मिश्रीलाल में भी रही। मिश्रीलाल ने बताया कि भूकंप आने पर जब सब कुछ घूमने लगा तो उसे लगा भूख के कारण चक्कर आ रहा है, क्योंकि सुबह से खेत में होने के कारण वह कुछ खा नहीं सका था। मगर जब उसकी साइकिल भी गिर गई, तब उसे लगा कि कुछ न कुछ गड़बड़ है। बताया कि वह कुछ समझने की कोशिश करता इससे पहले ही लोग भूकंप आने की बात कहते हुए भागते दिखे। वह भी उन्हीं लोगों के साथ खुले आसमान के नीचे खड़ा हो गया।
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कौशाम्बी के लोग 25 और 25 अप्रैल को आए भूकंप के झटकों को अभी भूल भी नहीं पाए थे। मंगलवार को फिर से अचानक धरती कांपने लगी। भूकंप का एहसास होते ही लोग सहम गए। डरवश लोग घर छोड़कर बाहर भागे थे। इसके बाद शाम तक लोग अपने ही घर में घुसने का साहस नहीं दिखा पा रहे थे। चरवा गांव की रहने वाली चांदतारा और छात्रा पल्लवी भी घर से घंटों बाहर ही बैठी रही। पल्लवी ने बताया कि वह स्कूल से जल्दी घर आ गई थी। जैसे ही गिलास उठाकर पानी पी रही थी, अचानक उसे चक्कर सा महसूस हुआ।
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गिलास हाथ से छूट गया। कमरे का पंखा हिलता देख वह डर के मारे चीखते-चिल्लाते बाहर को भागी। काजू गांव के अंगद सिंह भी भूकंप के झटके से परिवार समेत घंटों बाहर बैठे रहे। अन्य लोग तो करीब घंटे भर बाद भीतर चले गए लेकिन वह शाम तक हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। उनका कहना था कि बार-बार भूकंप आ रहा है। यह किसी बड़ी आपदा का संकेत है। लोगों में भय बना हुआ है कि किसी भी दिन भूकंप यहां भी तबाही ला सकता है। सबसे ज्यादा लोग इस बात से भयभीत हैं कि रात में यदि सोते समय भूकंप का बड़ा झटका आता है तब तो उनकी जान चली जाएगी।
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अंगद जैसी ही दहशत बेरुआ गांव के जय नारायण शुक्ल, समस्तपुर गांव के चाय विक्रेता मुनीम और सब्जी कारोबारी चरई निवासी मिश्रीलाल में भी रही। मिश्रीलाल ने बताया कि भूकंप आने पर जब सब कुछ घूमने लगा तो उसे लगा भूख के कारण चक्कर आ रहा है, क्योंकि सुबह से खेत में होने के कारण वह कुछ खा नहीं सका था। मगर जब उसकी साइकिल भी गिर गई, तब उसे लगा कि कुछ न कुछ गड़बड़ है। बताया कि वह कुछ समझने की कोशिश करता इससे पहले ही लोग भूकंप आने की बात कहते हुए भागते दिखे। वह भी उन्हीं लोगों के साथ खुले आसमान के नीचे खड़ा हो गया।