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औषधीय खेती से कमाएं लाभ
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Earn profit from medicinal farming
- फोटो : KAUSHAMBI
औषधीय खेती से कमाएं लाभ
उद्यान विभाग की तरफ से कलक्ट्रेट में किसानों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। जिले के किसान परंपरागत खेती से हटकर औषधीय खेती के जरिए ज्यादा लाभ कमा सकते हैं। तुलसी, एलोवेरा और सतावर की खेती कर जिले के कई किसानों ने बेहतर लाभ कमाया है। ये बातें उप निदेशक उद्यान प्रयागराज मंडल डॉ. विनीत कुमार ने किसानों के दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शनिवार को शुभारंभ करते हुए कही।
प्रशिक्षण में मौजूद में किसानों से कहा कि जिले के सिघिया निवासी राम बहादुर ने तुलसी, रामचंद्र व अवधेश पाल ने सतावर की खेती करके बेहतर लाभ कमाया गया। प्रशिक्षण में मौजूद इन प्रगतिशील किसानों से उनके उपज तैयार करने के तरीके से बारे में भी अनुभव साझा कराया गया। उद्यान अधिकारी सुरेंद्र राम भाष्कर ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में 10 हेक्टेयर में सतावर व 20 हेक्टेयर में एलोवेरा लगवाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। परंपरागत खेती से हटकर इस औषधीय खेती के करने से किसानों को तीन से चार गुना लाभ हो सकता है। प्रशिक्षण के पहले दिन किसानों को कृषि विश्वविद्यालय नैनी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शैलेष सिंह और विशेषज्ञ डॉ. जीतेंद्र प्रताप ने उपज लेने के तरीके के बारे में बताया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में इंद्रमणि यादव, जब्बार असगर, प्रमोद कुमार सिंह, आदित्य कुमार आदि मौजूद रहे।
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उद्यान विभाग की तरफ से कलक्ट्रेट में किसानों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। जिले के किसान परंपरागत खेती से हटकर औषधीय खेती के जरिए ज्यादा लाभ कमा सकते हैं। तुलसी, एलोवेरा और सतावर की खेती कर जिले के कई किसानों ने बेहतर लाभ कमाया है। ये बातें उप निदेशक उद्यान प्रयागराज मंडल डॉ. विनीत कुमार ने किसानों के दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शनिवार को शुभारंभ करते हुए कही।
प्रशिक्षण में मौजूद में किसानों से कहा कि जिले के सिघिया निवासी राम बहादुर ने तुलसी, रामचंद्र व अवधेश पाल ने सतावर की खेती करके बेहतर लाभ कमाया गया। प्रशिक्षण में मौजूद इन प्रगतिशील किसानों से उनके उपज तैयार करने के तरीके से बारे में भी अनुभव साझा कराया गया। उद्यान अधिकारी सुरेंद्र राम भाष्कर ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में 10 हेक्टेयर में सतावर व 20 हेक्टेयर में एलोवेरा लगवाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। परंपरागत खेती से हटकर इस औषधीय खेती के करने से किसानों को तीन से चार गुना लाभ हो सकता है। प्रशिक्षण के पहले दिन किसानों को कृषि विश्वविद्यालय नैनी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शैलेष सिंह और विशेषज्ञ डॉ. जीतेंद्र प्रताप ने उपज लेने के तरीके के बारे में बताया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में इंद्रमणि यादव, जब्बार असगर, प्रमोद कुमार सिंह, आदित्य कुमार आदि मौजूद रहे।
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