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kaushambi : रहस्यमयी बुखार से हो रहीं मौतें, स्वास्थ्य विभाग की जांच में ऑल इज वेल

Sun, 02 Oct 2022 12:56 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 02 Oct 2022 12:56 AM IST
सार

नगर पालिका भरवारी के शिशु मंदिर कॉलोनी निवासी जगजीवन (83) बुखार से पीड़ित थे। 22 सितंबर को लखनऊ के संजीवनी अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ा। परिजनों के मुताबिक इलाज करने वाले चिकित्सक ने डेंगू बताया था। जगजीवन

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Deaths due to mysterious fever in Kaushambi
फीवर के बढ़ रहे मरीज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिले में रहस्यमयी बुखार की चपेट में आकर अब तक चार लोग जान गवां चुके हैं। मौत का शिकार हुए लोगों का प्रयागराज के निजी अस्पतालों में इलाज कराया गया था। वहां जांच में डेंगू की तस्दीक की गई, लेकिन आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई। लोगों की मौत के बाद पीड़ित परिवार के लोगों का स्वास्थ्य विभाग ने कैंप कर जांच किया लेकिन  किसी को डेंगू तो दूर वायरल फीवर भी नहीं निकला।

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नगर पालिका भरवारी के शिशु मंदिर कॉलोनी निवासी जगजीवन (83) बुखार से पीड़ित थे। 22 सितंबर को लखनऊ के संजीवनी अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ा। परिजनों के मुताबिक इलाज करने वाले चिकित्सक ने डेंगू बताया था। जगजीवन की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भरवारी में लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया लेकिन किसी भी व्यक्ति में डेंगू तो दूर सामान्य बुखार के भी लक्षण नहीं मिले। 27 सितंबर को भरवारी के ही पुरानी बाजार निवासी फिरोज अहमद की बेटी खुशी (14) ने बुखार से दम तोड़ दिया।
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घरवालों का दावा था कि प्रयागराज के एक निजी लैब में खुशी की जांच कराई गई। वहां पर डेंगू होने की बात कही गई। इस घटना के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम मोहल्ले में जांच के लिए पहुंची लेकिन किसी में डेंगू की पुष्टि नहीं हो सकी। दो सितंबर को कशिया पूरब के अन्नान व मोहीउद्दीन की भी बुखार के कारण मौत हो चुकी है। रहस्यमयी बुखार से लगातार हो रही मौतों के कारण लोग दहशत में हैं, लेकिन सरकारी आंकड़ों में मौत का कारण सिर्फ नार्मल बुखार बताया जा रहा है।

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सिर्फ प्लेटलेट्स घटने का मतलब डेंगू नहीं
इन दिनों जो बुखार आ रहा है अगर उसका समय रहते इलाज नहीं कराया गया तो प्लेटलेट्स घटने लगती हैं। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. विवेक केसरवानी बताते हैं कि प्लेटलेट्स काफी दिनों तक बुखार रहने के कारण भी घटती है। इसका मतलब यह नहीं है कि डेंगू हुआ है। लोगों को चाहिए कि बुखार अगर आ रहा है तो समय रहते योग्य चिकित्सक से इलाज कराएं।


प्रिकॉशन में खा रहे कीवी और चबा रहे पपीते का पत्ता
मंझनपुर। भले ही जिले में अब तक डेंगू का आधिकारिक तौर पर एक भी मरीज नहीं मिला हो लेकिन लोग सतर्क हैं। जिन लोगों को एक से दो दिन भी बुखार आया वह बाजार से 25 रुपया प्रति पीस का कीवी फल खा रहे हैं। गांव के झोलाछाप चिकित्सक पपीते का पत्ता व बकरी का दूध पीने की सलाह दे रहे हैं।


इनका कहना है
इस माह पीएचसी क्षेत्र में रहस्यमयी बुखार की चपेट में आने से चार  लोगों की मौत हुई है। घटना की जानकारी के बाद स्वास्थ्य टीम भेजकर वहां रहे अन्य लोगों की जांच कराई गई। 35 लोगों के खून की जांच कराई गई। किसी की जांच रिपोर्ट में डेंगू, टाइफाइड, मलेरिया का लक्षण नहीं मिला।- -डॉ. सुनील सिंह, पीएचसी प्रभारी मूरतगंज

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