{"_id":"abd1228b7141355bb65d54fd88bc62da","slug":"crime-news-hindi-news-64","type":"story","status":"publish","title_hn":"बर्बादी की भेंट चढ़ी एक और जिंदगी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
बर्बादी की भेंट चढ़ी एक और जिंदगी
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Sun, 19 Apr 2015 12:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेवादा। बर्बाद हुई फसलों के सदमे में किसानों की मौतें थम नहीं रही हैं। शुक्रवार की रात भी चायल तहसील के पिपरहा (मुस्तफाबाद) गांव के किसान राम किशोर प्रजापति (60) की सांसें थम गईं। वह शाम को खेत घूमने गया था। लौटते ही अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। मौत पर घर-परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
मार्च-अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश से गेहूं समेत सभी फसलों पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी हैं। मौसम की मार से तबाह हुई फसलों के सदमे में जिले में रोज ही किसी न किसी किसान की जान जा रही है। शुक्रवार की रात भी चायल तहसील क्षेत्र के गांव पिपरहा मुस्तफाबाद गांव के किसान रामकिशोर प्रजापति की मौत हो गई। उसके बड़े बेटे ने बताया कि उसके पास करीब सवा बीघा जमीन है।
गांव के रहने वाले लालमियां का ढाई बीघा खेत बंटाई पर लेकर गेहूं की बुआई की गई थी। बताया कि मार्च महीने में हुई बेमौसम की बरसात में गिरकर आधी से ज्यादा फसल खराब हो गई थी। बाकी फसल की कटाई की गई थी, लेकिन सोमवार की रात हुई मूसलाधार बारिश में खेत में पानी भर गया। काटी गई फसल डूबकर सड़ गई। जब से पानी में डूबने से फसल खराब हुई है, तभी से पिताजी परेशान रहते थे। शुक्रवार को भी वे फसल देखने के लिए खेत की ओर गए थे। घर लौटे, तो खेत से एक भी दाना की पैदावार नहीं होने की बात कहते हुए परेशान हो उठे। बताया कि इसके बाद ही उनकी तबीयत बिगड़ गई।
विज्ञापन
वे चारपाई पर लेट गए। कोई कुछ समझ पाता। इससे पहले ही उनकी सांसें थम गईं। सूचना पर लेखपाल छत्रपाल ने गांव जाकर जांच-पड़ताल की। एसडीएम चायल रजनीश मिश्र ने बताया कि किसान की मौत की सूचना मिली है। राजस्व कर्मी को गांव भेजकर जांच कराई जा रही है।
आसमान से बरसी आफत से गेहूं की फसल पूरी तरह से तबाह हो चुकी हैं। बेमौसम की मूसलाधार बारिश में तालाब बन चुके खेत में फसलें सड़ रही हैं। इस बर्बादी का सदमा अन्नदाता बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। गम में किसानों की मौत हो रही है। कौशाम्बी में ही देखें तो आठ दिनों में जिले के 12 किसानों का दम निकल चुका है। नौ अप्रैल को फसल बर्बाद होने के सदमे में मखऊपुर (चायल) के किसान त्रिलोक सिंह की मौत हुई थी।
इसके बाद काजीपुर गांव के अर्जुन सिंह, पन्नोई गांव के बचईलाल, मढ़ी गांव के रामभजन, कोटिया गांव के अशर्फीलाल, मसनीपुर गांव के मेवालाल, लक्ष्मनापुर गांव के संतलाल, मारूफपुर भरवारी के नरेंद्र सिंह, सल्लहा गांव के झल्लर, रामपुर रक्सवारा गांव के छोटेलाल और बख्शीपार गांव के भैयालाल की मौत हो चुकी है। साथ ही अब भी रोजाना सदमे में किसी न किसी अन्नदाता की सांसें थम रही हैं।
विज्ञापन
मार्च-अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश से गेहूं समेत सभी फसलों पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी हैं। मौसम की मार से तबाह हुई फसलों के सदमे में जिले में रोज ही किसी न किसी किसान की जान जा रही है। शुक्रवार की रात भी चायल तहसील क्षेत्र के गांव पिपरहा मुस्तफाबाद गांव के किसान रामकिशोर प्रजापति की मौत हो गई। उसके बड़े बेटे ने बताया कि उसके पास करीब सवा बीघा जमीन है।
विज्ञापन
गांव के रहने वाले लालमियां का ढाई बीघा खेत बंटाई पर लेकर गेहूं की बुआई की गई थी। बताया कि मार्च महीने में हुई बेमौसम की बरसात में गिरकर आधी से ज्यादा फसल खराब हो गई थी। बाकी फसल की कटाई की गई थी, लेकिन सोमवार की रात हुई मूसलाधार बारिश में खेत में पानी भर गया। काटी गई फसल डूबकर सड़ गई। जब से पानी में डूबने से फसल खराब हुई है, तभी से पिताजी परेशान रहते थे। शुक्रवार को भी वे फसल देखने के लिए खेत की ओर गए थे। घर लौटे, तो खेत से एक भी दाना की पैदावार नहीं होने की बात कहते हुए परेशान हो उठे। बताया कि इसके बाद ही उनकी तबीयत बिगड़ गई।
विज्ञापन
वे चारपाई पर लेट गए। कोई कुछ समझ पाता। इससे पहले ही उनकी सांसें थम गईं। सूचना पर लेखपाल छत्रपाल ने गांव जाकर जांच-पड़ताल की। एसडीएम चायल रजनीश मिश्र ने बताया कि किसान की मौत की सूचना मिली है। राजस्व कर्मी को गांव भेजकर जांच कराई जा रही है।
आसमान से बरसी आफत से गेहूं की फसल पूरी तरह से तबाह हो चुकी हैं। बेमौसम की मूसलाधार बारिश में तालाब बन चुके खेत में फसलें सड़ रही हैं। इस बर्बादी का सदमा अन्नदाता बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। गम में किसानों की मौत हो रही है। कौशाम्बी में ही देखें तो आठ दिनों में जिले के 12 किसानों का दम निकल चुका है। नौ अप्रैल को फसल बर्बाद होने के सदमे में मखऊपुर (चायल) के किसान त्रिलोक सिंह की मौत हुई थी।
इसके बाद काजीपुर गांव के अर्जुन सिंह, पन्नोई गांव के बचईलाल, मढ़ी गांव के रामभजन, कोटिया गांव के अशर्फीलाल, मसनीपुर गांव के मेवालाल, लक्ष्मनापुर गांव के संतलाल, मारूफपुर भरवारी के नरेंद्र सिंह, सल्लहा गांव के झल्लर, रामपुर रक्सवारा गांव के छोटेलाल और बख्शीपार गांव के भैयालाल की मौत हो चुकी है। साथ ही अब भी रोजाना सदमे में किसी न किसी अन्नदाता की सांसें थम रही हैं।