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सेटेलाइट से होगी बालू घाटों की निगरानी
Updated Sat, 24 Jun 2017 11:59 PM IST
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मंझनपुर (कौशाम्बी)। बालू के अवैध खनन से सरकारों की खूब किरकिरी होती रही है। बीजेपी सरकार इससे बचना चाहती है। यही कारण है कि बालू खनन में पारदर्शिता लाने के लिए प्रशासन ने हाईटेक सुविधाओं का इस्तेमाल करने की तैयारी शुरू कर दी है। बालू घाटों की निगरानी सेटेलाइट से की जाएगी। जीपीएस की मदद से खनन विभाग में बैठे-बैठे अधिकारी बालू घाटों का हाल जानेंगे। इसके अलावा रवन्ना में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए अब ई-रवन्ना का प्रयोग होगा।
जिले के बालू कारोबारियों द्वारा पट्टा लेने के बाद घाटों पर जमकर मनमानी की जाती थी। पट्टे से हटकर अवैध खनन के साथ-साथ ओवरलोड वाहनों का परिवहन भी कराया जाता था। कारोबारियों का यह खेल पिछले साल तक जिले में जमकर चला। इस साल पट्टों पर खनन शुरू हुआ तो डीएम मनीष कुमार वर्मा के नेतृत्व में विभागीय व प्रशासनिक अधिकारियों ने पट्टाधारकों पर काफी हद तक नकेल कस दिया है।
अब शासन द्वारा बालू खनन में पूरी तरह से पारदर्शिता लाने की कवायद शुरू कर दी गई है। बालू घाटों पर जीपीएस सिस्टम के जरिए सेटेलाइट सिस्टम से एक अक्टूबर तक जोड़ दिया जाएगा। इसके लिए शासन द्वारा खनन निरीक्षक को निर्देश भी जारी कर दिए हैं। निर्धारित मात्रा से अधिक बालू का परिवहन कर राजस्व को चपत न लगाई जाए इसके लिए ई-रवन्ना भी जल्द जारी किया जाएगा। इसके तहत गाड़ी का मानक फीड होते ही उसकी क्षमता के अनुरूप मशीन से रवन्ना मिल जाएगा। कुल मिलाकर अब हाईटेक हो रहे बालू घाटों पर अवैध खनन व परिवहन कर पाना किसी भी पट्टेधारक के बूते की बात नहीं होगी। पट्टे से हटकर किसी भी पट्टेधारक ने खनन शुरू किया तो वह फौरन पकड़ में आ जाएगा। जिले के जिम्मेदारों की माने तो यह हाईटेक व्यवस्था अक्टूबर माह में खनन शुरू होते ही लागू हो जाएगा।
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नहीं बेचा जा सकेगा रवन्ना
बालू घाटों का पट्टा लेने के बाद कारोरियों द्वारा अभी तक बड़े-बड़े खेल किए जाते थे। पभोषा बालू घाट का रवन्ना उमरवल में हो रहे अवैध खनन में प्रयोग में लाया जाता था। ई-रवन्ने की शुरआत होने से इस पर लगाम लगेगी। संबंधित पट्टेधारक अब रवन्ना बेच नहीं सकेगा। उसे अपने घाट पर हो रहे खनन की बालू का परिवहन करने के लिए वाहनों को ई-रवन्ना खुद देना होगा। इससे रवन्ना बेंचने के खेल पर तो अंकुश लगेगा ही अवैध परिवहन भी पूरी तरह से बंद होगा। जिले में यह व्यवस्था एक जुलाई से पूरी तरह से लागू हो जाएगी।
सेटेलाइट से होगी बालू घाटों की निगरानी
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जिले के बालू कारोबारियों द्वारा पट्टा लेने के बाद घाटों पर जमकर मनमानी की जाती थी। पट्टे से हटकर अवैध खनन के साथ-साथ ओवरलोड वाहनों का परिवहन भी कराया जाता था। कारोबारियों का यह खेल पिछले साल तक जिले में जमकर चला। इस साल पट्टों पर खनन शुरू हुआ तो डीएम मनीष कुमार वर्मा के नेतृत्व में विभागीय व प्रशासनिक अधिकारियों ने पट्टाधारकों पर काफी हद तक नकेल कस दिया है।
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अब शासन द्वारा बालू खनन में पूरी तरह से पारदर्शिता लाने की कवायद शुरू कर दी गई है। बालू घाटों पर जीपीएस सिस्टम के जरिए सेटेलाइट सिस्टम से एक अक्टूबर तक जोड़ दिया जाएगा। इसके लिए शासन द्वारा खनन निरीक्षक को निर्देश भी जारी कर दिए हैं। निर्धारित मात्रा से अधिक बालू का परिवहन कर राजस्व को चपत न लगाई जाए इसके लिए ई-रवन्ना भी जल्द जारी किया जाएगा। इसके तहत गाड़ी का मानक फीड होते ही उसकी क्षमता के अनुरूप मशीन से रवन्ना मिल जाएगा। कुल मिलाकर अब हाईटेक हो रहे बालू घाटों पर अवैध खनन व परिवहन कर पाना किसी भी पट्टेधारक के बूते की बात नहीं होगी। पट्टे से हटकर किसी भी पट्टेधारक ने खनन शुरू किया तो वह फौरन पकड़ में आ जाएगा। जिले के जिम्मेदारों की माने तो यह हाईटेक व्यवस्था अक्टूबर माह में खनन शुरू होते ही लागू हो जाएगा।
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नहीं बेचा जा सकेगा रवन्ना
बालू घाटों का पट्टा लेने के बाद कारोरियों द्वारा अभी तक बड़े-बड़े खेल किए जाते थे। पभोषा बालू घाट का रवन्ना उमरवल में हो रहे अवैध खनन में प्रयोग में लाया जाता था। ई-रवन्ने की शुरआत होने से इस पर लगाम लगेगी। संबंधित पट्टेधारक अब रवन्ना बेच नहीं सकेगा। उसे अपने घाट पर हो रहे खनन की बालू का परिवहन करने के लिए वाहनों को ई-रवन्ना खुद देना होगा। इससे रवन्ना बेंचने के खेल पर तो अंकुश लगेगा ही अवैध परिवहन भी पूरी तरह से बंद होगा। जिले में यह व्यवस्था एक जुलाई से पूरी तरह से लागू हो जाएगी।
सेटेलाइट से होगी बालू घाटों की निगरानी