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गोशाला के समीप तालाब में फेंके जाते थे गोवंश, पशु चिकित्सक व सचिव सस्पेंड
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Cows, veterinarians and secretaries suspended in the pond near Goshala
- फोटो : KAUSHAMBI
प्रमुख सचिव दुग्ध विकास, मत्स्य समन्वय व पशुधन और जिले के नोडल अधिकारी भुवनेश कुमार ने बृहस्पतिवार को नेवादा विकास खंड के रसूलपुर टप्पा और चकपिनहा में बने अस्थाई गोआश्रय स्थल का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान पता चला कि गोशाला में जिस तालाब का पानी मवेशी पीते हैं उसी में मृत गोवंशों को फेंक दिया जाता है। इससे नाराज प्रमुख सचिव ने चकपिनहा के सचिव व पशु चिकित्सक को निलंबित करने और ग्राम प्रधान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया। इसके अलावा गोआश्रय स्थल की निगरानी जिन अफसरों को सौंपी गई थी, उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया।
चकपिनहा गांव स्थित गोशाला के समीप ही मवेशियों को पानी पीने के लिए तालाब की खुदाई कराई गई है। इसी तालाब मेें मवेशी पानी पीते हैं। ग्रामीणों ने प्रमुख सचिव को बताया कि यहां जो गोवंश मर जाते हैं उन्हें दफन कराने के बजाय सीधे तालाब में फेंक दिया जाता है।
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मजबूरन मवेशी बदबूदार पानी पी रहे हैं। इससे नाराज प्रमुख सचिव ने सचिव जितेंद्र सिंह और पशु चिकित्सक राजेश सिंह को निलंबित कर दिया। प्रधान के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया। गोशाला में गोवंशों की टैगिंग की सही मेल न होने और रजिस्टर में विवरण दर्ज न होने पर सचिव ने नाराजगी जाहिर की।
प्रमुख सचिव ने इस खामी को सही करने के साथ ही मवेशियों के लिए भूसा व पानी की व्यवस्था करने को कहा। नोडल अधिकारी ने एक सप्ताह के अंदर आश्रय स्थल की सभी व्यवस्था पूर्ण कराने को कहा। साथ ही मवेशियों को ठंड से बचाव के लिए बोरे का पर्दा लगवाने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी अमित कुमार सिंह, सीडीओ शशिकांत त्रिपाठी, सीवीओ डॉ. वीपी पाठक, डीएफओ आदि मौजूद रहे।
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निरीक्षण के दौरान पता चला कि गोशाला में जिस तालाब का पानी मवेशी पीते हैं उसी में मृत गोवंशों को फेंक दिया जाता है। इससे नाराज प्रमुख सचिव ने चकपिनहा के सचिव व पशु चिकित्सक को निलंबित करने और ग्राम प्रधान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया। इसके अलावा गोआश्रय स्थल की निगरानी जिन अफसरों को सौंपी गई थी, उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया।
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चकपिनहा गांव स्थित गोशाला के समीप ही मवेशियों को पानी पीने के लिए तालाब की खुदाई कराई गई है। इसी तालाब मेें मवेशी पानी पीते हैं। ग्रामीणों ने प्रमुख सचिव को बताया कि यहां जो गोवंश मर जाते हैं उन्हें दफन कराने के बजाय सीधे तालाब में फेंक दिया जाता है।
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मजबूरन मवेशी बदबूदार पानी पी रहे हैं। इससे नाराज प्रमुख सचिव ने सचिव जितेंद्र सिंह और पशु चिकित्सक राजेश सिंह को निलंबित कर दिया। प्रधान के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया। गोशाला में गोवंशों की टैगिंग की सही मेल न होने और रजिस्टर में विवरण दर्ज न होने पर सचिव ने नाराजगी जाहिर की।
प्रमुख सचिव ने इस खामी को सही करने के साथ ही मवेशियों के लिए भूसा व पानी की व्यवस्था करने को कहा। नोडल अधिकारी ने एक सप्ताह के अंदर आश्रय स्थल की सभी व्यवस्था पूर्ण कराने को कहा। साथ ही मवेशियों को ठंड से बचाव के लिए बोरे का पर्दा लगवाने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी अमित कुमार सिंह, सीडीओ शशिकांत त्रिपाठी, सीवीओ डॉ. वीपी पाठक, डीएफओ आदि मौजूद रहे।