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Kaushambi News: कॅरिअर काउंसलिंग से खुलेंगे भविष्य के द्वार, छात्रों की समस्याएं होंगी हल
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भविष्य में क्या करना है, क्या नहीं इसे लेकर इंटर के छात्रों के सामने हमेशा संकट रहता है। इंजीनियरिंग, मेडिकल और प्रतियोगी परीक्षा में से किसे चुना जाए इसे लेकर छात्र उलझे रहते हैं। वह दबाव में अपनी राह नहीं चुन पाते हैं। उनकी समस्या का समाधान करने के लिए जिले के 25 राजकीय विद्यालयों में कॅरिअर काउंसलिंग के जरिये छात्रों को राह दिखाई जाएगी। इससे छात्रों के भविष्य के द्वार खुलेंगे।
जिले में कॅरिअर काउंसलिंग कराने के लिए पांच लाख का बजट आया है। प्रत्येक विद्यालय को 20-20 हजार का बजट स्वीकृत किया गया है। काउंसलिंग के जरिये इंटर के विद्यार्थी किस दिशा में आगे बढ़े इसकी जानकारी दी जाएगी। यह समाधान स्कूल स्तर पर ही होगा।
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. एसएन यादव ने बताया कि एक छात्र की पढ़ाई का स्तर क्या है। उसके लिए कौन से मार्ग बेहतर हो सकता है। यह शिक्षक के अलावा अन्य कोई नहीं समझ सकता। ऐसे में स्कूल में शिक्षक व अभिभावक छात्र की आगे की पढ़ाई पर चर्चा करेंगे। छात्र भी इसमें शामिल होकर अपनी रुचि बता सकेंगे।
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यहां खर्च होगी धनराशि
-- - कॅरियर काउंसलिंग प्रक्रिया कई चरण में होगी। इसके लिए स्कूल अपने स्तर से प्रयास करने के साथ ही बाहर से काउंसलर बुला सकते हैं। बाहरी काउंसलर की फीस और आयोजन के खर्च के लिए यह धनराशि मिली है।
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क्षमता को जानकार लिया जाएगा फैसला
- डीआईओएस ने बताया कि बच्चों को लेकर माता-पिता के अंदर तमाम समस्याएं हो सकती है। काउंसलिंग के दौरान इन समस्याओं को दूर किया जाएगा। ऐसे में अभिभावक बच्चे से ज्यादा अपेक्षा करने के स्थान पर उसकी क्षमता को जानकार सही फैसला लेने का काम करेंगे।
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जिले में कॅरिअर काउंसलिंग कराने के लिए पांच लाख का बजट आया है। प्रत्येक विद्यालय को 20-20 हजार का बजट स्वीकृत किया गया है। काउंसलिंग के जरिये इंटर के विद्यार्थी किस दिशा में आगे बढ़े इसकी जानकारी दी जाएगी। यह समाधान स्कूल स्तर पर ही होगा।
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जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. एसएन यादव ने बताया कि एक छात्र की पढ़ाई का स्तर क्या है। उसके लिए कौन से मार्ग बेहतर हो सकता है। यह शिक्षक के अलावा अन्य कोई नहीं समझ सकता। ऐसे में स्कूल में शिक्षक व अभिभावक छात्र की आगे की पढ़ाई पर चर्चा करेंगे। छात्र भी इसमें शामिल होकर अपनी रुचि बता सकेंगे।
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यहां खर्च होगी धनराशि
क्षमता को जानकार लिया जाएगा फैसला
- डीआईओएस ने बताया कि बच्चों को लेकर माता-पिता के अंदर तमाम समस्याएं हो सकती है। काउंसलिंग के दौरान इन समस्याओं को दूर किया जाएगा। ऐसे में अभिभावक बच्चे से ज्यादा अपेक्षा करने के स्थान पर उसकी क्षमता को जानकार सही फैसला लेने का काम करेंगे।