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Kaushambi News: ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का भवन तैयार, अब निरीक्षण और लाइसेंस का इंतजार
Wed, 26 Jun 2024 05:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Wed, 26 Jun 2024 05:18 AM IST
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ब्लड कंपोनेँट सेपरेशन यूनिट में रखी मशीनें। संवाद
मेडिकल काॅलेज में ब्लड बैंक में जल्द ही एक यूनिट रक्त से चार लोगों की जान बचाई जा सकेगी। इसके लिए ब्लड बैंक कंपोनेंट और सेपरेशन यूनिट का भवन तैयार हो गया है। मशीनें साल भर पहले ही आ चुकी हैं। अब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की केंद्रीय टीम के निरीक्षण का इंतजार है। इसके बाद ही लाइसेंस जारी होगा। उम्मीद है कि डेढ़ से दो महीने में यह यूनिट शुरू हो जाएगी।
मेडिकल कॉलेज में ब्लड बैंक संयुक्त जिला चिकित्सालय के समय से ही संचालित है। यहां ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट नहीं थी। ब्लड बैंक में ब्लड सेपरेशन यूनिट यूनिट बन जाने से एक यूनिट ब्लड से चार चीजें अलग कर करने की सुविधा मिल सकेगी। इसमें पीआरबीसी, एफएफपी, प्लेटलेट्स, क्राओपीसीपीटल को अलग-अलग किया जा सकेगा। इससे एक ही यूनिट ब्लड से चार लोगों की जरूरत को पूरा किया जा सकेगा।
ब्लड सेपरेशन यूनिट के लिए मशीनें पिछले साल ही आ गई थीं। ब्लड बैंक में ही यह यूनिट लगनी थी, लेकिन इसके लिए जगह पर्याप्त नहीं थी। इस पर कॉलेज प्रशासन ने ब्लड बैंक के पिछले हिस्से में यूनिट के लिए भवन का निर्माण करा लिया है। हाल ही में इसका काम पूरा हुआ है। इस यूनिट का लाइसेंस एफएसडीए के केंद्रीय कार्यालय से जारी होता है। विभाग के केंद्र और प्रदेश स्तर के अफसरों की संयुक्त टीम इस भवन का निरीक्षण करेगी। अब अधिकारी इस टीम का इंतजार कर रहे हैं।
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क्या है कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट
ब्लड में 4 कंपोनेंट होते हैं। इनमें रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट शामिल हैं। सेपरेशन यूनिट में ब्लड को घुमाया (मथा) जाता है। इससे ब्लड परत दर परत (लेयर बाई लेयर) हो जाता है और आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट अलग-अलग हो जाते हैं। जरूरत के मुताबिक इनको निकाल कर संरक्षित किया जाता है। निकले गए रक्त के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग जीवन अवधि होती है। जिले में इस यूनिट के न होने के कारण काफी दिक्कतें हो रहीं हैं। मरीजों के तीमारदारों को प्रयागराज तक दौड़ लगानी पड़ती थी।
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प्लेटलेट, आरबीसी और प्लाज्मा की ज्यादा मांग
चिकित्सकों की ओर से डेंगू में प्लेटलेट्स और खून की कमी में आरबीसी चढ़वाने की सलाह दी जाती है। जिले में इनके मरीज बड़ी संख्या में निकलते हैं। इसके अलावा सर्जरी के दौरान रोगियों में प्लाज्मा चढ़वाने की आवश्यकता पड़ती है। जनपद में खून के इन्हीं तीन कंपोनेंट की सबसे अधिक मांग है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि इस यूनिट के लगने के बाद मरीजों को और भी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
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ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का भवन तैयार हो गया है। किसी भी दिन केंद्रीय टीम इसका निरीक्षण करने आ सकती है। उम्मीद है कि डेढ़ से दो महीने के अंदर यह यूनिट शुरू हो जाएगी।
डॉ. एसके शुक्ल
सीएमएस, मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज में ब्लड बैंक संयुक्त जिला चिकित्सालय के समय से ही संचालित है। यहां ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट नहीं थी। ब्लड बैंक में ब्लड सेपरेशन यूनिट यूनिट बन जाने से एक यूनिट ब्लड से चार चीजें अलग कर करने की सुविधा मिल सकेगी। इसमें पीआरबीसी, एफएफपी, प्लेटलेट्स, क्राओपीसीपीटल को अलग-अलग किया जा सकेगा। इससे एक ही यूनिट ब्लड से चार लोगों की जरूरत को पूरा किया जा सकेगा।
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ब्लड सेपरेशन यूनिट के लिए मशीनें पिछले साल ही आ गई थीं। ब्लड बैंक में ही यह यूनिट लगनी थी, लेकिन इसके लिए जगह पर्याप्त नहीं थी। इस पर कॉलेज प्रशासन ने ब्लड बैंक के पिछले हिस्से में यूनिट के लिए भवन का निर्माण करा लिया है। हाल ही में इसका काम पूरा हुआ है। इस यूनिट का लाइसेंस एफएसडीए के केंद्रीय कार्यालय से जारी होता है। विभाग के केंद्र और प्रदेश स्तर के अफसरों की संयुक्त टीम इस भवन का निरीक्षण करेगी। अब अधिकारी इस टीम का इंतजार कर रहे हैं।
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क्या है कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट
ब्लड में 4 कंपोनेंट होते हैं। इनमें रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट शामिल हैं। सेपरेशन यूनिट में ब्लड को घुमाया (मथा) जाता है। इससे ब्लड परत दर परत (लेयर बाई लेयर) हो जाता है और आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट अलग-अलग हो जाते हैं। जरूरत के मुताबिक इनको निकाल कर संरक्षित किया जाता है। निकले गए रक्त के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग जीवन अवधि होती है। जिले में इस यूनिट के न होने के कारण काफी दिक्कतें हो रहीं हैं। मरीजों के तीमारदारों को प्रयागराज तक दौड़ लगानी पड़ती थी।
प्लेटलेट, आरबीसी और प्लाज्मा की ज्यादा मांग
चिकित्सकों की ओर से डेंगू में प्लेटलेट्स और खून की कमी में आरबीसी चढ़वाने की सलाह दी जाती है। जिले में इनके मरीज बड़ी संख्या में निकलते हैं। इसके अलावा सर्जरी के दौरान रोगियों में प्लाज्मा चढ़वाने की आवश्यकता पड़ती है। जनपद में खून के इन्हीं तीन कंपोनेंट की सबसे अधिक मांग है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि इस यूनिट के लगने के बाद मरीजों को और भी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का भवन तैयार हो गया है। किसी भी दिन केंद्रीय टीम इसका निरीक्षण करने आ सकती है। उम्मीद है कि डेढ़ से दो महीने के अंदर यह यूनिट शुरू हो जाएगी।
डॉ. एसके शुक्ल
सीएमएस, मेडिकल कॉलेज

ब्लड कंपोनेँट सेपरेशन यूनिट में रखी मशीनें। संवाद