{"_id":"68a4da1820b1cc3fe408926b","slug":"after-ram-babus-death-there-was-a-political-fight-in-lohanda-village-kaushambi-news-c-261-1-kmb1002-129220-2025-08-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaushambi News: रामबाबू की मौत के बाद लोहंदा गांव में हुआ था राजनीत का दंगल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaushambi News: रामबाबू की मौत के बाद लोहंदा गांव में हुआ था राजनीत का दंगल
Wed, 20 Aug 2025 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Wed, 20 Aug 2025 01:40 AM IST
विज्ञापन
जहरीला पदार्थ खाने से चार जून को रामबाबू तिवारी की मौत के बाद लोहंदा गांव में सियासी भूचाल आ गया था। गांव की राजनीति सत्ता के गलियारों में गूंजने लगी थी। हफ्तों नेताओं, संगठनों का जमावड़ा रहा। तीन पुलिस कर्मी अभी तक निलंबित चल रहे हैं।
पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीति जातीय एंगल से काम कर रही थी। अगड़ा-पिछड़ा और दलित। दरअसल, पीड़ित बालिका दलित बिरादरी की है। घटना का मुख्य सूत्रधार ग्राम प्रधान पिछड़ा बिरादरी और जान गंवाने वाला अगड़ा वर्ग का था। इन्हीं तीन बिंदुओं को ध्यान में रखकर पार्टियां अपने नेताओं को मरहम-पट्टी के लिए भेज रही थीं। दरवाजे-दरवाजे दस्तक दी जा रही थी।
एक धड़ा दुष्कर्म पीड़िता और उसके परिवार के साथ खड़ा होकर न्याय दिलाने की मांग कर रहा था। दूसरा रामबाबू को निर्दोष बताते हुए पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगा रहा था। तीसरा धड़ा मुख्य आरोपी ग्राम प्रधान की पैरवी कर रहा था। लोहंदा गांव छावनी में तब्दील हो गया था। माहौल इतना गर्मा गया था कि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख सांसद चंद्रशेखर को गांव जाने से रोक दिया गया था।
विज्ञापन
मामला तब और संदेह के घेरे में आ गया, जब पीड़िता के बयान में झोल निकला। एसपी ने इसे खुद स्वीकारा। इसके बाद दुष्कर्म के आरोपी को जमानत मिल गई। विवेचक को निलंबित कर दिया गया। कौशाम्बी पुलिस से जांच हटाकर प्रतापगढ़ पुलिस को सौंप दी गई।
वर्जन
लोहंदा कांड को लेकर निलंबित चल रहे थाना प्रभारी बृजेश करवरिया, पथरावां चौकी प्रभारी आलोक कुमार और विवेचक सब इंस्पेक्टर कृष्ण स्वरूप के खिलाफ जांच अभी जारी है।
राजेश कुमार, एसपी
विज्ञापन
पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीति जातीय एंगल से काम कर रही थी। अगड़ा-पिछड़ा और दलित। दरअसल, पीड़ित बालिका दलित बिरादरी की है। घटना का मुख्य सूत्रधार ग्राम प्रधान पिछड़ा बिरादरी और जान गंवाने वाला अगड़ा वर्ग का था। इन्हीं तीन बिंदुओं को ध्यान में रखकर पार्टियां अपने नेताओं को मरहम-पट्टी के लिए भेज रही थीं। दरवाजे-दरवाजे दस्तक दी जा रही थी।
विज्ञापन
एक धड़ा दुष्कर्म पीड़िता और उसके परिवार के साथ खड़ा होकर न्याय दिलाने की मांग कर रहा था। दूसरा रामबाबू को निर्दोष बताते हुए पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगा रहा था। तीसरा धड़ा मुख्य आरोपी ग्राम प्रधान की पैरवी कर रहा था। लोहंदा गांव छावनी में तब्दील हो गया था। माहौल इतना गर्मा गया था कि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख सांसद चंद्रशेखर को गांव जाने से रोक दिया गया था।
विज्ञापन
मामला तब और संदेह के घेरे में आ गया, जब पीड़िता के बयान में झोल निकला। एसपी ने इसे खुद स्वीकारा। इसके बाद दुष्कर्म के आरोपी को जमानत मिल गई। विवेचक को निलंबित कर दिया गया। कौशाम्बी पुलिस से जांच हटाकर प्रतापगढ़ पुलिस को सौंप दी गई।
वर्जन
लोहंदा कांड को लेकर निलंबित चल रहे थाना प्रभारी बृजेश करवरिया, पथरावां चौकी प्रभारी आलोक कुमार और विवेचक सब इंस्पेक्टर कृष्ण स्वरूप के खिलाफ जांच अभी जारी है।
राजेश कुमार, एसपी