कौशांबी : जिला पंचायत के रास्ते राजनीति में दखल देना चाहता था अब्दुल कवि, छोटे भाई की पत्नी को लड़ाया था चुनाव
माफिया अतीक अहमद के शूटर अब्दुल कवि की राजनीतिक महात्वाकांक्षा का भी पता चला है। उसकी सियासी जोड़तोड़ के भी चर्चे हो रहे हैं। दरअसल फरारी काटने के दौरान उसने जिला पंचायत के रास्ते राजनीति में इंट्री मारने की कोशिश की थी।
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माफिया अतीक अहमद के शूटर अब्दुल कवि की राजनीतिक महात्वाकांक्षा का भी पता चला है। उसकी सियासी जोड़तोड़ के भी चर्चे हो रहे हैं। दरअसल फरारी काटने के दौरान उसने जिला पंचायत के रास्ते राजनीति में इंट्री मारने की कोशिश की थी। राजू पाल हत्याकांड के बाद 18 साल से फरार शूटर अब्दुल कवि ने अपने छोटे भाई की पत्नी को वार्ड नंबर 23 से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ाया था। चुनाव प्रचार में उसने पूरी ताकत झोंकी, धनबल व बाहुबल का प्रयोग किया। इसके बाद भी उसके मंसूबे सफल नहीं हो सके।
अब्दुल कवि चुनाव प्रचार कर रहा था, लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार करना मुनासिब नहीं समझा। सवाल है कि खुफिया तंत्र को इसकी भनक तक क्यों नहीं लग सकी। राजूपाल हत्याकांड में सीबीआई ने भखंदा गांव के अब्दुल कवि को भगोड़ा घोषित किया है। वह लंबे समय से पुलिस को चकमा देकर फरार है। इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को भी थी। वर्ष 2020 में शूटर अब्दुल कवि ने सरायअकिल कोतवाली के चकपिन्हा गांव निवासी ओमप्रकाश पाल पर भी जानलेवा हमला किया था।
ओमप्रकाश भी राजूपाल हत्याकांड के गवाह हैं। इस मामले में पुलिस ने अब्दुल कवि व उसके साथी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसके बावजूद अब्दुल कवि अक्सर जिले में आता था। लेकिन, पुलिस उसकी गिरफ्तारी को लेकर सक्रिय नहीं हुई। अप्रैल 2021 के जिला पंचायत चुनाव में अब्दुल कवि ने राजनीति में इंट्री मारने का प्रयास किया। उसने अपने भाई अब्दुल वली की पत्नी फौजिया को वार्ड नं. 23 से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ाया।
इस चुनाव में अब्दुल कवि कई दिनों तक गांव में ही रहकर इलाके में चुनाव प्रचार किया। फौजिया को चुनाव जितवाने के लिए उसने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। हालांकि, इसके बाद भी हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में फौजिया चौथे नंबर पर रही। चुनाव में कुल 15 प्रत्याशी मैदान में थे। इससे साफ है कि अब्दुल कवि का फरारी के दौरान भी अपने घर बराबर आना-जाना रहा। 24 फरवरी को प्रयागराज में उमेश पाल व उनके दो सरकारी सुरक्षा कर्मियों की हत्या के बाद अब्दुल कवि के नाम की चर्चा हुई है।
पुलिस का दावा है कि हत्याकांड के बाद अब्दुल कवि अपने साथियों के साथ भखंदा स्थित अपने पैतृक घर में ही छिपा था। दबिश दी गई तो वह भाग निकला। पुलिस को घर में छिपाकर रखे गए अवैध असलहों के बारे में भी जानकारी मिली। बुलडोजर से घर गिरवाकर देखा गया तो दीवारों में छिपाकर रखे गए छह तमंचे, पांच बम, चापड़, चाकू मिले। इस प्रकरण में सरायअकिल इंस्पेक्टर विनीत सिंह की तहरीर पर अब्दुल कवि समेत उसके परिवार के 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। मुकदमे में नामजद फौजिया भी है, जिसे अब्दुल कवि ने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़वाया था।