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Kaushambi News: दशक बीता...रोडवेज में आज तक नहीं बैठे मंत्री और विधायक
Wed, 12 Nov 2025 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Wed, 12 Nov 2025 12:38 AM IST
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परिवहन निगम की बसों में दो-दो सीट सांसद और विधायकों के लिए आरक्षित होती है लेकिन पिछले 10 वर्षों में किसी भी माननीय ने बस में सफर नहीं किया। ज्यादातर जनप्रतिनिधि चाहे लखनऊ जाना हो या दिल्ली खुद की गाड़ियों का प्रयोग करते हैं।
सरकार ने परिवहन निगम की 52 सीटर बसों में सांसद, विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, लोकतंत्र सेनानी, महिलाओं और दिव्यांगों सहित मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए 12 सीटें आरक्षित कर रखीं हैं, ताकि माननीय व विशिष्ट व्यक्तियों को खड़े होकर यात्रा न करनी पड़े।
जबकि बीते 10 वर्ष में एक भी सांसद और विधायक ने बसों में सफर नहीं किया। जहां भी गए, उन्होंने अपनी खुद की लग्जरी गाड़ियों का प्रयोग किया।
ऐसे में सरकार के दावों पर सवाल उठता है कि क्या वास्तव में बसों की हालत ऐसी है कि विपक्ष तो दूर सत्तापक्ष पक्ष के जनप्रतिनिधि भी बसों में चलने से गुरेज कर रहे हैं। जबकि सरकार ने सांसद और विधायकों को रेल, हवाई जहाज और बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की है।
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बसों में आरक्षित सीटों को लेकर विशेष निर्देश है कि माननीय या अन्य आरक्षित सीट के होल्डर के आने पर सीट पर बैठे यात्री को खाली करनी पड़ेगी। ऐसा उसे पहले ही बता दिया जाता है। संवाद
बसों में आरक्षित सीट
आरक्षण सीट
जन प्रतिनिधि दो
स्वतंत्रता सेनानी दो
लोकतंत्र सेनानी दो
महिला दो
दिव्यांग दो
प्रदेश सरकार की बस की हालत ऐसी नहीं है कि इनपर बैठक सफर किया जाए। यदि आप बस में यात्रा कर रहे हैं तो यात्रा पूरी होगी, इसकी गारंटी नहीं है। लोगों के पास पहुंचना और उनकी समस्याएं सुनने के लिए बस से पहुंच पाना संभव भी नहीं है। ऐसे में निजी वाहन का प्रयोग करना पड़ता है। - डॉ. पल्लवी पटेल, विधायक सिराथू
सांसद व विधायक ने कब बस में बैठ कर सफर किया है, इसकी जानकारी नहीं है। नहीं ही विभाग में इस प्रकार का कोई डाटा ही तैयार किया गया है। - गंगा शंकर शर्मा, इंचार्ज मंझनपुर डीपो
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सरकार ने परिवहन निगम की 52 सीटर बसों में सांसद, विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, लोकतंत्र सेनानी, महिलाओं और दिव्यांगों सहित मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए 12 सीटें आरक्षित कर रखीं हैं, ताकि माननीय व विशिष्ट व्यक्तियों को खड़े होकर यात्रा न करनी पड़े।
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जबकि बीते 10 वर्ष में एक भी सांसद और विधायक ने बसों में सफर नहीं किया। जहां भी गए, उन्होंने अपनी खुद की लग्जरी गाड़ियों का प्रयोग किया।
ऐसे में सरकार के दावों पर सवाल उठता है कि क्या वास्तव में बसों की हालत ऐसी है कि विपक्ष तो दूर सत्तापक्ष पक्ष के जनप्रतिनिधि भी बसों में चलने से गुरेज कर रहे हैं। जबकि सरकार ने सांसद और विधायकों को रेल, हवाई जहाज और बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की है।
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बसों में आरक्षित सीटों को लेकर विशेष निर्देश है कि माननीय या अन्य आरक्षित सीट के होल्डर के आने पर सीट पर बैठे यात्री को खाली करनी पड़ेगी। ऐसा उसे पहले ही बता दिया जाता है। संवाद
बसों में आरक्षित सीट
आरक्षण सीट
जन प्रतिनिधि दो
स्वतंत्रता सेनानी दो
लोकतंत्र सेनानी दो
महिला दो
दिव्यांग दो
प्रदेश सरकार की बस की हालत ऐसी नहीं है कि इनपर बैठक सफर किया जाए। यदि आप बस में यात्रा कर रहे हैं तो यात्रा पूरी होगी, इसकी गारंटी नहीं है। लोगों के पास पहुंचना और उनकी समस्याएं सुनने के लिए बस से पहुंच पाना संभव भी नहीं है। ऐसे में निजी वाहन का प्रयोग करना पड़ता है। - डॉ. पल्लवी पटेल, विधायक सिराथू
सांसद व विधायक ने कब बस में बैठ कर सफर किया है, इसकी जानकारी नहीं है। नहीं ही विभाग में इस प्रकार का कोई डाटा ही तैयार किया गया है। - गंगा शंकर शर्मा, इंचार्ज मंझनपुर डीपो