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आवास घोटाले की जांच शुरू
Kaushambi
Updated Tue, 13 Nov 2012 12:00 PM IST
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सिराथू (कौशाम्बी)। मधवामई गांव में इंदिरा आवास के नाम पर हुए गड़बड़झाले की अमर उजाला ने साढ़े आठ लाख किए हजम! शीर्षक से सोमवार को खबर प्रकाशित की थी। इससे पूर दिन कर्मचारियाें और अफसरों में हड़कंप मचा रहा। मामले को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने जांच के आदेश दे दिए हैं। इसके बाद सोमवार से ही जांच भी शुरू कर दी गई है। खंड विकास अधिकारी ने कहाकि गड़बड़ी मिलने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। साथ ही रिकवरी भी होगी।
मधवामई गांव में आवासहीनों को इंदिरा आवास देने के नाम पर मोटी रकम का बंदरबाट किया गया है। पूर्व प्रधान बेनी प्रसाद ने प्रधान धर्मेंद्र कुमार और सेक्रेटरी पर सांठगांठ करके करीब 19 पूर्व लाभार्थियों के नाम फर्जीवाड़ा करके करीब 8 लाख 50 हजार रुपये हजम करने का आरोप लगाया था। पूर्व प्रधान के आरोपों से विभाग में सोमवार को हड़कंप मच गया है। बीडीओ ने जांच शुरू कर दी है।
बताया जाता है कि गरीबों को आवास के लिए योजना के तहत 45 हजार रुपये प्रति आवास दिए जाते हैं। इस सरकारी धन से ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी की देख-रेख में लाभार्थी स्वंय आवास का निर्माण करवाता है। आरोप है कि वर्ष 2010-11 में गांव के रमेश, विजयी, गुंजे लाल, श्रीचंद्र, मुन्नू लाल, रामदास, हीरा लाल, राजपति, रामसजीवन, विश्राम दास, लखन, हरी लाल, बुधराज, नत्थू, धर्मराज, गयादीन, सिपाही लाल, राम भवन, रामशरन अदि के नाम इंदिरा आवास आवंटित कर दिया गया था। जबकि पूर्व प्रधान बेनी प्रसाद का कहना है कि इन लाभार्थियों को पूर्व में ही इंदिरा आवास आवंटित कर बनवा दिया गया था। आरोप है कि ग्राम प्रधान सेक्रेटरी ने सांठगांठ कर सरकारी रकम हजम करने के लिए पुराने आवास का रंग-रोगन करा नया दिखा योजना का पैसा आपस में बांटकर बैठ गए।
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मधवामई गांव में आवासहीनों को इंदिरा आवास देने के नाम पर मोटी रकम का बंदरबाट किया गया है। पूर्व प्रधान बेनी प्रसाद ने प्रधान धर्मेंद्र कुमार और सेक्रेटरी पर सांठगांठ करके करीब 19 पूर्व लाभार्थियों के नाम फर्जीवाड़ा करके करीब 8 लाख 50 हजार रुपये हजम करने का आरोप लगाया था। पूर्व प्रधान के आरोपों से विभाग में सोमवार को हड़कंप मच गया है। बीडीओ ने जांच शुरू कर दी है।
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बताया जाता है कि गरीबों को आवास के लिए योजना के तहत 45 हजार रुपये प्रति आवास दिए जाते हैं। इस सरकारी धन से ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी की देख-रेख में लाभार्थी स्वंय आवास का निर्माण करवाता है। आरोप है कि वर्ष 2010-11 में गांव के रमेश, विजयी, गुंजे लाल, श्रीचंद्र, मुन्नू लाल, रामदास, हीरा लाल, राजपति, रामसजीवन, विश्राम दास, लखन, हरी लाल, बुधराज, नत्थू, धर्मराज, गयादीन, सिपाही लाल, राम भवन, रामशरन अदि के नाम इंदिरा आवास आवंटित कर दिया गया था। जबकि पूर्व प्रधान बेनी प्रसाद का कहना है कि इन लाभार्थियों को पूर्व में ही इंदिरा आवास आवंटित कर बनवा दिया गया था। आरोप है कि ग्राम प्रधान सेक्रेटरी ने सांठगांठ कर सरकारी रकम हजम करने के लिए पुराने आवास का रंग-रोगन करा नया दिखा योजना का पैसा आपस में बांटकर बैठ गए।
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