{"_id":"5c9270edbdec2213f6783420","slug":"91553101037-kaushambi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपराध मुक्त समाज भी जरूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपराध मुक्त समाज भी जरूरी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अपराध मुक्त समाज भी जरूरी
-- वोटर अड्डा--
- खेत-खलिहानों में भी अब चुनाव की ही हो रही चर्चा
- आपसी बातचीत में पत्ते भी खोल रहे अन्नदाता
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। सियासत की चर्चा अब चाय-पान की दुकानों और दफ्तरों से होते हुए खेत-खलिहानों तक पहुंच गई है। लहलहाती सरसों की फसलों के बीच दोआबा के कई गांवों में बुधवार को कुछ ऐसा ही देखा गया।
मंझनपुर से करीब सात किलोमीटर की दूरी पर दीवर कोतारी गांव के किसान राममनोहर सुबह ही खेत पहुंच गए थे। वह पत्नी यशोदा के साथ पगडंडी पर बैठे सरसों की फसल को कटवाने के लिए बातचीत कर रहे थे। तभी गांव का रंजीत वहां पहुंच गया। बड़े ही उत्सुकता भरे लहजे में रंजीत ने पूछा, अरे चाचा... कुछ वोट के भी सोचेव, केका जितइहौ? चाचा खामोश...! कुछ मिनट बाद बोले फसल का हाल देखत हस तोका तो चुनावै की लाग है। जउन हमरे बरे सोची, जउन खाता म पइसा डाई, वही का वोट देब। रंजीत ने कुछ और सवाल दागने चाहे, लेकिन चाचा अपने काम में जुट गए तो वह भी खुद के खेत चला गया। हमारी टीम थोड़ी आगे बढ़ी तो चर्चित चपरी आम की बाग में कुछ युवक शौकिया हुक्का पी रहे थे। उनकी जुबान पर भी चुनाव की चर्चा थी। दिनेश ने कहा जो विकास की बात करेगा उसी को वोट मिलेगा। वहीं रवि ने कहा कि विकास के साथ अपराध मुक्त समाज भी जरूरी है। युवाओं के बीच जिस तरह से बहस चल रही थी, उसे देखकर लगा कि लंबे समय तक चलेगी। इस तरह का नजारा कई और जगहों पर भी देखने को मिला। कहीं पत्ते खुले दिखे तो कहीं पसोपेश की स्थिति नजर आई। कुल मिलाकर चुनाव को लेकर अब आम मतदाताओं में उत्साह दिखने लगा है।
विज्ञापन
-- वोटर अड्डा--
- खेत-खलिहानों में भी अब चुनाव की ही हो रही चर्चा
- आपसी बातचीत में पत्ते भी खोल रहे अन्नदाता
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। सियासत की चर्चा अब चाय-पान की दुकानों और दफ्तरों से होते हुए खेत-खलिहानों तक पहुंच गई है। लहलहाती सरसों की फसलों के बीच दोआबा के कई गांवों में बुधवार को कुछ ऐसा ही देखा गया।
मंझनपुर से करीब सात किलोमीटर की दूरी पर दीवर कोतारी गांव के किसान राममनोहर सुबह ही खेत पहुंच गए थे। वह पत्नी यशोदा के साथ पगडंडी पर बैठे सरसों की फसल को कटवाने के लिए बातचीत कर रहे थे। तभी गांव का रंजीत वहां पहुंच गया। बड़े ही उत्सुकता भरे लहजे में रंजीत ने पूछा, अरे चाचा... कुछ वोट के भी सोचेव, केका जितइहौ? चाचा खामोश...! कुछ मिनट बाद बोले फसल का हाल देखत हस तोका तो चुनावै की लाग है। जउन हमरे बरे सोची, जउन खाता म पइसा डाई, वही का वोट देब। रंजीत ने कुछ और सवाल दागने चाहे, लेकिन चाचा अपने काम में जुट गए तो वह भी खुद के खेत चला गया। हमारी टीम थोड़ी आगे बढ़ी तो चर्चित चपरी आम की बाग में कुछ युवक शौकिया हुक्का पी रहे थे। उनकी जुबान पर भी चुनाव की चर्चा थी। दिनेश ने कहा जो विकास की बात करेगा उसी को वोट मिलेगा। वहीं रवि ने कहा कि विकास के साथ अपराध मुक्त समाज भी जरूरी है। युवाओं के बीच जिस तरह से बहस चल रही थी, उसे देखकर लगा कि लंबे समय तक चलेगी। इस तरह का नजारा कई और जगहों पर भी देखने को मिला। कहीं पत्ते खुले दिखे तो कहीं पसोपेश की स्थिति नजर आई। कुल मिलाकर चुनाव को लेकर अब आम मतदाताओं में उत्साह दिखने लगा है।
विज्ञापन