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बजट खपाने में बीता दिन, गुलजार रहे दफ्तर
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बजट खपाने में बीता दिन, गुलजार रहे दफ्तर
मार्च महीने के अंतिम दिन रविवार होने पर भी खुले रहे ऑफिस
हिसाब का मिलान करने में परेशान रहे अफसर और बाबू
मंझनपुर। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन रविवार होने के बावजूद भी जिले के सारे दफ्तर खुले रहे। वजह बजट को निल करके रिपोर्ट भेजना था। इसे लेकर विभागों के अफसर सारा दिन माथापच्ची करते रहे। जिन विभागों का पैसा पूरा नहीं खर्च हो सका था, उसे सरकारी खजाने में वापस कर दिया गया।
सरकार का वित्तीय वर्ष एक अप्रैल से शुरू होता है। 31 मार्च को वित्तीय वर्ष का अंतिम दिन होता है। इस बार 31 मार्च रविवार को पड़ा। इसके बाद भी जिले के सारे दफ्तर खुले रहे। अफसर और विभाग के लेखाकार वित्तीय वर्ष में मिले सरकारी धन का हिसाब लगाने में मशगूल रहे। जिन विभागों ने सरकारी पैसा नहीं खर्च किया था, उसे वापस किया गया है। ट्रेजरी विभाग ने करीब डेढ़ लाख रुपया वापस सरकारी खजाने में जमा किया। इसी तरह जिला पंचायत राज विभाग, परियोजना कार्यालय आदि विभागों में भी पैसा खपाने की जद्दोजहद होती रही। किन विभागों को पिछले साल कितना पैसा मिला, उन्होंने कितना पैसा खर्च किया और कितना पैसा वापस सरकारी खजाने में जमा किया गया? इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है। ट्रेजरी विभाग के वरिष्ठ सहायक रत्नेश श्रीवास्तव ने बताया कि पहले सारे विभाग अपना लेखा-जोखा ट्रेजरी में जमा करते थे। अब सारी व्यवस्था ऑन लाइन कर दी गई है। विभाग अपने यहां का सारा हिसाब ऑन लाइन करेंगे। बाद में इसकी रिपोर्ट मिल सकेगी।
फोटो नं-01 से 04 तक
अस्पताल गेट पर तड़पता रहा साधु
मंझनपुर (ब्यूरो)। जिला अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष के बाहर एक बीमार साधु घंटो तड़पता रहा। लेकिन किसी डॉक्टर अथवा कर्मचारी ने उसकी सुधि नहीं ली। दोपहर बाद अस्पताल पहुंचे चिकित्सक डॉ. अरविंद कनौजिया के हस्तक्षेप के बाद साधु को भर्ती कर इलाज शुरु किया गया।
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जिला अस्पताल में अवकाश के दिन रामराज रहता है। चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ अपनी मर्जी के मालिक हो जाते हैं। ऐसे में मरीज मरे या जीए, किसी को फर्क नहीं पड़ता। रविवार की दोपहर भी ऐसा ही हुआ। इमरजेंसी ड्यूटी में रहे चिकित्सक डॉ. अरविंद कनौजिया लंच पर गए थे। इसी बीच कोई एक बीमार साधु को लेकर जिला अस्पताल आया और इमरजेंसी कक्ष के बाहर उसे छोड़कर चला गया। इसके बाद अस्पताल के पैरामेडिकल स्टाफ ने उसकी कोई सुधि नहीं ली। इमरजेंसी के पोर्च के नीचे पड़ा साधु कराह रहा था। करीब दो घंटे बाद लोगों की वहां पर भीड़ जुटने लगी तो किसी ने डॉ. अरविंद कनौजिया को खबर दी। मौके पर पहुंचे चिकित्सक ने स्टाफ को जमकर फटकार लगाई। इसके बाद साधु को इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।
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मार्च महीने के अंतिम दिन रविवार होने पर भी खुले रहे ऑफिस
हिसाब का मिलान करने में परेशान रहे अफसर और बाबू
मंझनपुर। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन रविवार होने के बावजूद भी जिले के सारे दफ्तर खुले रहे। वजह बजट को निल करके रिपोर्ट भेजना था। इसे लेकर विभागों के अफसर सारा दिन माथापच्ची करते रहे। जिन विभागों का पैसा पूरा नहीं खर्च हो सका था, उसे सरकारी खजाने में वापस कर दिया गया।
सरकार का वित्तीय वर्ष एक अप्रैल से शुरू होता है। 31 मार्च को वित्तीय वर्ष का अंतिम दिन होता है। इस बार 31 मार्च रविवार को पड़ा। इसके बाद भी जिले के सारे दफ्तर खुले रहे। अफसर और विभाग के लेखाकार वित्तीय वर्ष में मिले सरकारी धन का हिसाब लगाने में मशगूल रहे। जिन विभागों ने सरकारी पैसा नहीं खर्च किया था, उसे वापस किया गया है। ट्रेजरी विभाग ने करीब डेढ़ लाख रुपया वापस सरकारी खजाने में जमा किया। इसी तरह जिला पंचायत राज विभाग, परियोजना कार्यालय आदि विभागों में भी पैसा खपाने की जद्दोजहद होती रही। किन विभागों को पिछले साल कितना पैसा मिला, उन्होंने कितना पैसा खर्च किया और कितना पैसा वापस सरकारी खजाने में जमा किया गया? इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है। ट्रेजरी विभाग के वरिष्ठ सहायक रत्नेश श्रीवास्तव ने बताया कि पहले सारे विभाग अपना लेखा-जोखा ट्रेजरी में जमा करते थे। अब सारी व्यवस्था ऑन लाइन कर दी गई है। विभाग अपने यहां का सारा हिसाब ऑन लाइन करेंगे। बाद में इसकी रिपोर्ट मिल सकेगी।
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अस्पताल गेट पर तड़पता रहा साधु
मंझनपुर (ब्यूरो)। जिला अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष के बाहर एक बीमार साधु घंटो तड़पता रहा। लेकिन किसी डॉक्टर अथवा कर्मचारी ने उसकी सुधि नहीं ली। दोपहर बाद अस्पताल पहुंचे चिकित्सक डॉ. अरविंद कनौजिया के हस्तक्षेप के बाद साधु को भर्ती कर इलाज शुरु किया गया।
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जिला अस्पताल में अवकाश के दिन रामराज रहता है। चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ अपनी मर्जी के मालिक हो जाते हैं। ऐसे में मरीज मरे या जीए, किसी को फर्क नहीं पड़ता। रविवार की दोपहर भी ऐसा ही हुआ। इमरजेंसी ड्यूटी में रहे चिकित्सक डॉ. अरविंद कनौजिया लंच पर गए थे। इसी बीच कोई एक बीमार साधु को लेकर जिला अस्पताल आया और इमरजेंसी कक्ष के बाहर उसे छोड़कर चला गया। इसके बाद अस्पताल के पैरामेडिकल स्टाफ ने उसकी कोई सुधि नहीं ली। इमरजेंसी के पोर्च के नीचे पड़ा साधु कराह रहा था। करीब दो घंटे बाद लोगों की वहां पर भीड़ जुटने लगी तो किसी ने डॉ. अरविंद कनौजिया को खबर दी। मौके पर पहुंचे चिकित्सक ने स्टाफ को जमकर फटकार लगाई। इसके बाद साधु को इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।