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छह महीने के लिए फिर खड़ा हो जाएगा बालू का संकट
Updated Tue, 14 Nov 2017 01:05 AM IST
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छह महीने फिर रहेगा बालू का संकट
-आधा दर्जन पड़ोसी जिलों में सप्लाई होती है कौशाम्बी की यमुना में आई जाने वाली बालू
-पहली दिसम्बर से खत्म हो रही पुराने पट्टों की मियाद, मई से होगा नए पट्टों पर खनन
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। आधा दर्जन जिलों में एक बार फिर से बालू का संकट खड़ा होने जा रहा है। इससे संबंधित जिलों में निर्माण से जुड़े विकास कार्यों की प्रगति प्रभावित होने के साथ-साथ निजी निर्माण पर संकट रहेगा। छह माह के लिए दिए गए आठ खनन पट्टों की अवधि 30 नवंबर को समाप्त हो रही है। नए खनन पट्टों की सारी प्रक्रिया पूरी होने में मई तक का समय लगेगा। इस दौरान लोगों को बालू की किल्लत का सामना करना पड़ेगा।
यमुना घाटों से निकलने वाले मोरंग से जिले के अलावा प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, लखनऊ, रायबरेली, फैजाबाद, भदोही आदि जिलों में निर्माण कार्य कराए जाते हैं। मजबूती में बेमिसाल होने की वजह से यहां की बालू को सरकारी भवनों, पुल आदि में भी लगाया जाता है। पट्टे न होने और सीबीआई जांच की वजह से जिले में बालू खनन पूरी तरह से बंद हो गया था। इसके चलते जनवरी से लेकर जून तक जिले में बालू को लेकर हायतौबा मच गई थी। विकास कार्यों में शौचालय, आवास सहित अन्य कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहे थे। इसे देखते हुए शासन ने जिले के आठ बालू घाटों की छह माह के लिए ई-टेंडरिंग कराई। छह माह के खनन पट्टे में जून माह में 18 दिन ही खनन हो सका। बारिश के बाद एक अक्टूबर से शुरू खनन पहली दिसंबर को अवधि समाप्त होते ही बंद हो जाएगा। बालू का खनन बंद होते ही कौशांबी के अलावा आधा दर्जन जिलों का निर्माण कार्य प्रभावित होना तय है। उधर नए पट्टों की प्रक्रिया तो जिले में चल रही है पर मई से पहले खनन शुरू हो पाना संभव नहीं है। ऐसे में आगामी छह माह तक दोआबा सहित आधा दर्जन जिलों में कराए जाने वाले विकास कार्यों के लिए एक बार फिर से बालू का संकट उत्पन्न होता दिख रहा है।
इनसेट
आवेदन शुल्क व अग्रिम धनराशि तक पहुंचा ई-टेंडर
जिले के 118 यमुना बालू घाटों पर ई-टेंडर प्रक्रिया चल रही है। निविदा निकाले जाने के बाद पट्टा लेने वाले कारोबारियों से एमएसटीसी संस्था में अग्रिम धनराशि व आवेदन 13 नवंबर तक जमा कराया गया। 14 नवंबर से 17 नवंबर तक ऑनलाइन टेंडर डाला जाएगा। इसे 18 व 20 नवंबर को खोला जाएगा। टेंडर के दूसरे चरण में सबसे अधिक कीमत डालने वाले आवेदकों के बीच ऑनलाइन नीलामी (ऑक्सन) 21 नवंबर से दो जनवरी 2018 तक अलग-अलग तिथियों में लगवाई जाएगी। सबसे अधिक बोली लगाने वाले कारोबारी को पट्टा आवंटित करते हुए कुल लागत का पचास प्रतिशत एमएसटीसी में जमा कराया जाएगा। इसके बाद कारोबारी को राज्य सरकार के ‘सिया’ संस्था से पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र की एनओसी लेनी होगी। एनओसी लाने वाले पट्टेधारक के खंड का सीमांकन करते हुए खनन की अनुमति दी जाएगी। इस प्रक्रिया में मई माह तक का समय लगने की बात विभागीय जिम्मेदार बता रहे हैं।
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क्या कहते हैं अधिकारी
जिले में चल रहे आठ खनन के पट्टे एक दिसंबर से बंद हो जाएंगे। नए पट्टों की प्रक्रिया कराई जा रही है। आवंटन के बाद ही जिले में खनन शुरू हो सकेगा। इसमें चार से पांच माह का वक्त लगेगा। तब तक कारोबारियों के डंप बालू से आपूर्ति कराई जाएगी।
राज रंजन, खनन निरीक्षक
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-आधा दर्जन पड़ोसी जिलों में सप्लाई होती है कौशाम्बी की यमुना में आई जाने वाली बालू
-पहली दिसम्बर से खत्म हो रही पुराने पट्टों की मियाद, मई से होगा नए पट्टों पर खनन
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। आधा दर्जन जिलों में एक बार फिर से बालू का संकट खड़ा होने जा रहा है। इससे संबंधित जिलों में निर्माण से जुड़े विकास कार्यों की प्रगति प्रभावित होने के साथ-साथ निजी निर्माण पर संकट रहेगा। छह माह के लिए दिए गए आठ खनन पट्टों की अवधि 30 नवंबर को समाप्त हो रही है। नए खनन पट्टों की सारी प्रक्रिया पूरी होने में मई तक का समय लगेगा। इस दौरान लोगों को बालू की किल्लत का सामना करना पड़ेगा।
यमुना घाटों से निकलने वाले मोरंग से जिले के अलावा प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, लखनऊ, रायबरेली, फैजाबाद, भदोही आदि जिलों में निर्माण कार्य कराए जाते हैं। मजबूती में बेमिसाल होने की वजह से यहां की बालू को सरकारी भवनों, पुल आदि में भी लगाया जाता है। पट्टे न होने और सीबीआई जांच की वजह से जिले में बालू खनन पूरी तरह से बंद हो गया था। इसके चलते जनवरी से लेकर जून तक जिले में बालू को लेकर हायतौबा मच गई थी। विकास कार्यों में शौचालय, आवास सहित अन्य कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहे थे। इसे देखते हुए शासन ने जिले के आठ बालू घाटों की छह माह के लिए ई-टेंडरिंग कराई। छह माह के खनन पट्टे में जून माह में 18 दिन ही खनन हो सका। बारिश के बाद एक अक्टूबर से शुरू खनन पहली दिसंबर को अवधि समाप्त होते ही बंद हो जाएगा। बालू का खनन बंद होते ही कौशांबी के अलावा आधा दर्जन जिलों का निर्माण कार्य प्रभावित होना तय है। उधर नए पट्टों की प्रक्रिया तो जिले में चल रही है पर मई से पहले खनन शुरू हो पाना संभव नहीं है। ऐसे में आगामी छह माह तक दोआबा सहित आधा दर्जन जिलों में कराए जाने वाले विकास कार्यों के लिए एक बार फिर से बालू का संकट उत्पन्न होता दिख रहा है।
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आवेदन शुल्क व अग्रिम धनराशि तक पहुंचा ई-टेंडर
जिले के 118 यमुना बालू घाटों पर ई-टेंडर प्रक्रिया चल रही है। निविदा निकाले जाने के बाद पट्टा लेने वाले कारोबारियों से एमएसटीसी संस्था में अग्रिम धनराशि व आवेदन 13 नवंबर तक जमा कराया गया। 14 नवंबर से 17 नवंबर तक ऑनलाइन टेंडर डाला जाएगा। इसे 18 व 20 नवंबर को खोला जाएगा। टेंडर के दूसरे चरण में सबसे अधिक कीमत डालने वाले आवेदकों के बीच ऑनलाइन नीलामी (ऑक्सन) 21 नवंबर से दो जनवरी 2018 तक अलग-अलग तिथियों में लगवाई जाएगी। सबसे अधिक बोली लगाने वाले कारोबारी को पट्टा आवंटित करते हुए कुल लागत का पचास प्रतिशत एमएसटीसी में जमा कराया जाएगा। इसके बाद कारोबारी को राज्य सरकार के ‘सिया’ संस्था से पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र की एनओसी लेनी होगी। एनओसी लाने वाले पट्टेधारक के खंड का सीमांकन करते हुए खनन की अनुमति दी जाएगी। इस प्रक्रिया में मई माह तक का समय लगने की बात विभागीय जिम्मेदार बता रहे हैं।
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क्या कहते हैं अधिकारी
जिले में चल रहे आठ खनन के पट्टे एक दिसंबर से बंद हो जाएंगे। नए पट्टों की प्रक्रिया कराई जा रही है। आवंटन के बाद ही जिले में खनन शुरू हो सकेगा। इसमें चार से पांच माह का वक्त लगेगा। तब तक कारोबारियों के डंप बालू से आपूर्ति कराई जाएगी।
राज रंजन, खनन निरीक्षक