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दीपावली: त्योहार पर फल-फूल रहा मिलावट का कारोबार
Updated Mon, 29 Oct 2018 06:28 PM IST
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दीपावली: त्योहार पर फल-फूल रहा मिलावट का कारोबार
-छोटे दुकानदारों तक सिमटी खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी
-जेब ढीली करने के साथ ही उपभोक्ताओ की सेहत से हो रहा खिलवाड़
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। प्रकाश पर्व दीपावली व मिठाई के त्योहार को लेकर जिले में मिलावटखोरों का बाजार सज गया है। सरसों व सोयाबीन तेल से लेकर दूध, खोवा, पनीर, बेसन आदि खाद्य सामग्री में खुलेआम मिलावट कर उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इन पर शिकंजा कसने के लिए बना खाद्य सुरक्षा विभाग कार्रवाई के नाम पर खानापूरी कर रहा है। सिर्फ छोटे दुकानदारों से नमूना भरने तक सीमित है। बड़े काले कारोबारियों के प्रतिष्ठानों में छापेमारी नहीं होने से मिलावटखोर बेखौफ होकर अपने धंधे को अंजाम दे रहे हैं। इससे बेखबर उपभोक्ताओं की जेब ढीली होने के साथ ही बेसकीमती सेहत भी दांव पर लग रही है।
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ऐसे बनता है नकली दूध और खोवा
18 लाख की आबादी वाले जिले में प्रतिदिन तकरीब 90 हजार लीटर दूध का उत्पादन है। उत्पादन के मुकाबले वैसे ही खपत ज्यादा है। पर, आम दिनों के मुकाबले त्योहारों में मांग और बढ़ जाती है। जानकारों की मानें तो इसकी भरपाई के लिए कारोबारी मिलावट का खेल करते हैं। सूत्र बताते हैं कि केमिकल के घोल से नकली दूध में चिकनाई और फैट लाने के लिए रिफाइंड आयल मिलाया जाता है। झाग के लिए इजी शैम्पू व खराब न हो इसके लिए हाइड्रोजन पराक्साइड के साथ ही अन्य केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे तैयार दूध की कीमत सिर्फ 20 रुपये लीटर आती है। जबकि बाजार में इसे उपभोक्ताओं के हाथ 40-45 रुपये लीटर बेचा जाता है। इसी तरह से खोवा में मैदा, आलू और केमिकल मिलाकर मिलावट की जाती है।
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खोवा, मेवा और बेसन की मिठाई में भी मिलावट
दीपावली पर भारी मात्रा में मिठाई की खपत होती है। मिठाई की खरीदारी में उपभोक्ता के साथ कदम-कदम पर धोखा किया जा रहा है। सिंथेटिक मावे के साथ मिठाइयों में कृत्रिम मावे का इस्तेमाल हो रहा है। काजू कतली सरीखी महंगी मिठाई में भी मिलावट की जाती है। सूत्रों की मानें तो इसमें काजू की जगह मूंगफली का चूरा मिलाया जाता है। त्योहार पर महंगाई को देखते हुए कारोबारियों ने पहले से खोवा खरीदकर डंप कर लिया था। केमिकल लगाकर रखे गए इस खोवे से तैयार मिठाई को त्योहार पर बेचने की तैयारी की जा रही है। इससे सेहत पर विपरीत असर पड़ना तय है। इसी तरह से बेसन में भी मैदा व खेसारी मिलाकर कारोबारी जेब भरने में लगे हैं।
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और भी इन-इन वस्तुओं में की जा रही मिलावट
0 देशी घी में वनस्पति और खुशबू के लिए केमिकल की मिलावट की जाती है।
0 वनस्पति घी में जानवरों की चर्बी मिलाई जाती है।
0 रिफाइंड तेल में धान का से निकला आयल व सरसों तेल भी केमिकल मिलाकर तैयार किया जा रहा है। इससे कम लागत में अधिक मुनाफा होता है।
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सेहत पर क्या पड़ता है असर
संयुक्त जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ दीपक सेठ बताते हैं कि मिलावटी खाद्य पदार्थो के सेवन से लीवर, किडनी पर गंभीर असर पड़ता है। बच्चों के साथ ही डायबिटीज रोगियों के लिए मिलावटी खाद्य पदार्थ काफी नुकसानदायक होता है। इससे पेट संबंधी रोग होते हैं। भूख न लगने की समस्या भी मिलावटी खाद्य वस्तुओं के इस्तेमाल से होती है। कुल मिलाकर किसी भी सूरत में मिलावटी समान का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
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क्या है सजा का प्रावधान
मिलावटखोरी रोकने के लिए सरकार ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 बनाया है। इसके तहत खाद्य वस्तुओं का नमूना फेल होने पर अधिकतम उम्र कैद व दस लाख रुपये तक के सजा का प्रावधान है। हैरानी की बात ये है कि विभाग नमूना भरकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज देता है। पर, रिपोर्ट आने में साल-साल भर का समय लग जाता है। इसके चलते अक्सर आरोपी बच निकलते हैं। जबकि नियमानुसार 90 दिन के भीतर रिपोर्ट आ जानी चाहिए।
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क्या कहते हैं अफसर
मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। जहां जो भी शिकायतें मिलती हैं विभागीय टीम छापेमारी कर नमूना संग्रहीत कर रहे है। त्योहार तक सभी प्रमुख बाजारों में नियमित अभियान चलता रहेगा।
आर एल यादव- अभिहीत अधिकारी, खाद्य सुरक्षा विभाग
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-छोटे दुकानदारों तक सिमटी खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी
-जेब ढीली करने के साथ ही उपभोक्ताओ की सेहत से हो रहा खिलवाड़
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। प्रकाश पर्व दीपावली व मिठाई के त्योहार को लेकर जिले में मिलावटखोरों का बाजार सज गया है। सरसों व सोयाबीन तेल से लेकर दूध, खोवा, पनीर, बेसन आदि खाद्य सामग्री में खुलेआम मिलावट कर उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इन पर शिकंजा कसने के लिए बना खाद्य सुरक्षा विभाग कार्रवाई के नाम पर खानापूरी कर रहा है। सिर्फ छोटे दुकानदारों से नमूना भरने तक सीमित है। बड़े काले कारोबारियों के प्रतिष्ठानों में छापेमारी नहीं होने से मिलावटखोर बेखौफ होकर अपने धंधे को अंजाम दे रहे हैं। इससे बेखबर उपभोक्ताओं की जेब ढीली होने के साथ ही बेसकीमती सेहत भी दांव पर लग रही है।
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ऐसे बनता है नकली दूध और खोवा
18 लाख की आबादी वाले जिले में प्रतिदिन तकरीब 90 हजार लीटर दूध का उत्पादन है। उत्पादन के मुकाबले वैसे ही खपत ज्यादा है। पर, आम दिनों के मुकाबले त्योहारों में मांग और बढ़ जाती है। जानकारों की मानें तो इसकी भरपाई के लिए कारोबारी मिलावट का खेल करते हैं। सूत्र बताते हैं कि केमिकल के घोल से नकली दूध में चिकनाई और फैट लाने के लिए रिफाइंड आयल मिलाया जाता है। झाग के लिए इजी शैम्पू व खराब न हो इसके लिए हाइड्रोजन पराक्साइड के साथ ही अन्य केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे तैयार दूध की कीमत सिर्फ 20 रुपये लीटर आती है। जबकि बाजार में इसे उपभोक्ताओं के हाथ 40-45 रुपये लीटर बेचा जाता है। इसी तरह से खोवा में मैदा, आलू और केमिकल मिलाकर मिलावट की जाती है।
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खोवा, मेवा और बेसन की मिठाई में भी मिलावट
दीपावली पर भारी मात्रा में मिठाई की खपत होती है। मिठाई की खरीदारी में उपभोक्ता के साथ कदम-कदम पर धोखा किया जा रहा है। सिंथेटिक मावे के साथ मिठाइयों में कृत्रिम मावे का इस्तेमाल हो रहा है। काजू कतली सरीखी महंगी मिठाई में भी मिलावट की जाती है। सूत्रों की मानें तो इसमें काजू की जगह मूंगफली का चूरा मिलाया जाता है। त्योहार पर महंगाई को देखते हुए कारोबारियों ने पहले से खोवा खरीदकर डंप कर लिया था। केमिकल लगाकर रखे गए इस खोवे से तैयार मिठाई को त्योहार पर बेचने की तैयारी की जा रही है। इससे सेहत पर विपरीत असर पड़ना तय है। इसी तरह से बेसन में भी मैदा व खेसारी मिलाकर कारोबारी जेब भरने में लगे हैं।
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और भी इन-इन वस्तुओं में की जा रही मिलावट
0 देशी घी में वनस्पति और खुशबू के लिए केमिकल की मिलावट की जाती है।
0 वनस्पति घी में जानवरों की चर्बी मिलाई जाती है।
0 रिफाइंड तेल में धान का से निकला आयल व सरसों तेल भी केमिकल मिलाकर तैयार किया जा रहा है। इससे कम लागत में अधिक मुनाफा होता है।
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सेहत पर क्या पड़ता है असर
संयुक्त जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ दीपक सेठ बताते हैं कि मिलावटी खाद्य पदार्थो के सेवन से लीवर, किडनी पर गंभीर असर पड़ता है। बच्चों के साथ ही डायबिटीज रोगियों के लिए मिलावटी खाद्य पदार्थ काफी नुकसानदायक होता है। इससे पेट संबंधी रोग होते हैं। भूख न लगने की समस्या भी मिलावटी खाद्य वस्तुओं के इस्तेमाल से होती है। कुल मिलाकर किसी भी सूरत में मिलावटी समान का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
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क्या है सजा का प्रावधान
मिलावटखोरी रोकने के लिए सरकार ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 बनाया है। इसके तहत खाद्य वस्तुओं का नमूना फेल होने पर अधिकतम उम्र कैद व दस लाख रुपये तक के सजा का प्रावधान है। हैरानी की बात ये है कि विभाग नमूना भरकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज देता है। पर, रिपोर्ट आने में साल-साल भर का समय लग जाता है। इसके चलते अक्सर आरोपी बच निकलते हैं। जबकि नियमानुसार 90 दिन के भीतर रिपोर्ट आ जानी चाहिए।
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क्या कहते हैं अफसर
मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। जहां जो भी शिकायतें मिलती हैं विभागीय टीम छापेमारी कर नमूना संग्रहीत कर रहे है। त्योहार तक सभी प्रमुख बाजारों में नियमित अभियान चलता रहेगा।
आर एल यादव- अभिहीत अधिकारी, खाद्य सुरक्षा विभाग