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नकली सरसों तेल बिगाड़ रहा उपभोक्ताओं की सेहत
Updated Wed, 25 Oct 2017 12:58 AM IST
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नकली सरसों तेल बिगाड़ रहा उपभोक्ताओं की सेहत
केमिकल से तैयार सरसों तेल की बिक्री से बेखबर महकमा
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की मिलीभगत से बेखौफ चल रहा धंधा
अमर उजाला ब्यूरो
सरायअकिल।
जिले में नकली सरसों तेल का कारोबार इन दिनों चरम पर है। जिले के प्रमुख बाजारों में कारोबारियों ने केमिकल से तैयार किए गए तेल का कारोबार फैला रखा है। असली सरसों तेल से दस-पंद्रह रुपए लीटर सस्ता होने की वजह से गरीबों के बीच इसकी बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। कारोबारी इस खेल में जहां मालामाल हो रहे हैं वहीं उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। विभागीय अफसर सब कुछ जानने के बाद भी बेखबर हैं।
जिले का सरायअकिल कस्बा नकली सरसों तेल के कारोबार का हब बन चुका है। कस्बे के चार कारोबारी कानपुर से जले मोबिलऑयल को फिल्टर कराकर टैंकर के जरिए कस्बे में मंगवाते हैं। ड्रम में तेल उतरवाकर केमिकल की मदद से सरसों का तेल तैयार किया जाता है। इसके बाद तेल को टीन में विभिन्न ब्रांड के नाम से पैक कराकर स्थानीय दुकानदारों के अलावा जिले के प्रमुख बाजार मनौरी, भरवारी, मंझनपुर, पश्चिम शरीरा, करारी में आपूर्ति किया जाता है। फुटकर तेल के खरीदार दस-पंद्रह रुपए सस्ता होने की वजह से इसे आसानी से खरीद लेते हैं। सरसों तेल जैसी महक होने के चलते गरीब तबके का उपभोक्ता विश्वास के साथ इसका प्रयोग कर रहा है। उपभोक्ताओं की सेहत के साथ हो रहे इस खिलवाड़ की बखूबी जानकारी खाद्य सुरक्षा विभाग के जिम्मेदारों को है। बावजूद इसके अवैध कारोबारियों के खिलाफ शिकंजा नहीं कसा जा रहा है।
कस्बे में चार स्थानों पर तैयार होता है नकली सरसों तेल
कानपुर से जले मोबिलऑयल को फिल्टर कराकर कस्बे के करन चौराहा, रामलीला मैदान, फकीराबाद व कपड़ा मंडी में रात के अंधेरे में उतारा जाता है। इसके बाद ड्रम में केमिकल डालकर उसे सरसों तेल के रूप में परिवर्तित किया जाता है। जानकारों की मानें तो एक ड्रम सरसों तेल बनाने में सौ ग्राम केमिकल का प्रयोग किया जाता है। इसके बाद गोदाम से ही नकली सरसों तेल को टीन में पैककर इलाकाई बाजारों तक भेजा जाता है।
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नामी कंपनियों के लगाते हैं नकली रैपर
टीन में पैक किए गए नकली सरसों तेल की टीन में नामी गिरामी कंपनियों के रैपर कारोबारियों द्वारा लगाए जाते हैं। इनमें प्रमुख रूप से कच्चीघानी, कोल्हू, श्याम, झूला, बावर्ची ब्रांड के रैपर शामिल हैं। तेल से भरे टीन में नामी गिरामी कंपनियों रैपर लगे होने की वजह से विभागीय जिम्मेदार भी हाथ डालने से कतराते हैं।
साल भर पहले सीज हो चुकी है गोदाम
सरायअकिल कस्बे में अक्तूबर 2016 में नकली तेल को लेकर एसडीएम चायल ने औचक छापामारी की थी। इस दौरान टीम ने दो ड्रम नकली सरसों तेल, तेल बनाने वाला केमिकल व बिकने के लिए टीन में पैक नकली सरसाें तेल बरामद किया था। एसडीएम ने मौके पर गोदाम सीज कराकर नमूना जांच के लिए भेज दिया था। जांच में पुष्टि होने के बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। इस दौरान कुछ दिन के लिए कारोबार पर अंकुश लगा था। लेकिन विभाग की शिथिलता के चलते कारोबार एक बार फिर पुराने ढर्रे पर शुरू हो गया है।
क्या कहते हैं अधिकारी
नकली सरसों तेल पिछले साल पकड़ा गया था। नमूने की रिपोर्ट आने के बाद मामला न्यायालय में चल रहा है। यदि कारोबार फिर से शुरू हो गया तो छापामारी कर कारोबारियों के खिलाफ शिकंजा कसा जाएगा।
राम अशोक यादव, अभिहीत अधिकारी,
खाद्य सुरक्षा विभाग
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केमिकल से तैयार सरसों तेल की बिक्री से बेखबर महकमा
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की मिलीभगत से बेखौफ चल रहा धंधा
अमर उजाला ब्यूरो
सरायअकिल।
जिले में नकली सरसों तेल का कारोबार इन दिनों चरम पर है। जिले के प्रमुख बाजारों में कारोबारियों ने केमिकल से तैयार किए गए तेल का कारोबार फैला रखा है। असली सरसों तेल से दस-पंद्रह रुपए लीटर सस्ता होने की वजह से गरीबों के बीच इसकी बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। कारोबारी इस खेल में जहां मालामाल हो रहे हैं वहीं उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। विभागीय अफसर सब कुछ जानने के बाद भी बेखबर हैं।
जिले का सरायअकिल कस्बा नकली सरसों तेल के कारोबार का हब बन चुका है। कस्बे के चार कारोबारी कानपुर से जले मोबिलऑयल को फिल्टर कराकर टैंकर के जरिए कस्बे में मंगवाते हैं। ड्रम में तेल उतरवाकर केमिकल की मदद से सरसों का तेल तैयार किया जाता है। इसके बाद तेल को टीन में विभिन्न ब्रांड के नाम से पैक कराकर स्थानीय दुकानदारों के अलावा जिले के प्रमुख बाजार मनौरी, भरवारी, मंझनपुर, पश्चिम शरीरा, करारी में आपूर्ति किया जाता है। फुटकर तेल के खरीदार दस-पंद्रह रुपए सस्ता होने की वजह से इसे आसानी से खरीद लेते हैं। सरसों तेल जैसी महक होने के चलते गरीब तबके का उपभोक्ता विश्वास के साथ इसका प्रयोग कर रहा है। उपभोक्ताओं की सेहत के साथ हो रहे इस खिलवाड़ की बखूबी जानकारी खाद्य सुरक्षा विभाग के जिम्मेदारों को है। बावजूद इसके अवैध कारोबारियों के खिलाफ शिकंजा नहीं कसा जा रहा है।
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कस्बे में चार स्थानों पर तैयार होता है नकली सरसों तेल
कानपुर से जले मोबिलऑयल को फिल्टर कराकर कस्बे के करन चौराहा, रामलीला मैदान, फकीराबाद व कपड़ा मंडी में रात के अंधेरे में उतारा जाता है। इसके बाद ड्रम में केमिकल डालकर उसे सरसों तेल के रूप में परिवर्तित किया जाता है। जानकारों की मानें तो एक ड्रम सरसों तेल बनाने में सौ ग्राम केमिकल का प्रयोग किया जाता है। इसके बाद गोदाम से ही नकली सरसों तेल को टीन में पैककर इलाकाई बाजारों तक भेजा जाता है।
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नामी कंपनियों के लगाते हैं नकली रैपर
टीन में पैक किए गए नकली सरसों तेल की टीन में नामी गिरामी कंपनियों के रैपर कारोबारियों द्वारा लगाए जाते हैं। इनमें प्रमुख रूप से कच्चीघानी, कोल्हू, श्याम, झूला, बावर्ची ब्रांड के रैपर शामिल हैं। तेल से भरे टीन में नामी गिरामी कंपनियों रैपर लगे होने की वजह से विभागीय जिम्मेदार भी हाथ डालने से कतराते हैं।
साल भर पहले सीज हो चुकी है गोदाम
सरायअकिल कस्बे में अक्तूबर 2016 में नकली तेल को लेकर एसडीएम चायल ने औचक छापामारी की थी। इस दौरान टीम ने दो ड्रम नकली सरसों तेल, तेल बनाने वाला केमिकल व बिकने के लिए टीन में पैक नकली सरसाें तेल बरामद किया था। एसडीएम ने मौके पर गोदाम सीज कराकर नमूना जांच के लिए भेज दिया था। जांच में पुष्टि होने के बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। इस दौरान कुछ दिन के लिए कारोबार पर अंकुश लगा था। लेकिन विभाग की शिथिलता के चलते कारोबार एक बार फिर पुराने ढर्रे पर शुरू हो गया है।
क्या कहते हैं अधिकारी
नकली सरसों तेल पिछले साल पकड़ा गया था। नमूने की रिपोर्ट आने के बाद मामला न्यायालय में चल रहा है। यदि कारोबार फिर से शुरू हो गया तो छापामारी कर कारोबारियों के खिलाफ शिकंजा कसा जाएगा।
राम अशोक यादव, अभिहीत अधिकारी,
खाद्य सुरक्षा विभाग