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नोटबंदी की मार से उबर नहीं पा रहे प्रापर्टी डीलर
Updated Fri, 30 Jun 2017 05:43 PM IST
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मंझनपुर (कौशाम्बी)। मंझनपुर सहित जिले के हाईवे पर भूमि खरीद-फरोख्त कर प्लाटिंग करने वाले प्रापर्टी डीलर नोटबंदी की मार से अभी तक उबर नहीं पाए हैं। नोटबंदी के साथ बंदी हुई रजिस्ट्री अब एआईजी स्टाम्प के लक्ष्य पूर्ति में भी बाधा बन रही है। अप्रैल से लेकर मई के अंत तक तीनों तहसीलों में स्टाम्प बिक्री का लक्ष्य महज 13 फीसदी ही पहुंच सका है। जबकि पिछले साल मई में लक्ष्य की पूर्ति 17 फीसदी पहुंच गई थी।
नोटबंदी के बाद से जिले में भूमि की खरीद का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। मुख्यालय मंझनपुर सहित हाईवे किनारे प्रॉपर्टी डीलरों ने प्लाटिंग करने के लिए करोड़ो रुपया खर्च कर प्लाटिंग कर रखी है। प्रापर्टी डीलरों का मानना था कि वह खरीदी गई भूमि पर प्लाटिंग करते हुए अपना धन तीन गुना बढ़ा लेंगे। लेकिन नोटबंदी ने उनकी मंशा पर पानी फेर दिया है। नवम्बर माह में हुई नोटबंदी के बाद प्लाट खरीदने का कारोबार इस कदर प्रभावित हुआ कि फरवरी माह तक रजिस्ट्री कार्यालयों में सन्नाटा छाया रहा। मार्च 2017 से भूमि रजिस्ट्री का काम शुरू हुआ पर अभी तक रफ्तार नहीं पकड़ सका। दूसरी ओर शासन ने उप महानिरीक्षक स्टाम्प कार्यालय का लक्ष्य भी पिछले साल की तुलना में बढ़ा दिया है। वर्ष 2016-17 में रजिस्ट्री से आय का लक्ष्य 40 करोड़ 20 लाख था। इस साल इसे बढ़ाकर 45 करोड़ कर दिया गया है। मई माह तक की प्रगति पर जाएं तो विभाग पिछले साल की तुलना में लक्ष्य पूर्ति में चार फीसदी पीछे है। रजिस्ट्री के अभाव में एआईजी स्टाम्प कार्यालय का लक्ष्य भी पीछे चल रहा है। इसे लेकर शासन से लगातार रजिस्ट्री बढ़ाने का दबाव भी बनाया जा रहा है, लेकिन नोट बंदी से अभी तक लोग उबर नहीं सके हैं। इसके चलते रजिस्ट्री रफ्तार नहीं पकड़ रही है।
सब रजिस्ट्रार पर भी है लक्ष्य पूर्ति का दबाव
शासन द्वारा रजिस्ट्री में स्टाम्प शुल्क से होने वाली आय को बढ़ाने के लिए एआईजी स्टाम्प पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। शासन के दबाव को देख एआईजी तीनों तहसीलों के सब रजिस्ट्रार पर दबाव बना रही हैं। लेकिन यहां पर सवाल यह है कि क्या किसी को जबरन भूखंड बेंचा जा सकता है। व्यक्ति अपनी मर्जी से ही भूखंड की खरीददारी करता है। ऐसे में एआईजी स्टाम्प सहित तीनों तहसील कार्यालयों में तैनात सब रजिस्ट्रार सकते में हैं।
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क्या कहते हैं अधिकारी
पिछले साल की तुलना में इस बार लक्ष्य पांच करोड़ बढ़ा दिया गया है। नोटबंदी के चलते भूमि की खरीद-फरोख्त धीमी है। वर्ष के अंत तक स्थिति सामान्य होने की संभावना है। रजिस्ट्री में तेजी आने पर ही लक्ष्य पूर्ति में सफलता संभव है।
पूर्णिमा मिश्रा, एआईजी स्टाम्प
प्रॉपर्टी डीलरों पर अब भी दिख रहा नोटबंदी का असर
भूमि रजिस्ट्री कम होने से विभाग का लक्ष्य भी प्रभावित
लक्ष्य पूर्ति के लिए एआईजी स्टाम्प पर बढ़ रहा दबाव
अमर उजाला ब्यूरो
नोटबंदी के बाद से जिले में भूमि की खरीद का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। मुख्यालय मंझनपुर सहित हाईवे किनारे प्रॉपर्टी डीलरों ने प्लाटिंग करने के लिए करोड़ो रुपया खर्च कर प्लाटिंग कर रखी है। प्रापर्टी डीलरों का मानना था कि वह खरीदी गई भूमि पर प्लाटिंग करते हुए अपना धन तीन गुना बढ़ा लेंगे। लेकिन नोटबंदी ने उनकी मंशा पर पानी फेर दिया है। नवम्बर माह में हुई नोटबंदी के बाद प्लाट खरीदने का कारोबार इस कदर प्रभावित हुआ कि फरवरी माह तक रजिस्ट्री कार्यालयों में सन्नाटा छाया रहा। मार्च 2017 से भूमि रजिस्ट्री का काम शुरू हुआ पर अभी तक रफ्तार नहीं पकड़ सका। दूसरी ओर शासन ने उप महानिरीक्षक स्टाम्प कार्यालय का लक्ष्य भी पिछले साल की तुलना में बढ़ा दिया है। वर्ष 2016-17 में रजिस्ट्री से आय का लक्ष्य 40 करोड़ 20 लाख था। इस साल इसे बढ़ाकर 45 करोड़ कर दिया गया है। मई माह तक की प्रगति पर जाएं तो विभाग पिछले साल की तुलना में लक्ष्य पूर्ति में चार फीसदी पीछे है। रजिस्ट्री के अभाव में एआईजी स्टाम्प कार्यालय का लक्ष्य भी पीछे चल रहा है। इसे लेकर शासन से लगातार रजिस्ट्री बढ़ाने का दबाव भी बनाया जा रहा है, लेकिन नोट बंदी से अभी तक लोग उबर नहीं सके हैं। इसके चलते रजिस्ट्री रफ्तार नहीं पकड़ रही है।
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सब रजिस्ट्रार पर भी है लक्ष्य पूर्ति का दबाव
शासन द्वारा रजिस्ट्री में स्टाम्प शुल्क से होने वाली आय को बढ़ाने के लिए एआईजी स्टाम्प पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। शासन के दबाव को देख एआईजी तीनों तहसीलों के सब रजिस्ट्रार पर दबाव बना रही हैं। लेकिन यहां पर सवाल यह है कि क्या किसी को जबरन भूखंड बेंचा जा सकता है। व्यक्ति अपनी मर्जी से ही भूखंड की खरीददारी करता है। ऐसे में एआईजी स्टाम्प सहित तीनों तहसील कार्यालयों में तैनात सब रजिस्ट्रार सकते में हैं।
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क्या कहते हैं अधिकारी
पिछले साल की तुलना में इस बार लक्ष्य पांच करोड़ बढ़ा दिया गया है। नोटबंदी के चलते भूमि की खरीद-फरोख्त धीमी है। वर्ष के अंत तक स्थिति सामान्य होने की संभावना है। रजिस्ट्री में तेजी आने पर ही लक्ष्य पूर्ति में सफलता संभव है।
पूर्णिमा मिश्रा, एआईजी स्टाम्प
प्रॉपर्टी डीलरों पर अब भी दिख रहा नोटबंदी का असर
भूमि रजिस्ट्री कम होने से विभाग का लक्ष्य भी प्रभावित
लक्ष्य पूर्ति के लिए एआईजी स्टाम्प पर बढ़ रहा दबाव
अमर उजाला ब्यूरो