फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   79 करोड़ खर्च फिर भी हाथ से नहीं छूटा लोटा

79 करोड़ खर्च फिर भी हाथ से नहीं छूटा लोटा

Fri, 25 Aug 2017 01:12 AM IST
Updated Fri, 25 Aug 2017 01:12 AM IST
विज्ञापन
79 करोड़ खर्च फिर भी हाथ से नहीं छूटा लोटा
79 करोड़ खर्च फिर भी नहीं छूटा लोटा
विज्ञापन

ओडीएफ हुए 149 गांवों के लोग आज भी खुले में जाते हैं शौच
नोडल अफसरों और ट्रिंगरिंग टीमों की मेहनत पर फिरा पानी
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर।
स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत जिले को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए शासन का 79 करोड़ दो साल में खर्च हो चुका है। अफसरों ने डेढ़ सौ गांवों को खुले में शौच से मुक्त होने की घोषणा भी कर अपनी पीठ थपथपानी शुरू कर दी है जबकि हकीकत यह है कि ओडीएफ घोषित गांवों के लोग अभी भी खुले में शौच जाते हैं। ऐसे लोगों ने नोडल अफसरों व ट्रिंगरिंग टीम की मेहनत पर पानी फेर रखा है।
गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार पानी की तरह पैसा खर्च कर रही है। दो अक्टूबर वर्ष 2014 से लेकर अब तक जिले की 409 ग्राम सभाओं में शासन द्वारा 79 करोड़ 20 लाख रुपये 66 हजार शौचालयों के लिए दिया जा चुका है। ग्राम सभाओं को रुपया देने के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी कमल किशोर द्वारा जिला स्तरीय अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित कर लगाकर शौचालय निर्माण की मानीटरिंग कराई जाएगी। ग्रामीण खुले में शौच न करें इसके लिए ट्रिंगरिंग टीम गांवों में उतारकर लोगों को समझाया जा रहा है। अब तक अफसरों की टीम लगाकर 149 गांवों में घर-घर शौचालय बनवाकर उन्हें ओडीएफ का दर्जा दे दिया गया है। बावजूद इसके लिए इन गांवों को खुले में शौच से मुक्त नहीं किया जा सका। प्रत्येक दिन सुबह और शाम ग्रामीण खुले में शौच कर रहे हैं। ग्रामीणों की इस फितरत के आगे जिले की ओडीएफ टीम भी बौनी साबित हो रही है। इससे साफ हो गया है कि जिले में घर-घर शौचालयों का निर्माण भले करा दिया जाय पर खुले में शौच से मुक्त करने के लिए लोगों की सोच बदलने तक इंतजार करना पड़ेगा।
विज्ञापन



मॉडल गांव के लोग कर रहे खुले में शौच
सदर ब्लॉक के बबुरा गांव को पंचायती राज विभाग ने सबसे पहले ओडीएफ घोषित किया था। यहां पर पूर्व डीएम अखंड प्रताप सिंह ने स्वयं ट्रिंगरिंग टीम के साथ सुबह और शाम मार्निंग फालोअप करने कई दिन पहुंचे। घर-घर शौचालय निर्माण होने के बाद पंचायती राज विभाग ने इन गांवों को मॉडल का दर्जा दे दिया। बावजूद इसके ग्रामीणों की सोच नहीं बदल सकी। डीएम आवास के ठीक बगल स्थित ओडीएफ गांव में जब खुले में शौच नहीं बंद हो सका तो अन्य गांवों का क्या हाल होगा, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन




31 दिसंबर तक जिला ओडीएफ करना टेढ़ी खीर
प्रदेश सरकार ने जिले को 31 दिसंबर तक खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य अफसरों को दिया है। शासन द्वारा लक्ष्य निर्धारित होने के बाद से डीएम सहित जिले के सभी अफसर दिन रात मशक्कत कर रहे हैं, लेकिन यह मेहनत सिर्फ कागजों पर ही दिख रही है। हकीकत में गांवों में सिर्फ शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है। जिनके शौचालय बन गए हैं वह खुले में शौच न जाएं, इसके लिए कुछ खास पहल नहीं की जा रही है। जब तक लोगों को दिमागी रूप से खुले में शौच से मुक्त नहीं किया जाएगा तब तक जिले को ओडीएफ बनाना टेढ़ीखीर साबित होगा।





जिले को हर हाल में 31 दिसंबर तक ओडीएफ बनाना है। शौचालय निर्माण का लक्ष्य पूरा कराने के लिए नोडल अफसरों को लगाया गया है। गांवों को खुले में शौच से मुक्त कराने के लिए स्वच्छता ग्राही टीम काम कर रही है। जल्द ही अभियान चलाकर लोगों को खुले में शौच से रोका जाएगा।
कमल किशोर, डीपीआरओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed