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Kasganj News: अवैध हिरासत में रखने पर सहावर के थानेदार पर प्राथमिकी के आदेश
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कासगंज। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट खान जीशान मसूद की अदालत ने सहावर थाने के एसएचओ गोविंद बल्लभ शर्मा के खिलाफ गंभीर आरोपों के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने माना कि आरोपी को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया और मामले में फर्जी जनरल डायरी (जीडी) प्रविष्टि भी दर्ज की गई, जो प्रथम दृष्टया जालसाजी की श्रेणी में आती है।
न्यायालय में अधिवक्ता रजत यादव ने दायर प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया था कि संजय यादव को 28 अप्रैल, 2026 से थाने में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। दावा किया गया कि 29 अप्रैल को संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई, लेकिन उससे पहले ही आरोपी को बिना कानूनी प्रक्रिया के थाने में रखा गया। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सहावर थाने की सीसीटीवी फुटेज तलब कर उसका अवलोकन किया। फुटेज में आरोपी को 28 अप्रैल की दोपहर से 29 अप्रैल देर रात तक थाने परिसर में मौजूद पाया गया, जबकि उसे औपचारिक रूप से हिरासत में नहीं दिखाया गया था। इसके साथ ही पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट में भी अवैध हिरासत की पुष्टि की गई।
अदालत ने यह भी पाया कि 30 अप्रैल को दर्ज जीडी प्रविष्टि संख्या 42 में आरोपी को थाने के बाहर हंगामा करते दिखाया गया था, जबकि सीसीटीवी रिकॉर्ड इसके विपरीत स्थिति दर्शाते हैं। पुलिस अधीक्षक की जांच रिपोर्ट में इस प्रविष्टि को फर्जी और मनगढ़ंत बताया गया। न्यायालय ने माना कि आरोपी को बिना नोटिस दो दिनों तक थाने में रोकना बीएनएस की धारा 35(3) का उल्लंघन है। अधिवक्ता से मिलने की अनुमति न देना भी धारा 38 का उल्लंघन है। सभी तथ्यों और रिपोर्टों के आधार पर अदालत ने एसएचओ को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
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न्यायालय में अधिवक्ता रजत यादव ने दायर प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया था कि संजय यादव को 28 अप्रैल, 2026 से थाने में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। दावा किया गया कि 29 अप्रैल को संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई, लेकिन उससे पहले ही आरोपी को बिना कानूनी प्रक्रिया के थाने में रखा गया। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सहावर थाने की सीसीटीवी फुटेज तलब कर उसका अवलोकन किया। फुटेज में आरोपी को 28 अप्रैल की दोपहर से 29 अप्रैल देर रात तक थाने परिसर में मौजूद पाया गया, जबकि उसे औपचारिक रूप से हिरासत में नहीं दिखाया गया था। इसके साथ ही पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट में भी अवैध हिरासत की पुष्टि की गई।
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अदालत ने यह भी पाया कि 30 अप्रैल को दर्ज जीडी प्रविष्टि संख्या 42 में आरोपी को थाने के बाहर हंगामा करते दिखाया गया था, जबकि सीसीटीवी रिकॉर्ड इसके विपरीत स्थिति दर्शाते हैं। पुलिस अधीक्षक की जांच रिपोर्ट में इस प्रविष्टि को फर्जी और मनगढ़ंत बताया गया। न्यायालय ने माना कि आरोपी को बिना नोटिस दो दिनों तक थाने में रोकना बीएनएस की धारा 35(3) का उल्लंघन है। अधिवक्ता से मिलने की अनुमति न देना भी धारा 38 का उल्लंघन है। सभी तथ्यों और रिपोर्टों के आधार पर अदालत ने एसएचओ को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
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