फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Youth Day, Someone removed his fathers worries by becoming IPS, someone working to improve lives of others

Youth Day Special: किसी ने IPS बनकर दूर की पिता की चिंता, तो कोई दूसरों का जीवन संवारने के लिए कर रहा है काम

Fri, 12 Jan 2024 12:13 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 12 Jan 2024 12:13 PM IST
सार

Kanpur News: युवा दिवस के मौके हम आपको शहर के ऐसे युवाओं से मिलवा रहे हैं, जिनकी कहानियां सभी के लिए प्ररेणादायक हैं। एक ओर आईपीएस अंकिता शर्मा ने बेड़ियों को तोड़कर ऊंची उड़ान भरी है। वहीं, उद्देश्य दूसरों का जीवन संवारने में जुटे हैं।

विज्ञापन
Youth Day, Someone removed his fathers worries by becoming IPS, someone working to improve lives of others
उद्देश्य और आईपीएस अंकिता शर्मा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में रोक-टोक और पाबंदियां आईपीएस अंकिता शर्मा की जिंदगी में भी वैसी ही थी। जैसी आम लड़कियों के लिए होती हैं। बाहर जाने पर घर के किसी न किसी सदस्य की ड्यूटी लगाई जाती थी। 2012 में हुए निर्भया कांड से पहरा और बढ़ गया। बंदिशों से उड़ान थमती दिखी तो फैसला किया कि इससे हर हाल में बाहर निकलकर रहेंगी। इसके बाद 26 साल की उम्र में आईपीएस बनने तक का सफर तय किया।

विज्ञापन

2018 बैच की आईपीएस अंकिता शर्मा कानपुर में एडीसीपी दक्षिण व ट्रैफिक का जिम्मा संभाल रही हैं। शिक्षिका मां अर्चना शर्मा और वॉटर रिसोर्स डिपार्टमेंट से सेवानिवृत पिता अशोक कुमार की अनुशासित जीवनशैली के बीच राजस्थान के जयपुर में पली बढ़ीं अंकिता बताती हैं कि पिता और बड़े भाई अभिनव को हमेशा ही उनकी चिंता रहती थी।
विज्ञापन

कहीं भी आने जाने पर पिता हमेशा भाई अभिनव को साथ भेज देते थे। वक्त बढ़ा तो, आगे की पढ़ाई के लिए जमशेदपुर स्थित एनआईटी में एडमिशन दिला दिया। जयपुर से सीधी ट्रेन न होने से वह खुद ही दिल्ली तक ट्रेन में बैठाने और लौटते समय लेने पहुंच जाते थे। बताती हैं कि उन्होंने पिता को मनाने का प्रयास किया कि वह अब खुद आ जा सकती हैं, लेकिन न चिंता कम हुई और न ही आजाद परिंदे सी उड़ान मिल सकी।

विज्ञापन
विज्ञापन

निर्भया कांड के बाद तय की अपनी दिशा
साल 2012 में निर्भया कांड हुआ तो परिजनों की चिंता और बढ़ गई। इसी के बाद तय किया अब वह इतनी सशक्त बनेंगी कि ये जंजीरें उन्हें बांध न सकें। 2017 में यूपीएससी की परीक्षा दी। पिता के लाख मना करने बाद भी आईएएस के बाद आईपीएस को प्राथमिकता में रखा। अंत में आईपीएस बन इतनी मजबूत हो गई कि पिता को विश्वास हो गया कि बेटी खुद की सुरक्षा कर सकती है।

मेरी चिंता छोड़ जब पिता ने बेटे के बारे में पूछा
अंकिता एक किस्सा सुनाते हुए बताती हैं कि शुरुआत में जब अलीगढ़ में तैनात थीं तो एक दिन पिता की तबीयत खराब हो गई। पता चला कि अस्पताल में भर्ती हैं। रात में ही अलीगढ़ से जयपुर के लिए निकलीं और तड़के तीन बजे अस्पताल पहुंच गईं, वहां पिता ने यह नहीं पूछा कि कैसे पहुंचीं। उन्हें इस बात की चिंता थी कि रात में बेटा कैसे पहुंचेगा। इस घटना ने उन्हें इतनी संतुष्टि दी कि अब पिता को बेटी से ज्यादा बेटे की चिंता है। उन्हें यकीन हो गया है कि बेटी अब सक्षम हो गई है।

दूसरों का जीवन संवारना ही बना लिया ‘उद्देश्य’
कभी स्कूल में खुद की फीस भरने के लिए पैसे नहीं थे, लेकिन आज हंसपुरम निवासी उद्देश्य सचान गुरुकुलम स्कूल की स्थापना कर बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रहे हैं। पांच बच्चों से शुरू हुई उनकी मुहिम आज 150 बच्चों तक पहुंच गई है। वह बच्चों को शिक्षा के साथ हुनरमंद बनाने का भी काम कर रहे हैं। उद्देश्य बताते हैं कि बचपन से ही पिता को स्कूल की फीस भरने के लिए कड़ी मेहनत करते हुए देखा।

कभी खुद की फीस के नहीं थे पैसे, अब 150 बच्चों को दे रहे निशुल्क शिक्षा
काफी मेहनत के बाद भी किसी सरकारी व प्राइवेट कंपनी में नौकरी के लिए चयन नहीं हुआ तो खुद को हुनरमंद बनाकर दूसरों का भविष्य संवारने की ठानी। 2019 में नौबस्ता के पास बस्ती के 9वीं व 10वीं के पांच बच्चों को फुटपाथ पर पढ़ाना शुरू किया। जो धीरे-धीरे बढ़ते गए। साल 2021 में एक कमरा किराए पर लेकर परसौली में गुरुकुलम खुशियों वाला स्कूल की शुरुआत की।

फुटपाथ से शुरू की थी क्लास, अब गुरुकुलम ने लिया आकार
उद्देश्य बताते हैं कि वह इंस्टाग्राम पर विद्यालय व खुद से जुड़े वीडियो पोस्ट करते हैं। उनके 3.5 लाख फॉलोअर्स हैं। इससे होने वाली कमाई से उनका व विद्यालय का खर्च चलता है। वह बच्चों को योग, मेडिटेशन से लेकर स्किल डेवलपमेंट में माहिर करते हैं। थिएटर, बांसुरी, गिटार, तबला आदि के अलावा छोटे-छोटे हुनर भी सीखा रहे हैं। यह देख लोग अपनी ओर से कुछ न कुछ मदद करते हैं। गुरुकुलम में उद्देश्य के साथ चार और शिक्षक जुड़े हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed