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स्वास्थ्य: गले का मिजाज बता देगी आपकी आवाज, एनआईटी खड़गपुर और जीएसवीएम ने मिलकर तैयार किया है AI टूल

Thu, 13 Feb 2025 01:17 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 13 Feb 2025 01:17 PM IST
सार

Kanpur News: राष्ट्रीय स्तर पर एआई टूल शोध को इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के एमडी, एमएस थेसिस सपोर्ट प्रोग्राम में चयनित किया गया है। आईसीएमआर में चयन होने पर शोध के लिए फंड मिलेगा। टूल के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, खड़गपुर ने सॉफ्टवेयर तैयार किया है।

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Your voice will tell the condition of your throat NIT Kharagpur and GSVM have jointly developed an AI tool
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

रोगी की आवाज सुनते ही आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) टूल बता देता है, कि गले में कौनसी बीमारी है। वोकल कॉर्ड और गले के साउंड बॉक्स की छोटी से छोटी गांठ का मिजाज यह पहचान लेता है। इससे मर्ज की शुरुआत में ही रोगी को इलाज मिल जाता है। टेली मेडिसिन विधि से इलाज के लिए यह एआई टूल वरदान है। कोसों दूर बैठे इंसान के साउंड सैंपल से ही रोग की पहचान हो जा रही है।

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एनआईटी खड़गपुर और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग ने मिलकर यह टूल तैयार किया है। एआई टूल से ईएनटी विभाग ने अभी तक 70 रोगियों की डायग्नोसिस बनाई है। एआई टूल की डायग्नोसिस को इंडोस्कोपिक और पैथोलॉजिकल जांचों से क्रॉस चेक भी किया गया। इसमें एआई टूल की जांच को सटीक पाया गया। इसके आधार पर लेरिंजाइटिस, गले के साउंड बॉक्स की दिक्कत, गांठों आदि का इलाज किया गया।

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रोग की पहचान में मदद मिलती है
साउंड सैंपल लेने के लिए रोगी से कुछ वाक्य बोलने को कहा जाता है। वो जो जवाब देता है, उससे साउंड सैंपल तैयार किए जाते हैं। इन्हीं सैंपल से रोग की पहचान हो जाती है। ईएनटी विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. एसके कनौजिया ने बताया कि एआई टूल सरीखी तकनीक से रोग की पहचान में मदद मिलती है। डायग्नोसिस सटीक होती है। डॉ. हरेंद्र की देखरेख में डॉ. नेहा चौधरी ने एआई टूल पर शोध किया है।

आवाज की फ्रीक्वेंसी बता देती है दिक्कत
डॉ. हरेंद्र ने बताया कि इससे टेली मेडिसिन से इलाज में आसानी हो जाएगी। इसमें आवाज सैंपल से जांच कर ली जाएगी। वोकल कॉर्ड की बीमारी किस स्थिति में है, यह भी पता लग जाएगा। उन्होंने बताया कि गले की बीमारी होने पर आवाज की फ्रीक्वेंसी बता देती है कि कुछ दिक्कत है। डॉ. अमृता श्रीवास्तव और डॉ. नेहा ने बताया कि एआई टूल का सॉफ्टवेयर एक स्पेक्टोग्राम बना देता है।

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गांठों के नेचर के संबंध में भी पता चल जाता है
इसी से बीमारी की स्थिति के बारे में पता लग जाता है। इसके अलावा गांठों के नेचर के संबंध में भी पता चल जाता है। उन्होंने बताया कि गले से संबंधित दिक्कतें बढ़ रही हैं। बहुत से रोगी दूर-दराज इलाकों के होते हैं, जिन्हें अस्पताल आने-जाने में दिक्कत होती है। टेली कंसलटेशन से कोसों दूर बैठे रोगी की आवाज का सैंपल लेकर डायग्नोसिस बन जाती है। राष्ट्रीय स्तर पर एआई टूल शोध को इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के एमडी, एमएस थेसिस सपोर्ट प्रोग्राम में चयनित किया गया है।

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