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यस बैंक के खाताधारक कारोबारी पैसा न निकाल पाने से परेशान, पर्सनल लोन लेकर भरा एडवांस टैक्स
Sun, 15 Mar 2020 09:43 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 15 Mar 2020 09:43 AM IST
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यस बैंक
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर में वित्तीय वर्ष की आखिरी तिमाही का एडवांस टैक्स भरने की आखिरी तारीख 15 मार्च है, लेकिन यस बैंक के तमाम खाताधारक कारोबारियों के पास इतना धन नहीं है कि वे समय पर इसका भुगतान कर सकें। हालांकि कई कारोबारियों ने दूसरे बैंकों में खुले अपने बचत खातों के आधार पर पर्सनल लोन लेकर एडवांस टैक्स का भुगतान कर दिया है।
यस बैंक में जमा अपना ही धन न निकलने से कारोबारी परेशान हैं। यस बैंक में लेनदेन पर प्रतिबंध लगने से सबसे ज्यादा दिक्कतें व्यापारियों और कारोबारियों को हो रही हैं। अधिकतर कारोबारियों ने अब तक 50,000 रुपये की निकासी कर ली है।
इस रकम का इस्तेमाल फैक्ट्री के अन्य खर्चों में हो चुका है। अब दिक्कत यह है कि 15 मार्च तक एक साथ कई कारोबारी खर्चे और भी हैं। इनमें एडवांस टैक्स, ईएसआईसी और ईपीएफ का भुगतान शामिल है। लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष हरेंद्र मूरजानी ने बताया कि उन्होंने खुद पर्सनल लोन लेकर एडवांस टैक्स भरा है।
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यस बैंक के खाते में पर्याप्त पैसा पड़ा है, लेकिन निकासी न होेने की वजह से उन्हें मजबूरी में लोन लेना पड़ा। कारोबारी अमन घई बताते हैं कि एडवांस टैक्स का तो उन्होंने किसी तरह जुगाड़ कर लिया लेकिन ईएसआईसी और ईपीएफ के भुगतान के लिए उन्हें उधार लेना पड़ा। संगठन में ऐसे लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। सभी एक दूसरे से उधार लेकर काम चला रहे हैं।
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यस बैंक में जमा अपना ही धन न निकलने से कारोबारी परेशान हैं। यस बैंक में लेनदेन पर प्रतिबंध लगने से सबसे ज्यादा दिक्कतें व्यापारियों और कारोबारियों को हो रही हैं। अधिकतर कारोबारियों ने अब तक 50,000 रुपये की निकासी कर ली है।
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इस रकम का इस्तेमाल फैक्ट्री के अन्य खर्चों में हो चुका है। अब दिक्कत यह है कि 15 मार्च तक एक साथ कई कारोबारी खर्चे और भी हैं। इनमें एडवांस टैक्स, ईएसआईसी और ईपीएफ का भुगतान शामिल है। लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष हरेंद्र मूरजानी ने बताया कि उन्होंने खुद पर्सनल लोन लेकर एडवांस टैक्स भरा है।
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यस बैंक के खाते में पर्याप्त पैसा पड़ा है, लेकिन निकासी न होेने की वजह से उन्हें मजबूरी में लोन लेना पड़ा। कारोबारी अमन घई बताते हैं कि एडवांस टैक्स का तो उन्होंने किसी तरह जुगाड़ कर लिया लेकिन ईएसआईसी और ईपीएफ के भुगतान के लिए उन्हें उधार लेना पड़ा। संगठन में ऐसे लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। सभी एक दूसरे से उधार लेकर काम चला रहे हैं।