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‘ये है बॉम्बे मेरी जान’, यहां जिंदगी नहीं आसान, 5 दोस्तों के सफर की अनोखी कहानी

Mon, 03 Dec 2018 02:22 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Mon, 03 Dec 2018 02:22 PM IST
सार

-मुंबई में पांच दोस्तों के सफर की कहानी है यह नाटक
-15 सदस्यीय टीम ने किया शानदार मंचन
 

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yeh hai bombay meri jaan event held in psit kanpur
 पीएसआईटी भौंती में नाटक का मंचन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी में कानपुर के पीएसआईटी भौंती में रविवार को कलासागर नाटक कला समिति की ओर से ‘ये है बॉम्बे मेरी जान’ नाटक का मंचन हुआ। नाटक को नादिरा जहीर बब्बर ने लिखा और इसका निर्देशन किया है। मुंबई सपनों की दुनिया है। देश के कोने कोने से रातोंरात स्टार बनने का सपना लेकर रोज हजारों लोग यहां आते हैं। नाटक उन्हीं हजारों लोगों में से पांच लोगों की कहानी है जो देश के अलग अलग हिस्सों से आते हैं।
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देश के अलग-अलग हिस्सों से देवी दा, टीकम, राजन, लक्ष्य और आरिफ अली अपनी किस्मत बदलने के लिए मुंबई आते हैं। मुंबई स्टेशन पर सभी की मुलाकात होती है। उन्हें पता होता है कि मुंबई में रहना कितना मुश्किल है। महीनों ढूंढने के बाद भी सिर छुपाने के लिए जगह नहीं मिलती है। कुछ दिनों तक मुंबई की सड़कों पर जूते घिसने के बाद उन्हें एक जगह रहने के लिए खोली (छोटा सा कमरा) मिलती है।
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धीमी रोशनी के बीच मुंबई की एक खोली से नाटक की शुरुआत होती है। खोली में दो चारपाई हैं। एक कोने में किताबों की रैक है। दूसरे कोने में जूते रखने की रैक है। छोटा सा किचन है और बाथरूम जहां हमेशा बिना पानी की बाल्टी होती है।
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 पीएसआईटी भौंती में नाटक का मंचन
देवी दा (बिहार), टीकम (उत्तर प्रदेश), राजन (कर्नाटक), लक्ष्य (हरियाणा) और आरिफ अली (कश्मीर) एक ही कमरे को शेयर करते हैं। कोई स्क्रिप्ट राइटर बनने के ख्वाब देखकर मुंबई आया है तो कोई एक्टर बनना चाहता है। किसी को अपनी मां और बहन के लिए पैसे गांव भेजने हैं। लेकिन सपनों के शहर मुंबई में जिंदगी की राह आसान नहीं है। पांचों लोग गहरे दोस्त बन जाते हैं।

नाटक में मुंबई में रहने वाले लोगों के मनोभाव को भी दिखाया गया है। कैथोलिक मकान मालकिन नैंसी का एक्स हसबैंड शराबी है। वो नेंसी के साथ गाली गलौच करता है। रुपयों के लिए मारता पीटता है। साउथ इंडियन राजन चाय पूछने पर अपमानित महसूस करता है क्योंकि वह मद्रास का रहने वाला है और केवल काफी पीता है। नाटक के एक दृश्य में एक रात को अचानक पुलिस उनके कमरे तक पहुंचती है।

वो आरिफ के बारे में पूछती है। पुलिस वाला कहता है कि आरिफ एक आतंकी है। उसने बाघा बार्डर से पाकिस्तान फोन किया था। आरिफ को पुलिस पूछताछ के लिए बुलाती रहती है क्योंकि वह मुस्लिम है। नाटक में दिखाया गया है कैसे सभी दोस्त एक दूसरे की मदद करने के लिए अपनी हदों से भी बाहर चले जाते हैं। नाटक में नोकझोंक, तनाव, मोहब्बत, नफरत, गरीबी, सुख दुख को करीब से दिखाया गया है। 
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