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Kanpur News: यमुना का जलस्तर घटा, चारे का संकट अब भी बरकरार
Sat, 30 Aug 2025 01:06 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sat, 30 Aug 2025 01:06 AM IST
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मूसानगर। यमुना नदी का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। मगर पशुपालकों के सामने मवेशियों को खिलाने के लिए चारे का संकट बरकरार है। खेतों के जलमग्न होने से चारा खराब हो चुका है। वहीं जहां चारा है वहां पानी भरा होने से पहुंचना मुश्किल है। लोग दूसरे गांव जाकर घास आदि काटकर लाते हैं। इसके बाद नाव में रखकर गांव पहुंच रहे हैं।
पड़ाव की पुलिया से शुक्रवार को पानी और कम हो गया। इससे आवाजाही शुरू हो गई। वहीं आढ़न पथार की पुलिया अब भी जलमग्न है। यहां नाव से लोग आवाजाही कर पा रहे हैं। इन गांवों में पशुओं के लिए चारे का संकट बना हुआ है। लोग दूसरे गांव जाकर घास फूस या चारा लेकर आते हैं। इसके बाद नाव से चारा रखकर गांव पहुंच रहे हैं।
यमुना नदी का जलस्तर मूसानगर गेज पर अब 103.60 मीटर के स्तर पर आ गया है। यह खतरे के निशान से करीब साढ़े तीन मीटर नीचे हो गया है। दोबारा आई बाढ़ से यमुना तहलटी में बसे गांवों में दुश्वारियों का अंबार लगा है। पहली बाढ़ में खड़ी फसल बर्बाद हो गई। चारा भी नष्ट हुआ। अब जो कुछ बचा था वह दूसरी बाढ़ ले डूबी। खेतों में डाला गया बाजरा बीज भी बेकार चला गया।
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इधर जलस्तर कम होने पर बाढ़ प्रभावित नगीना, आढ़न, सुल्तनापुर, बम्हनौली, चपरघटा, मुसरिया, कट्टापुरवा, गौरी, नयापुरवा, अकबराबाद, क्योटरा व पथार गांवों की बिजली आपूर्ति शुक्रवार को बहाल कर दी गई। छह दिन बाद इन गांवों में बिजली आपूर्ति बहाल हुई तो लोगों को राहत हुई है। यमुना जलस्तर लगातार घट रहा है। अब गांवों से पानी दूर हो गया है। आढ़न-पथार की पुलिया अभी डूबी है। इसकी वजह से नाव से आवागमन हो रहा है। यहां भी जल्द ही पानी उतरने की उम्मीद है।
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फोटो-22 कुसमा देवी, पथार। संवाद
फोटो-23 मोहन लाल, पथार। संवाद
फोटो-24 आलोक, पथार। संवाद
फोटो-25 विश्वनाथ, पथार। संवाद
खत्म हो रहा सहेजकर रखा अन्न, चारे के लिए भटकना पड़ रहा
बाढ़ का पानी तो अब कम हो गया है। मगर गांव की पुलिया अब भी डूबी है। इसके कारण नाव से ही आवाजाही हो पा रही है। सहेजकर अन्न रखा था वह खत्म हो रहा है। वहीं चारा के लिए दूसरे गांव में भटकना पड़ रहा है। - कुसमा देवी, पथार।
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बाढ़ के चलते आस पास के क्षेत्रों में चारा बर्बाद हो गया है। खेतों व समतल जगह में पानी भरा है। नहीं तो बारिश में घास ही चारा के लिए मिल जाती। चारा का जुगाड़ दूसरे गांव में जाकर करना पड़ रहा है। मवेशी भरपेट चारा नहीं पा रहे हैं। इससे दूध का उत्पादन भी गिर गया है। - मोहन लाल, पथार।
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पहली बाढ़ में बर्बाद हुई फसलों का सर्वे हो गया है। मगर अभी आर्थिक मदद नहीं मिल सकी है। इधर दोबारा आयी बाढ़ में रही सही कसर भी पूरी हो गई है। प्राईवेट स्कूल में पढ़ाते हैं तो रोजना गांव से बाहर जाना पड़ता है। दो बार आयी बाढ़ से इस माह समय से ड्यूटी पर नहीं जा सके तो सैलरी भी मुश्किल से मिलेगी। - आलोक, पथार।
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पहली बार आयी बाढ़ के बाद जिंदगी पटरी पर लौट रही थी। मगर दोबारा बाढ़ आ गई। इससे मुश्किलें बढ़ गई है। राशन तो मिल जाता है। मगर पशुओं के लिए चारा आदि की दिक्कत है। - विश्वनाथ, पथार।
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वर्जन..........
यमुना जलस्तर गिर रहा है। शुक्रवार शाम को चार बजे जलस्तर 103.60 मीटर दर्ज किया गया है। यह खतरे के निशान से साढ़े तीन मीटर नीचे है। - अनिल कुमार गुप्ता, केंद्रीय जल आयोग मूसानगर क्षेत्र प्रभारी
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पड़ाव की पुलिया से शुक्रवार को पानी और कम हो गया। इससे आवाजाही शुरू हो गई। वहीं आढ़न पथार की पुलिया अब भी जलमग्न है। यहां नाव से लोग आवाजाही कर पा रहे हैं। इन गांवों में पशुओं के लिए चारे का संकट बना हुआ है। लोग दूसरे गांव जाकर घास फूस या चारा लेकर आते हैं। इसके बाद नाव से चारा रखकर गांव पहुंच रहे हैं।
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यमुना नदी का जलस्तर मूसानगर गेज पर अब 103.60 मीटर के स्तर पर आ गया है। यह खतरे के निशान से करीब साढ़े तीन मीटर नीचे हो गया है। दोबारा आई बाढ़ से यमुना तहलटी में बसे गांवों में दुश्वारियों का अंबार लगा है। पहली बाढ़ में खड़ी फसल बर्बाद हो गई। चारा भी नष्ट हुआ। अब जो कुछ बचा था वह दूसरी बाढ़ ले डूबी। खेतों में डाला गया बाजरा बीज भी बेकार चला गया।
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इधर जलस्तर कम होने पर बाढ़ प्रभावित नगीना, आढ़न, सुल्तनापुर, बम्हनौली, चपरघटा, मुसरिया, कट्टापुरवा, गौरी, नयापुरवा, अकबराबाद, क्योटरा व पथार गांवों की बिजली आपूर्ति शुक्रवार को बहाल कर दी गई। छह दिन बाद इन गांवों में बिजली आपूर्ति बहाल हुई तो लोगों को राहत हुई है। यमुना जलस्तर लगातार घट रहा है। अब गांवों से पानी दूर हो गया है। आढ़न-पथार की पुलिया अभी डूबी है। इसकी वजह से नाव से आवागमन हो रहा है। यहां भी जल्द ही पानी उतरने की उम्मीद है।
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फोटो-22 कुसमा देवी, पथार। संवाद
फोटो-23 मोहन लाल, पथार। संवाद
फोटो-24 आलोक, पथार। संवाद
फोटो-25 विश्वनाथ, पथार। संवाद
खत्म हो रहा सहेजकर रखा अन्न, चारे के लिए भटकना पड़ रहा
बाढ़ का पानी तो अब कम हो गया है। मगर गांव की पुलिया अब भी डूबी है। इसके कारण नाव से ही आवाजाही हो पा रही है। सहेजकर अन्न रखा था वह खत्म हो रहा है। वहीं चारा के लिए दूसरे गांव में भटकना पड़ रहा है। - कुसमा देवी, पथार।
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बाढ़ के चलते आस पास के क्षेत्रों में चारा बर्बाद हो गया है। खेतों व समतल जगह में पानी भरा है। नहीं तो बारिश में घास ही चारा के लिए मिल जाती। चारा का जुगाड़ दूसरे गांव में जाकर करना पड़ रहा है। मवेशी भरपेट चारा नहीं पा रहे हैं। इससे दूध का उत्पादन भी गिर गया है। - मोहन लाल, पथार।
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पहली बाढ़ में बर्बाद हुई फसलों का सर्वे हो गया है। मगर अभी आर्थिक मदद नहीं मिल सकी है। इधर दोबारा आयी बाढ़ में रही सही कसर भी पूरी हो गई है। प्राईवेट स्कूल में पढ़ाते हैं तो रोजना गांव से बाहर जाना पड़ता है। दो बार आयी बाढ़ से इस माह समय से ड्यूटी पर नहीं जा सके तो सैलरी भी मुश्किल से मिलेगी। - आलोक, पथार।
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पहली बार आयी बाढ़ के बाद जिंदगी पटरी पर लौट रही थी। मगर दोबारा बाढ़ आ गई। इससे मुश्किलें बढ़ गई है। राशन तो मिल जाता है। मगर पशुओं के लिए चारा आदि की दिक्कत है। - विश्वनाथ, पथार।
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यमुना जलस्तर गिर रहा है। शुक्रवार शाम को चार बजे जलस्तर 103.60 मीटर दर्ज किया गया है। यह खतरे के निशान से साढ़े तीन मीटर नीचे है। - अनिल कुमार गुप्ता, केंद्रीय जल आयोग मूसानगर क्षेत्र प्रभारी