कानपुर की सेहत खराब है: क्यों बढ़ रहे हैं रोज चार गुना नए रोगी, जानिए क्या है स्वास्थ्य सूचकांक में स्थिति
सात अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जा रहा है, ताकि लोग अपनी अच्छी सेहत के प्रति जागरूक हो सकें। लेकिन उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर की सेहत बिगड़ी हुई है। यहां प्रतिदिन पैदा होने वालों की संख्या से चार गुना अधिक लोग बीमार पड़ रहे हैं।
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देश में सबसे अधिक टीबी रोगियों वाले शहर का तमगा कानपुर से हटा जरूर है, लेकिन सेहत दिनोंदिन खराब हो रही है। टीबी रोगी घट गए हैं, लेकिन मुंह के कैंसर, डायबिटीज, हृदय और हाइपरटेंशन के रोगियों में कई गुना इजाफा हो गया है। इन रोगों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं।
कानपुर शहर में प्रतिदिन औसत 255 बच्चे पैदा होते हैं। वहीं, अस्पतालों की ओपीडी में औसत 1025 नए रोगी बढ़ जाते हैं। ऐसे में देखा जाए, तो जितने बच्चे पैदा हो रहे हैं उससे चार गुना नए रोगियों की संख्या हर रोज बढ़ रही है।
इनमें ज्यादातर रोगी डायबिटीज और हृदय रोग के होते हैं। इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के वायरल संक्रमण, हेपेटाइटिस सी और बी के रोगी भी बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि प्रदेश के स्वास्थ्य सूचकांक में कानपुर 38वें नंबर पर है, जबकि पड़ोसी जिला उन्नाव सूचकांक के पहले स्थान पर है।
कानपुर में इस वक्त टीबी के रोगी साढ़े छह हजार हैं। इनमें 512 मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट टीबी के हैं। टीबी रोगियों का यह आंकड़ा घट रहा है, लेकिन डायबिटीज के रोगियों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। इस वक्त शहर में साढ़े पांच लाख से अधिक डायबिटीज के रोगी डॉक्टरों के यहां पंजीकृत हैं। इसके अलावा बहुत से डायबिटीज के ऐसे रोगी भी हैं, जिन्हें पता ही नहीं है कि ब्लड शुगर लेवल सीमा रेखा पार कर चुका है।
कुछ प्री डायबिटिक स्टेज में हैं जो कभी भी ब्लड शुगर लेवल की लक्ष्मण रेखा पार कर जाएंगे। इतने ही रोगी हाइपरटेंशन और हृदय रोग के हैं। इनकी संख्या निरंतर बढ़ रही है। कोरोना काल ने डायबिटीज और हार्ट के तकरीबन 20 फीसदी रोगी नए बढ़ा दिए हैं। ओपीडी में प्रतिदिन नए रोगियों की संख्या बढ़ रही है।

मुंह के कैंसर का आयु वर्ग घट गया
कानपुर की सेहत को मुंह के कैंसर ने भी बिगाड़ा है। मुंह के कैंसर के रोगी लगातार बढ़ रहे हैं। जेके कैंसर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. एसएन प्रसाद का कहना है कि सबसे अधिक नए रोगी मुंह के कैंसर के आते हैं। हर साल रोगियों की संख्या में 15-20 फीसदी इजाफा हो जाता है। सीनियर होम्योपैथ डॉ. हर्ष निगम का कहना है कि मुंह के कैंसर के रोगी बढ़ तो रहे हैं लेकिन चिंता में डालने वाली बात यह है कि इनका आयु वर्ग घट गया है। 30 से 45 साल आयु वर्ग के सबसे अधिक मुख कैंसर के रोगी आ रहे हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर महिलाओं में स्तन कैंसर की रोगी हैं। इसके अलावा पैंक्रियाज, गॉल ब्लैडर और गले के कैैंसर के रोगियों में भी इजाफा हो रहा है।
कोरोना की तीन लहरों में हृदय रोगियों की संख्या रूटीन की तुलना में 20 फीसदी बढ़ी है। कोविड से संक्रमित होने के बाद जिन रोगियों के फेफड़ों पर असर आया था, उन्हें भी हार्ट की तकलीफ होने लगी है। शरीर में ऑक्सीजन का लेवल घटने की वजह से हार्ट पर प्रेशर आने लगता है। रोगियों के हार्ट का इलाज किया जा रहा है। इन रोगियों की एक्सरे रिपोर्ट खराब आती है।
शहर की सेहत सुधारने के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इसके साथ ही लोगों से अपील की जा रही है कि 30 साल की उम्र के बाद एक बार पूरे शरीर की जांच करा लें। कैंसर या दूसरी बीमारियां अगर शुरुआत में पकड़ में आ जाती हैं तो उनका सटीक इलाज हो जाता है। इससे लाइफ क्वालिटी प्रभावित नहीं होती है। - डॉ. नैपाल सिंह, सीएमओ, कानपुर नगर