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1200 किमी. के सफर में दर्द से तड़पती रही गर्भवती, रास्ते में बदली पांच बसें, फतेहपुर में हुआ प्रसव

Tue, 26 May 2020 10:13 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Tue, 26 May 2020 10:13 PM IST
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Woman gave birth to child in Fatehpur after traveling 1200 km
सुरक्षित प्रसव के बाद स्वास्थ्य टीम के साथ महिला - फोटो : amar ujala
लॉकडाउन में ट्रेन और बस की सरकारी सुविधा के बाद भी अपने घरों को लौट रहे प्रवासियों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। फतेहपुर में मुंबई से लौट रहे परिवार के साथ भी ऐसा ही हुआ। पत्नी गर्भवती थी, उसे पांच रोडवेज बसें बदलनी पड़ीं। फतेहपुर में पहुंचते ही महिला को भीषण दर्द उठा। सूचना पर प्रशासन ने जहानाबाद सीएचसी में महिला को भर्ती कराकर उसका सुरक्षित प्रसव कराया।
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मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। परिवार का आरोप है कि मुंबई से पांच रोडवेज बसें बदलकर यहां तक पहुंची, 1200 किमी से ज्यादा सफर में प्रसव पीड़ा से तड़पती रही लेकिन कहीं उपचार नहीं दिलाया गया। भदोही के गोपीगंज निवासी राजेंद्र व उनका भाई राजन मुंबई के ठाणे में रहकर एक धागा फैक्ट्री में काम करते थे। लॉकडाउन के चलते फैक्ट्री बंद होने पर दोनों परिवार के साथ मुंबई में फंस गए।
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राजेंद्र की पत्नी संतरा देवी गर्भवती थी और प्रसव का समय नजदीक था। राजेंद्र ने बताया कि पत्नी की बिगड़ती हालत को देखकर गांव लौटने का फैसला किया। पहले वह ट्रेन की टिकट के लिए प्रयास करते रहे लेकिन नहीं मिला। पत्नी की हालत भी बिगड़ रही थी इस वजह से बस से चलने का फैसला करना पड़ा। राजेंद्र ने बताया कि पत्नी, भाई राजन व उसकी पत्नी रिया के साथ वह बस में सवार हो गए।
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Woman gave birth to child in Fatehpur after traveling 1200 km
मां बनी तो छलक उठे खुशी के आंसू - फोटो : amar ujala
महाराष्ट्र रोडवेज की बस पहले उन्हें मुंबई सीमा तक लेकर गई। यहां से मध्य प्रदेश सरकार की अलग-अलग तीन बसों में सफर करने के बाद पहले गुना और फिर झांसी पहुंचाया गया। बस से सफर शुरू होते ही धक्के लगने से पत्नी प्रसव पीड़ा से तड़पती रही, लेकिन कहीं मदद नहीं मिली। झांसी पहुंचने पर पत्नी पीड़ा सहन नहीं कर पा रही थी। उसे देखकर स्थानीय अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई लेकिन अनसुना कर दिया गया।

उन्हें मंगलवार की सुबह चार बजे भदोही की बस में बिठाकर रवाना करा दिया गया। करीब 1200 किमी के सफर में संतरा दर्द से तड़पती रही और उसकी देखभाल छोटे भाई की पत्नी रिया करती रही। राजेंद्र ने बताया कि सुबह करीब सवा दस बजे बस जहानाबाद कस्बे के ढाबा के समीप रुकी। 

चालक समेत अन्य प्रवासी यात्री चाय पानी के लिए उतर गए। ढाबे के एक कर्मचारी ने उसकी पत्नी की हालत देखी तो उससे रहा नहीं गया। उसने बिंदकी एसडीएम का मोबाइल नंबर देकर मदद मांगने का सुझाव दिया। इस पर उसने फोन पर एसडीएम से मदद मांगी। एसडीएम प्रहलाद सिंह से बात करने के कुछ देर बाद 102 एंबुलेंस आ गई, जिससे पत्नी को जहानाबाद सीएचसी पहुंचाया गया।

चिकित्सा अधीक्षक डा. जेपी वर्मा व स्टाफ नर्सों की टीम ने महिला का प्रसव कराया। डॉक्टरों ने जच्चा व बच्चा दोनों के स्वस्थ होने की बात कही है। डीएम संजीव सिंह का कहना है कि एसडीएम की मदद से महिला को सुरक्षित प्रसव का लाभ मिला। सफर में उसके साथ हुआ बर्ताव अमानवीय तरीके वाला है। वह शासन को इस बात की जानकारी भेज रहे हैं।
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