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Chitrakoot: विधवा भाभी से दुष्कर्म का मामला, देवर को 10 साल की सजा, 11 हजार का अर्थदंड भी ठोका

Tue, 22 Aug 2023 11:00 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Tue, 22 Aug 2023 11:00 AM IST
सार

Chitrakoot Crime: सोमवार को बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद सत्र न्यायाधीश विष्णु कुमार शर्मा ने निर्णय सुनाया। इसमें दोष सिद्ध होने पर देवर को 10 वर्ष सश्रम कारावास के साथ 11 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।

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Widow sister in law raped, brother-in-law sentenced to 10 years, fined 11 thousand
जेल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

चित्रकूट जिले में भाई की मौत के बाद विधवा भाभी से दुष्कर्म करने के आरोपी देवर को जिला जज ने 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 11 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है। सोमवार को जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी श्याम सुंदर मिश्रा ने बताया कि दुराचार के मामले में पीडि़ता ने 18 अक्टूबर 2022 को भरतकूप थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

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शादी के बाद उनके एक बेटा भी हुआ। मार्च 2021 में सड़क हादसे में उसके पति की मौत हो गई। इसके लगभग 6 माह बाद उसका देवर घर में अकेले जानकर शराब के नशे में आया और दुष्कर्म किया। इसकी शिकायत उसने सास-ससुर से की लेकिन उन्होंने घर की बात होने का हवाला देकर बात को दबा दिया। इसके चलते उसने शिकायत नहीं की। इसके बाद दूसरे दिन फिर से उसके साथ देवर ने दुष्कर्म किया।

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देवर ने उसे घर से निकाल दिया
इस पर उसने परिवारीजनों और पडोसियों को जानकारी देने के साथ इलाकाई पुलिस के पास थाना दिवयापुर जिला औरैया जाकर भी सूचित किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद घर आने पर देवर ने उसे घर से निकाल दिया। पीड़िता के अनुसार यहां से वह अपने चचिया ससुर के घर गई। फोन से पूरे मामले की जानकारी अपनी मां को दी। जिसके बाद उसकी मां उसे मायके ले आई।

न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया
यहां भी 16 जुलाई 2022 को उसका देवर दोपहर के समय ससुराल ले जाने के नाम पर आया और उसे अकेले पाकर दुष्कर्म किया। साथ ही शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी। इसकी सूचना उसने भरतकूप थाने में दी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके चलते उसने न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। जिस पर न्यायालय द्वारा अभियोग पंजीकृत कर विवेचना किए जाने के आदेश दिए गए।

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10 वर्ष सश्रम कारावास और 11 हजार का अर्थदंड
इसके बाद पुलिस ने इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कर पीडि़ता का चिकित्सीय परीक्षण कराने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। सोमवार को बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद सत्र न्यायाधीश विष्णु कुमार शर्मा ने निर्णय सुनाया। जिसमें दोष सिद्ध होने पर देवर को 10 वर्ष सश्रम कारावास के साथ 11 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।

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