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Kanpur News: 75 साल में एमए की डिग्री से सम्मानित होंगे विमलेश
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कानपुर। हमारे शरीर में मौजूद अदृश्य जीवन ऊर्जा को संतुलित बनाए रखने और बिना किसी दवाई और मंत्रों से मरीज को ठीक करने के अनूठे सेवा कार्य में लगे 75 साल के विमलेश शंकर अवस्थी छत्रपति शाहूजी महाराज विवि के दीक्षांत समारोह में एमए हिंदू स्टडीज की उपाधि से सम्मानित होंगे। क्लास में दादा जी के नाम से मशहूर विमलेश अपनी इस स्पर्श चिकित्सा को जन जन तक पहुंचाने के लिए पीएचडी करना चाहते हैं। उन्होंने 30 जून को हुई यूजीसी नेट की परीक्षा भी दी है।
विकासनगर निवासी विमलेश शंकर एसबीआई बैंक से मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त हैं। शहर से ही पढ़े विमलेश ने 1972 हलीम कॉलेज से स्नातक किया। 1974 में बैंक में नौकरी ज्वाइन की। 1997 में स्पर्श चिकित्सा सीखना शुरू किया। तब से लेकर अभी तक खुद भी प्रैक्टिस करते हैं और सैकड़ों लोगों को इस विद्या के बारे में सिखा चुके हैं। जापान में यह रेकी विद्या के नाम से प्रचलित है।
वह कहते हैं कि हमारे शरीर जब किसी अंग में नकारात्मक ऊर्जा का वास हो जाता है तो वह बीमारी बन जाता है। ब्रह्मांड से सकारात्मक ऊर्जा को एक हाथ से ग्रहण कर दूसरे हाथ से व्यक्ति के प्रभावित हिस्से में डाला जाता है। कुछ दिनों की इस प्रक्रिया में मरीज ठीक होने लगता है। विमलेश कहते हैं कि माइग्रेन, नींद न आने, अवसाद जैसी बीमारियों में यह काफी कारगर है।
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विवि के डिपार्टमेंट ऑफ लाइफलांग लर्निंग एक्सटेशन में संचालित एमए हिंदू स्टडीज का कोर्स 73 साल की उम्र में ज्वाइन करने वाले विमलेश ने इफेक्ट ऑफ प्राण हीलिंग ऑन इनसोमेनिया, स्ट्रेस एंड डिप्रेशन पर अपना लघु शोध भी प्रस्तुत किया है। इसमें उन्होंने अपने और अपने छात्रों द्वारा स्वस्थ किए गए मरीजों का ब्योरा दिया है।
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विकासनगर निवासी विमलेश शंकर एसबीआई बैंक से मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त हैं। शहर से ही पढ़े विमलेश ने 1972 हलीम कॉलेज से स्नातक किया। 1974 में बैंक में नौकरी ज्वाइन की। 1997 में स्पर्श चिकित्सा सीखना शुरू किया। तब से लेकर अभी तक खुद भी प्रैक्टिस करते हैं और सैकड़ों लोगों को इस विद्या के बारे में सिखा चुके हैं। जापान में यह रेकी विद्या के नाम से प्रचलित है।
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वह कहते हैं कि हमारे शरीर जब किसी अंग में नकारात्मक ऊर्जा का वास हो जाता है तो वह बीमारी बन जाता है। ब्रह्मांड से सकारात्मक ऊर्जा को एक हाथ से ग्रहण कर दूसरे हाथ से व्यक्ति के प्रभावित हिस्से में डाला जाता है। कुछ दिनों की इस प्रक्रिया में मरीज ठीक होने लगता है। विमलेश कहते हैं कि माइग्रेन, नींद न आने, अवसाद जैसी बीमारियों में यह काफी कारगर है।
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विवि के डिपार्टमेंट ऑफ लाइफलांग लर्निंग एक्सटेशन में संचालित एमए हिंदू स्टडीज का कोर्स 73 साल की उम्र में ज्वाइन करने वाले विमलेश ने इफेक्ट ऑफ प्राण हीलिंग ऑन इनसोमेनिया, स्ट्रेस एंड डिप्रेशन पर अपना लघु शोध भी प्रस्तुत किया है। इसमें उन्होंने अपने और अपने छात्रों द्वारा स्वस्थ किए गए मरीजों का ब्योरा दिया है।