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शर्मनाक है ये तस्वीर: आम रास्ते पर जलभराव, पानी में घुसकर शव ले गए ग्रामीण, शव वाहन और फ्रीजर की मांग
Wed, 16 Sep 2026 10:37 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: Shikha Pandey
Updated Wed, 16 Sep 2026 10:37 PM IST
सार
Kannauj News: कुड़रा गांव में अंतिम यात्रा के दौरान बदहाल व्यवस्था की तस्वीर सामने आई है। ग्रामीणों ने शव वाहन और फ्रीजर की मांग की है।
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पानी में घुसकर शव ले जाते ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विकास के दावों के बीच विशुनगढ़ क्षेत्र के कुड़रा गांव में मंगलवार को व्यवस्था की बदहाली की तस्वीर सामने आई। गांव निवासी बेंचेलाल राजपूत के निधन के बाद अंतिम संस्कार के लिए शव को गांव से बाहर ले जाने का रास्ता जलभराव के कारण बंद था। मजबूरी में परिजनों और ग्रामीणों को पानी में घुसकर शव को बाहर तक ले जाना पड़ा। बरसात के अलावा आम दिनों में इस मार्ग पर जलभराव की समस्या के चलते ग्रामीणों ने खासी नाराजगी है।
ग्राम कुड़रा से विशुनगढ़ के रामलीला मैदान तक जाने वाला मार्ग पिछले कई वर्षों से दुर्दशा का शिकार है। गांव के लोग आवागमन के लिए इसी मार्ग का प्रयोग करते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गांव से बाहर निकलने वाले रास्ते पर भारी जलभराव है। ऐसे में सामान्य दिनों में भी आवागमन मुश्किल बना हुआ है। मंगलवार को जब बेंचेलाल राजपूत का निधन हुआ तो अंतिम यात्रा के लिए शव को गांव से बाहर ले जाना बड़ी चुनौती बन गया। सुगम रास्ता न होने के कारण ग्रामीणों ने पानी में उतरकर शव को बाहर रामलीला मैदान तक पहुंचाया, जहां से ट्रैक्टर द्वारा शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। गांव के राजू, दिनेश चंद्र, देवानंद, नीलेश, मनीष राजपूत व डॉ. धर्मवीर राजपूत लोग ने कहा कि बुनियादी सुविधाओं की स्थिति सुधारने के दावे किए जाते हैं, लेकिन कुड़रा गांव की तस्वीर इन दावों की जमीनी हकीकत सामने ला रही है। ग्रामीणों ने पानी निकासी के लिए नाली निर्माण कराए जाने के साथ ही सड़क को ऊंचा करवाकर बनाए जाने की मांग की है।
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ग्राम कुड़रा से विशुनगढ़ के रामलीला मैदान तक जाने वाला मार्ग पिछले कई वर्षों से दुर्दशा का शिकार है। गांव के लोग आवागमन के लिए इसी मार्ग का प्रयोग करते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गांव से बाहर निकलने वाले रास्ते पर भारी जलभराव है। ऐसे में सामान्य दिनों में भी आवागमन मुश्किल बना हुआ है। मंगलवार को जब बेंचेलाल राजपूत का निधन हुआ तो अंतिम यात्रा के लिए शव को गांव से बाहर ले जाना बड़ी चुनौती बन गया। सुगम रास्ता न होने के कारण ग्रामीणों ने पानी में उतरकर शव को बाहर रामलीला मैदान तक पहुंचाया, जहां से ट्रैक्टर द्वारा शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। गांव के राजू, दिनेश चंद्र, देवानंद, नीलेश, मनीष राजपूत व डॉ. धर्मवीर राजपूत लोग ने कहा कि बुनियादी सुविधाओं की स्थिति सुधारने के दावे किए जाते हैं, लेकिन कुड़रा गांव की तस्वीर इन दावों की जमीनी हकीकत सामने ला रही है। ग्रामीणों ने पानी निकासी के लिए नाली निर्माण कराए जाने के साथ ही सड़क को ऊंचा करवाकर बनाए जाने की मांग की है।
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बोले ग्रामीण
भाजपा नेता रामबख्श सिंह लोधी ने विधायक अर्चना पांडेय से विशुनगढ़ क्षेत्र के लिए शव वाहन और फ्रीजर उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि शव वाहन व फ्रीजर होने से गांवों के लोगों को अंतिम यात्रा के दौरान होने वाली परेशानी से राहत मिल सकती है।
ग्रामीण बृजमोहन राजपूत का कहना है बारिश के दिनों में समस्या और भी विकराल हो जाती है। घुटनों तक गंदे पानी में घुसकर आने जाने के कारण लोगों के पैरों में संक्रमण की समस्या पैदा हो गई है। साथ ही लोग आए दिन पानी में गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
भाजपा नेता रामबख्श सिंह लोधी ने विधायक अर्चना पांडेय से विशुनगढ़ क्षेत्र के लिए शव वाहन और फ्रीजर उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि शव वाहन व फ्रीजर होने से गांवों के लोगों को अंतिम यात्रा के दौरान होने वाली परेशानी से राहत मिल सकती है।
ग्रामीण बृजमोहन राजपूत का कहना है बारिश के दिनों में समस्या और भी विकराल हो जाती है। घुटनों तक गंदे पानी में घुसकर आने जाने के कारण लोगों के पैरों में संक्रमण की समस्या पैदा हो गई है। साथ ही लोग आए दिन पानी में गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
मामले की जांच कराई जा चुकी है। यह दो तालाबों के बीच की पटरी है। बरसात में तालाब फुल होने के कारण पटरी पर जलभराव हो गया है। गांव का मुख्य मार्ग दूसरा है, जो ठीकठाक हालत में है। शव को खेतों तक ले जाने के लिए सड़क की बजाय पटरी का प्रयोग किया गया था। आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है। - दीपांकर आर्य, बीडीओ, छिबरामऊ