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बिकरू में सिर्फ सिसकियां सुनाई दीं, रक्षाबंधन पर पहले जैसी चहल पहल नहीं दिखी
Mon, 03 Aug 2020 11:07 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 03 Aug 2020 11:07 PM IST
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बिकरू गांव
- फोटो : अमर उजाला
बिकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के एक माह बाद रक्षाबंधन पर भी गांव में पहले जैसी चहल-पहल नहीं दिखी। दहशतगर्द विकास दुबे की कोठी के पास प्रेम प्रकाश पांडे, प्रवीण उर्फ बउआ दुबे, प्रभात मिश्रा, अतुल व अमर दुबे के घरों में सन्नाटा पसरा रहा।
मुठभेड़ में मारे गए आरोपियों के परिजन अपने नसीब को कोसते और सिसकते रहे। अमर के घर में मौजूद वृद्धा ज्ञानवती, बउआ की वृद्ध मां पूर्णिमा व पिता ओमप्रकाश, प्रेम प्रकाश पांडेय की पत्नी सुषमा व बहू मनु के अलावा प्रभात की दादी राजकली और मां गीता दिनभर दरवाजे पर बैठी सिसकती रहीं।
दूसरी ओर चौखट पर बैठी हिमांशी राखी पर अपने इकलौते भाई प्रभात के गम में गुमसुम सी एकटक दरवाजे की ओर निहारती रही। जेल भेजे गए श्यामू बाजपेई की बहनें एकलौते भाई के लिए आंसू बहाती रहीं। गोपाल सैनी व उसके भाई गोविंद सैनी के घर वीरान पड़े थे।
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मुठभेड़ में मारे गए आरोपियों के परिजन अपने नसीब को कोसते और सिसकते रहे। अमर के घर में मौजूद वृद्धा ज्ञानवती, बउआ की वृद्ध मां पूर्णिमा व पिता ओमप्रकाश, प्रेम प्रकाश पांडेय की पत्नी सुषमा व बहू मनु के अलावा प्रभात की दादी राजकली और मां गीता दिनभर दरवाजे पर बैठी सिसकती रहीं।
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दूसरी ओर चौखट पर बैठी हिमांशी राखी पर अपने इकलौते भाई प्रभात के गम में गुमसुम सी एकटक दरवाजे की ओर निहारती रही। जेल भेजे गए श्यामू बाजपेई की बहनें एकलौते भाई के लिए आंसू बहाती रहीं। गोपाल सैनी व उसके भाई गोविंद सैनी के घर वीरान पड़े थे।
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