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वैष्णो देवी हादसा : रेलिंग फांद कर बचाई थी जान, दर्शन करने गए श्रद्धालु ने घर लौट कर सुनाई आपबीती
Mon, 03 Jan 2022 10:33 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 03 Jan 2022 10:33 AM IST
सार
हादसे में कानपुर के मारे गए दो श्रद्धालुओं के साथ गए साथियों ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान आपबीती सुनाई। सात अन्य साथियों में गंगागंज निवासी अजय कुमार, शिवम, प्रियांशु, कल्लू सविता व दो साथी रसूलाबाद निवासी भी दर्शन करने गए थे।
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vaishno devi news: घर पहुंचे शव तो मच गया कोहराम
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
वैष्णो देवी में मची भगदड़ से बचे पनकी गंगागंज निवासी स्नातक फर्स्ट ईयर के छात्र शिवम दीक्षित सिकंदरा निवासी हितेश के साथ घर लौट आया। शिवम ने मंजर बयां करते हुए कहा कि करीब 12 किमी की चढ़ाई चढ़ कर हम (नौ) लोग सही सलामत माता रानी के भवन तक पहुंच गए थे। रात के करीब 1.30 बजे थे...। जयकारों के बीच दो पक्षों में मारपीट का हो हल्ला मचा तो भगदड़ मच गई।
भीड़ से बचने के लिए मैंने रेलिंग फांदी और सात फीट नीचे दूसरी लेन में पहुंच गया। वहां भीड़ कम थी। करीब एक घंटे बाद जब मामला शांत हुआ तो मैं साथियों को खोजते हुए भवन के पास स्थित डिस्पेंसरी पहुंचा तो यहां महेंद्र और उनके जीजा नरेंद्र की लाश रखी थी। मैं गश खाकर गिर गया। इतने में आए प्रियांशु ने मुझे संभाला। फिर हम लोग होटल गए जहां बाकी सब मिल गए। हमने फिर गले मिले।
जद्दोजहद के बाद दोस्तों के सुपुर्द किए गए शव
शिवम के अनुसार नरेंद्र और महेंद्र के शवों को सुपुर्द करने के लिए पुलिस ने उनके परिजनों को कटरा बुलाने की शर्त रख दी थी। वहीं, उनके परिजनों की स्थिति इतनी खराब थी कि वे कहीं भी जाने की हालत में नहीं थे। ऐसे में काफी जद्दोजहद के बाद कटरा पुलिस-प्रशासन शवों को उनकी सुपुर्दगी में शहर भेजने के लिए राजी हुआ। शाम करीब पांच बजे शवों को जम्मू एयरपोर्ट से दिल्ली फिर दिल्ली से रात करीब 9.30 बजे अमौसी एयरपोर्ट भेजा गया। दोनों भी प्लेन से शवों के साथ आए।
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पति और भाई की मौत से टूट गई जानकी
पति नरेंद्र और भाई महेंद्र की मौत की खबर सुन जानकी टूट गई। अपने मासूम बच्चों निखिल और जान्हवी को गले लिपटा कर रोती रही। ढांढस बंधाने आने वाले लोगों से वह पूछती रही कि अब उसके मासूम बच्चों का क्या होगा...। वह बोली भगवान को उस पर तरस नहीं आया...। भाई के साथ पति को भी छीन लिया...।
उसकी हालत देख कर आसपास खड़े हर व्यक्ति की आंख नम हो गई। अमौसी एयरपोर्ट पर पनकी निवासी महेंद्र के शव को लेने एसीएम सेवन की मौजूदगी में पिता शिव किशन व बड़े भाई सुरेंद्र पहुंचे थे और बिधनू निवासी नरेंद्र के शव को लेने के लिए उनके पिता बाबू कश्यप व भाई सुमित बिधनू से पहुंचे थे। नरेंद्र का अंतिम संस्कार ड्योढ़ी घाट पर किया गया और महेंद्र के शव का अंतिम संस्कार बिठूर में कराया गया।
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भीड़ से बचने के लिए मैंने रेलिंग फांदी और सात फीट नीचे दूसरी लेन में पहुंच गया। वहां भीड़ कम थी। करीब एक घंटे बाद जब मामला शांत हुआ तो मैं साथियों को खोजते हुए भवन के पास स्थित डिस्पेंसरी पहुंचा तो यहां महेंद्र और उनके जीजा नरेंद्र की लाश रखी थी। मैं गश खाकर गिर गया। इतने में आए प्रियांशु ने मुझे संभाला। फिर हम लोग होटल गए जहां बाकी सब मिल गए। हमने फिर गले मिले।
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जद्दोजहद के बाद दोस्तों के सुपुर्द किए गए शव
शिवम के अनुसार नरेंद्र और महेंद्र के शवों को सुपुर्द करने के लिए पुलिस ने उनके परिजनों को कटरा बुलाने की शर्त रख दी थी। वहीं, उनके परिजनों की स्थिति इतनी खराब थी कि वे कहीं भी जाने की हालत में नहीं थे। ऐसे में काफी जद्दोजहद के बाद कटरा पुलिस-प्रशासन शवों को उनकी सुपुर्दगी में शहर भेजने के लिए राजी हुआ। शाम करीब पांच बजे शवों को जम्मू एयरपोर्ट से दिल्ली फिर दिल्ली से रात करीब 9.30 बजे अमौसी एयरपोर्ट भेजा गया। दोनों भी प्लेन से शवों के साथ आए।
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पति और भाई की मौत से टूट गई जानकी
पति नरेंद्र और भाई महेंद्र की मौत की खबर सुन जानकी टूट गई। अपने मासूम बच्चों निखिल और जान्हवी को गले लिपटा कर रोती रही। ढांढस बंधाने आने वाले लोगों से वह पूछती रही कि अब उसके मासूम बच्चों का क्या होगा...। वह बोली भगवान को उस पर तरस नहीं आया...। भाई के साथ पति को भी छीन लिया...।
उसकी हालत देख कर आसपास खड़े हर व्यक्ति की आंख नम हो गई। अमौसी एयरपोर्ट पर पनकी निवासी महेंद्र के शव को लेने एसीएम सेवन की मौजूदगी में पिता शिव किशन व बड़े भाई सुरेंद्र पहुंचे थे और बिधनू निवासी नरेंद्र के शव को लेने के लिए उनके पिता बाबू कश्यप व भाई सुमित बिधनू से पहुंचे थे। नरेंद्र का अंतिम संस्कार ड्योढ़ी घाट पर किया गया और महेंद्र के शव का अंतिम संस्कार बिठूर में कराया गया।