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गंगा में नाव पलटी, दो की मौत, नौ लापता
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Fri, 25 Sep 2015 02:26 AM IST
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जाजमऊ के सिद्धनाथ घाट पर गुरुवार शाम गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं से भरी नाव पलटने से 13 लोग गंगा नदी में डूब गए। इनमें से दो लोगों की मौत हो गई, दो बचा लिए गए और नौ लोग अभी लापता हैं।
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पुलिस, पीएसी और प्राइवेट गोताखोर लापता लोगों की तलाश में जुटे रहे पर कुछ पता नहीं चला। देर रात तक लापता लोगों के परिजनों ने पुलिस और प्रशासनिक अफसरों पर बचाव कार्य में लापरवाही बरतने का आरोप लगा हंगामा और नारेबाजी की। डीएम, एसएसपी समेत तमाम अफसर घटनास्थल पर जमे रहे।
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प्राइवेट बस चलाने वाले राजेश अग्रवाल परिवार के साथ शिव कटरा लालबंगला में पदमा गुप्ता के मकान में किराए पर रहते हैं। उन्होंने घर में गणपति प्रतिमा स्थापित की थी। गुरुवार परिवार और रिश्तेदारों के साथ शाम को सिद्धनाथ घाट पर गंगा नदी में प्रतिमा विसर्जित करने गए।
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सिद्धनाथ घाट के घाटेशोरन घाट पर लोगों ने गंगा नदी में प्रतिमा विसर्जित करने से रोक दिया पर राजेश समेत 13 लोग एक नाव पर सवार होकर गंगा में आगे बढ़ गए। बीच धार में नाव से प्रतिमा को गंगा नदी में डालते समय अचानक नाव पलट गई और सभी लोग पानी में डूब गए।
शोर शराबा सुनकर घाट पर सो रहा तैराक अजय उर्फ राजा तिवारी पहुंचा और गंगा में छलांग लगाकर तीन लोगों को बाहर निकाल लिया। इन्हें फौरन हैलट अस्पताल भेजा गया, जहां दो लोगों की मौत हो गई।
बाकी लोगों की तलाश के लिए घाट पर मौजूद कुछ गोताखोर नदी में कूदे लेकिन तेज बहाव होने के कारण कुछ पता नहीं चला। थोड़ी देर बाद थाना पुलिस पहुंची और निजी गोताखोर बुलवाकर गंगा में उतारे।
जल पुलिस की मोटरबोट मंगाई गई। बाद में डीएम कौशल राज शर्मा, एसएसपी शलभ माथुर, एडीएम सिटी अविनाश सिंह और एसपी पूर्वी देव रंजन वर्मा भारी फोर्स के साथ पहुंचे और राहत-बचाव कार्य तेज कराया।
हादसे के शिकार लोगों के परिजन भी घाट पर पहुंच गए और कोहराम मच गया। पुलिस ने बताया शिवकटरा निवासी मेडिकल स्टोर संचालक संजय अग्रवाल (38) और कोंच जालौन निवासी संजय के मामा संतोष (35) की मौत हुई है।
सांस देने के बाद भी पति को नहीं बचा सकी
नाव पलटने के बाद सिद्धनाथ घाट पर मौजूद गोताखोरों ने संजय अग्रवाल (38) और उनके मामा संतोष (35) को कुछ ही देर में बाहर निकाल लिया, लेकिन बाकी किसी का कुछ पता नहीं चला। किनारे मौजूद संजय की पत्नी पूनम पुलिस वालों के साथ उसे लेकर पास के एक निजी हॉस्पिटल गई, जहां से हैलट रेफर कर दिया गया।
पूनम पति को बचाने के लिए रास्ते भर उसे मुंह से सांस देते हुए हैलट तक पहुंची लेकिन संजय की जान नहीं बच सकी। उधर, घाट पर मौजूद परिवारीजन विलाप करते हुए यही कहते रहे कि इससे अच्छा तो घाट पर बने तालाब में ही मूर्ति विसर्जित कर देते।