UPSI परीक्षा विवाद: सवाल से भावनाओं पर की चोट, ब्राह्मण समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी, सियासी गलियारों में उबाल
Kanpur News: यूपीएसआई परीक्षा में अवसरवादी के विकल्प में पंडित शब्द रखने पर ब्राह्मण समाज ने कड़ी आपत्ति जताई है। विभिन्न संगठनों और विधायकों ने इसे अपमानजनक बताते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा में शनिवार को 20 वें नंबर पर पूछे गए एक प्रश्न को लेकर विरोध शुरू हो गया है। लोगों ने इस तरह के प्रश्न को आपत्तिजनक बताया है। कई संगठनों की ओर से इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पेपर सेट करने वालों पर कार्रवाई की मांग की गई है। प्रश्न पत्र में अवसर के अनुसार बदल जाने वाला के लिए एक शब्द चुनने को कहा गया था, जिसमें अन्य विकल्पों के साथ पंडित शब्द को भी रखा गया है। ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया की ओर से इस संबंध में जारी एक पत्र में कहा गया है कि यह प्रश्न स्पष्ट रूप से गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
सही अर्थ में अवसर के अनुसार बदल जाने वाला अवसरवादी होता है, लेकिन विकल्पों में पंडित को शामिल करना एक विशेष समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला है। ऐसे प्रश्न को आधिकारिक रूप से अस्वीकार करने और इसमें सुधार करने की मांग भी की गई है। संस्था के प्रदेश प्रभारी दिनेश दुबे का कहना है कि यदि इस प्रकरण को अविलंब संज्ञान ले कार्यवाही नहीं की गई तो जल्द ही प्रदेश के ब्राह्मण समाज के संगठनों के साथ बैठक कर सर्वसम्मति से आंदोलन किया जाएगा।
यह सवाल न केवल परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है, बल्कि सरकार की छवि को धूमिल करने और तनाव पैदा करने का प्रयास है । यह पेपर बनाने वाले की ब्राह्मणों के प्रति घृणित मानसिकता को भी दर्शाता है। -दिनेश दुबे, राष्ट्रीय महासचिव व प्रदेश प्रभारी ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया
यह पूरी तरह से अनुचित और निंदनीय कार्य है। इस तरह का कार्य मानवीय भावनाओं पर चोट करने और समाज में कटुता और विद्वेष पैदा करने की कोशिश को दर्शाता है। सरकारी की ओर से ऐसा करने वालों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। -पंडित केए दुबे पद्मेश, ज्योतिष मर्मज्ञ
इस तरह का कार्य अक्षम्य है। पेपर सेट करने वाले जानबूझकर समाज में विघटन पैदा करना चाहते हैं। मामले की जांच कर समाज में इस तरह की वैमनस्यता फैलाने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार इसे संज्ञान में ले। -योगेंद्र अवस्थी (लल्लन), अध्यक्ष बार एसोसिएशन
आखिर किस-किस बात को लेकर रोया जाए। एक के बाद एक ऐसे घटनाक्रम में हो रहे हैं, जिससे आमजन आहत है। एक दूसरे को आपस में लड़ाने के नए-नए तरीके खोजे जा रहे हैं, ऐसा सवाल पूछना बेहद निंदनीय है। -अमिताभ वाजपेयी, विधायक समाजवादी पार्टी
ऐसा लगता है कि पेपर बनाने वाले की मानसिकता ठीक नहीं है। इस तरह का कृत्य अपराध की श्रेणी में आएगा। देश भर में जानबूझकर ब्राह्मणों को टारगेट किया जा रहा है, इसकी निंदा करने के साथ कार्रवाई भी होने चाहिए। -नरेश त्रिपाठी पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष
ये सरकारी मशीनरी की बड़ी चूक है। इसके पीछे सरकार की छवि धूमिल करने के षड्यंत्र की आशंका है। यूपीएसआई जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में ऐसे शब्दों का प्रयोग समाज के सभी वर्गों को सोचने पर मजबूर कर देता है। क्या परीक्षा पत्रों को तैयार करते समय संवेदनशीलता का ध्यान नहीं रखा गया। -अभिजीत सिंह सांगा, विधायक