{"_id":"62e4d23d1756f23acb349b34","slug":"up-like-ten-years-ago-bjp-want-mass-base","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP: दस साल पहले जैसे जनाधार की भाजपा को चाहत, कामदगिरी की परिक्रमा कर पार्टी पदाधिकारियों ने प्रचंड जीत मांगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: दस साल पहले जैसे जनाधार की भाजपा को चाहत, कामदगिरी की परिक्रमा कर पार्टी पदाधिकारियों ने प्रचंड जीत मांगी
Sat, 30 Jul 2022 12:10 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर/चित्रकूट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर/चित्रकूट
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 30 Jul 2022 12:10 PM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
चित्रकूट में शुक्रवार से शुरू हुए भाजपा के प्रदेश प्रशिक्षण वर्ग के पहले दिन ही वक्ताओं ने वर्ग में शामिल पदाधिकारियों के सामने आगामी लोकसभा का एजेंडा रखा दिया। साफ-साफ कह दिया कि इस बार पार्टी फिर से दस साल पुराना जनाधार चाहती है। यह भी कहा गया कि 2014 में जिस तरह से नरेंद्र मोदी के चेहरे पर यूपी से 75 सीटों पर जीत हासिल की गई थी, इस बार भी उसी लक्ष्य को हासिल करना है।
विज्ञापन
बताया जा रहा है कि तीन दिन की बैठक में होने वाले 15 सत्रों के बीच 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी की जीत के लिए क्या-क्या रणनीति उस समय अपनाई गई थी, इसका भी जिक्र किया जाएगा इसी तरह प्रशिक्षण वर्ग के अलावा पार्टी की अन्य बैठकों में 10 साल पुराने चुनावी तैयारियों के वीडियो भी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को दिखाए जाने की योजना है।
विज्ञापन
जिससे यह पता चल सके कि उस समय और उसके बाद के लोकसभा चुनाव की तैयारियों में क्या अंतर रहा है। प्रशिक्षण वर्ग में सभी पदाधिकारी इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं कि 2024 में केंद्र की सत्ता में भाजपा फिर से आ रही है। यही वजह है कि पहले दिन की बैठक पूरी होने के बाद सभी वक्ताओं और पदाधिकारियों ने एक साथ शाम के समय कामदगिरी की परिक्रमा किया। परिक्रमा के दौरान भी 2024 के चुनाव पार्टी की प्रचंड जीत के लिए प्रार्थना की गई।
विज्ञापन
इन विषयों को लेकर हुई चर्चा
- एकात्म मानववाद के तहत समाज के अति पिछड़े और सेवा बस्तियों में रहने वालों तक सभी सुविधाएं पहुंचने और शिक्षा, रोजगार से जोड़ना
- कृषि के तहत किसानों को आत्म निर्भर बनाने के लिए उन्हें लघु उद्यमों से जोड़ना, प्राकृतिक खेती पर जोर
- पर्यावरण संरक्षण के तहत बड़ी संख्या में औषधीय पौधे लगाने, नदियों व पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त रखने की दिशा में काम करना