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UP: डमरू आकार का शिवलिंग, यहां पूरी होती है हर मुराद, शिवरात्रि पर उमड़ती है भक्तों की भीड़
Tue, 05 Mar 2024 04:44 PM IST
शिखा पांडेय
अनिल कनौजिया, अमर उजाला, कन्नौज
अनिल कनौजिया, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 05 Mar 2024 04:44 PM IST
सार
शिवाला में डमरू आकार का बड़ा शिवलिंग स्थापित है। इस शिवलिंग के नीचे के भाग में ब्रह्माजी व मध्य में लक्ष्मीजी का हस्त कमल है। ऊपर भगवान भोलेनाथ विराजमान हैं। सफेद नंदी की मूर्ति स्थापित है।
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शिवाला मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कन्नौज जिले में तालग्राम कस्बे स्थित शिवालय का इतिहास 250 वर्ष पुराना है। डमरू आकार का शिवलिंग यहां स्थापित है। सच्चे मन और आस्था से मांगी गई भक्तों की हर मुराद पूरी होती है। यही वजह है कि शिवरात्रि पर जलाभिषेक करने के लिए आसपास ही नहीं, बल्कि दूरदराज से भी भगवान भोलेनाथ के दर पर भक्त मत्था टेकने पहुंचते हैं।
शिवाला मंदिर की देखरेख करने वाले सेवादार सुरेश चंद्र कनौजिया बताते हैं कि खड़उआ परिवार ने इसकी नींव डाली और मंदिर को रूप दिया था। शिवाला में डमरू आकार का बड़ा शिवलिंग स्थापित है। इस शिवलिंग के नीचे के भाग में ब्रह्माजी व मध्य में लक्ष्मीजी का हस्त कमल है। ऊपर भगवान भोलेनाथ विराजमान हैं। सफेद नंदी की मूर्ति स्थापित है। खड़उआ परिवार के बाद कुछ सालों तक लाला दुर्गा शंकर व उनके परिवार ने देखरेख की थी।
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उन्होंने बताया कि लाला जयप्रकाश से मिलकर पुराने जमाने में 50 हजार रुपये से जीर्णोद्धार किया गया था। उनका कहना है कि मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मुराद अवश्य ही पूरी होती है। सेवादार राजेश कुमार भोले व मंगूलाल बताते हैं कि शिवालय असंख्य लोगों की आस्था का प्रतीक है। प्रत्येक सोमवार और महाशिवरात्रि एवं सावन माह में श्रद्धालु मंदिर में जलाभिषेक को आते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि भोलेनाथ भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं। मंदिर की कोई समिति नहीं है। सामूहिक सहयोग से इसकी देखरेख की जाती है।
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शिवाला मंदिर की देखरेख करने वाले सेवादार सुरेश चंद्र कनौजिया बताते हैं कि खड़उआ परिवार ने इसकी नींव डाली और मंदिर को रूप दिया था। शिवाला में डमरू आकार का बड़ा शिवलिंग स्थापित है। इस शिवलिंग के नीचे के भाग में ब्रह्माजी व मध्य में लक्ष्मीजी का हस्त कमल है। ऊपर भगवान भोलेनाथ विराजमान हैं। सफेद नंदी की मूर्ति स्थापित है। खड़उआ परिवार के बाद कुछ सालों तक लाला दुर्गा शंकर व उनके परिवार ने देखरेख की थी।
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उन्होंने बताया कि लाला जयप्रकाश से मिलकर पुराने जमाने में 50 हजार रुपये से जीर्णोद्धार किया गया था। उनका कहना है कि मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मुराद अवश्य ही पूरी होती है। सेवादार राजेश कुमार भोले व मंगूलाल बताते हैं कि शिवालय असंख्य लोगों की आस्था का प्रतीक है। प्रत्येक सोमवार और महाशिवरात्रि एवं सावन माह में श्रद्धालु मंदिर में जलाभिषेक को आते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि भोलेनाथ भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं। मंदिर की कोई समिति नहीं है। सामूहिक सहयोग से इसकी देखरेख की जाती है।