UP Board Results 2025: कोरोना के बाद बदला यूपी बोर्ड का नजरिया, मेधावियों पर बरसे अंक…ये है विशेषज्ञ विश्लेषण
Kanpur News: यूपी बोर्ड द्वारा घोषित 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणामों में काफी बदलाव देखने को मिले हैं। अमर उजाला के लिए विशेषज्ञ शिक्षाविद अमित निरंजन ने विषय, जिलों और विद्यार्थियों के प्रदर्शन का वर्षवार विश्लेषण किया है। पढ़ें रिपोर्ट…
विस्तार
कोरोना महामारी के बाद पहली बार विद्यार्थियों की तैयारियों, विषयों की प्रवृत्ति और परीक्षा पैटर्न में बदलाव सामने आया है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की ओर से जारी परीक्षा परिणामों में इसकी झलक देखने को मिली है। यही कारण है कि मेधावियों छात्रों ने काफी बेहतर अंक पाए हैं। पेश है एक रिपोर्ट…
विषयवार प्रदर्शन
2024 और 2025 में गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में छात्रों ने अच्छा प्रदर्शन किया। खासकर गणित में जहां कुछ छात्रों ने 100% अंक प्राप्त किए, वहीं विज्ञान में भी उच्चतम अंक 99% तक गए। हिंदी और संस्कृत में भी कई जिलों में 95% से ऊपर के अंक देखने को मिले।
छात्र बनाम छात्राएं
2025 में छात्राओं का पास प्रतिशत 93.87% रहा, जबकि छात्रों का 86.66%। यह अंतर स्पष्ट करता है कि लड़कियां लगातार शैक्षणिक क्षेत्र में बढ़त बना रही हैं। 2024 में भी यही रुझान देखने को मिला था।
जिलों के अनुसार परिणाम
सीतापुर, जालौन, बाराबंकी और प्रयागराज जैसे जिले लगातार टॉप पर रहे। कानपुर नगर ने भी 2024 और 2025 दोनों ही वर्षों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया, जहां हाईस्कूल में अनुराग (97.83%) और इंटरमीडिएट में राज यादव (96.33%) जैसे छात्र सामने आए हैं।
कोविड के बाद स्थिर हुई स्थित
कोरोना के बाद 2022 और 2023 में परिणामों में अनिश्चितता देखने को मिली, लेकिन 2024 से स्थिति स्थिर हुई। 2024 और 2025 में न केवल उत्तीर्ण प्रतिशत में सुधार हुआ, बल्कि मूल्यांकन प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी हुई। छात्रों की मानसिकता में स्थिरता लौटी।
विज्ञान की ओर रुझान
छात्रों का झुकाव विज्ञान विषयों की ओर लगातार बढ़ता जा रहा है। मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए विज्ञान विषय प्रमुख रहा। स्कूलों ने भी विज्ञान प्रयोगशालाओं और प्रैक्टिकल पर अधिक जोर दिया।
अंग्रेजी-गणित अभी भी चुनौतीपूर्ण
अग्रेजी और गणित को अभी भी छात्रों ने चुनौतीपूर्ण माना। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में अंग्रेजी में औसत अंक कम रहे, जहां भाषा की समझ और अभिव्यक्ति में कठिनाइयां देखी गईं।
इन विषयों में मिले सर्वाधिक अंक
हिंदी और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में छात्रों ने सर्वाधिक अंक अर्जित किए। इन विषयों में सरल भाषा, पाठ आधारित प्रश्नों और व्याख्यात्मक उत्तरों ने छात्रों को लाभ पहुंचाया।
सामाजिक विज्ञान-संस्कृत स्कोरिंग विषय
सामाजिक विज्ञान और संस्कृत जैसे विषय को छात्रों ने स्कोरिंग माना। इनमें तथ्यों का याद रखना और सरल प्रश्नों का उत्तर देना अपेक्षाकृत आसान रहा।