{"_id":"601320e5231b1047645ac2a0","slug":"up-adm-city-magistrate-and-sdm-issued-arms-license-revealed-in-sit-investigation","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी: एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम ने जारी कर दिए शस्त्र लाइसेंस, एसआईटी की जांच में खुलासा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी: एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम ने जारी कर दिए शस्त्र लाइसेंस, एसआईटी की जांच में खुलासा
Fri, 29 Jan 2021 01:00 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 29 Jan 2021 01:00 PM IST
विज्ञापन
फर्जी शस्त्र लाइसेंस
- फोटो : amar ujala
पिछले कुछ दशकों में कानपुर में शस्त्र लाइसेंस जारी करने में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। सैकड़ों लाइसेंस एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम ने ही जारी कर दिए। एप्रूवल अथॉरिटी में उनके नाम व हस्ताक्षर मिले हैं। यह खुलासा एसआईटी की जांच में हुआ है।
एसआईटी अब तक करीब 20 हजार पत्रावलियां खंगाल चुकी है। शासन के आदेश पर आईपीएस देव रंजन वर्मा के नेतृत्व वाली एसआईटी पांच सदस्यीय टीम जांच कर रही है। 41600 लाइसेंसों की जांच जारी है। एसआईटी सूत्रों के सैकड़ों फाइलें ऐसी पाई गई हैं, जो जिलाधिकारी तक पहुंची ही नहीं।
विज्ञापन
एसआईटी अब तक करीब 20 हजार पत्रावलियां खंगाल चुकी है। शासन के आदेश पर आईपीएस देव रंजन वर्मा के नेतृत्व वाली एसआईटी पांच सदस्यीय टीम जांच कर रही है। 41600 लाइसेंसों की जांच जारी है। एसआईटी सूत्रों के सैकड़ों फाइलें ऐसी पाई गई हैं, जो जिलाधिकारी तक पहुंची ही नहीं।
विज्ञापन
एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम ने स्वीकृति दे दी। एसआईटी पता कर रही है कि क्या इन अफसरों को लाइसेंस स्वीकृति का अधिकार दिया गया था। हां, तो आखिर क्यों। यह खेल पिछले चार दशकों से चल रहा है।
कई में केवल हस्ताक्षर, किस अफसर के पहचान पाना मुश्किल
सूत्रों के अनुसार अभी तक की जांच में अलग-अलग तरह का फर्जीवाड़ा सामने आया है। तमाम ऐसी पत्रावलियां मिली हैं, जिसमें स्वीकृति करने वाले अफसर का नाम व पद नहीं लिखा है। केवल हस्ताक्षर है। इस हस्ताक्षर से पता कर पाना मुश्किल है कि किस अफसर के हैं।
आशंका है कि ऐसे लाइसेंसों में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। ये लाइसेंस फर्जी भी हो सकते हैं। जांच पूरी होने और तथ्य जुटाने के बाद एसआईटी रिपोर्ट शासन को भेजेगी। इसके बाद ही पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ सकेगा।
कई में केवल हस्ताक्षर, किस अफसर के पहचान पाना मुश्किल
सूत्रों के अनुसार अभी तक की जांच में अलग-अलग तरह का फर्जीवाड़ा सामने आया है। तमाम ऐसी पत्रावलियां मिली हैं, जिसमें स्वीकृति करने वाले अफसर का नाम व पद नहीं लिखा है। केवल हस्ताक्षर है। इस हस्ताक्षर से पता कर पाना मुश्किल है कि किस अफसर के हैं।
आशंका है कि ऐसे लाइसेंसों में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। ये लाइसेंस फर्जी भी हो सकते हैं। जांच पूरी होने और तथ्य जुटाने के बाद एसआईटी रिपोर्ट शासन को भेजेगी। इसके बाद ही पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ सकेगा।