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उन्नाव रेप कांड: पीड़िता के चाचा ने सीएम को चार महीने में किए 107 ट्वीट, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 12 Apr 2018 01:09 PM IST
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रेप पीड़िता
- फोटो : ani
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बांगरमऊ विधायक पर आरोप लगाने वाली पीड़िता ने न्याय के लिए माखी थाने के अलावा डीएम, एसपी के साथ मुख्यमंत्री की चौखट के कई चक्कर लगाए। पीड़िता के चाचा ने सोशल मीडिया का भी सहारा लिया।
18 जनवरी 2017 से चार अप्रैल 2018 तक उसके चाचा ने मुख्यमंत्री को 107 ट्वीट किए। हर ट्वीट में उसने न्याय की गुहार लगाई गई। इसके बाद भी सुनवाई नहीं हुई। पीड़िता का आरोप है कि विधायक पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए उसने सबसे पहले माखी थाने में तहरीर दी।
पुलिस ने तहरीर बदलकर मुकदमा दर्ज किया और विधायक का नाम बाहर कर दिया गया। उसने डीएम और एसपी को भी प्रार्थना पत्र दिया। फिर भी सुनवाई नहीं हुई। इस पर उसने मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंच शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से उसे जांच का आश्वाशन मिला, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
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मामला एक ही गांव का होने से उस पर समझौता करने का दबाव भी बनाया गया। पुलिस ने उसे कई बार धमकाया भी, जिसकी शिकायत पीड़िता के चाचा ने ट्विटर के माध्यम से मुख्यमंत्री से की थी। भतीजी को न्याय दिलाने के लिए चाचा ने सोशल मीडिया का सहारा लिया।
18 जनवरी 2017 को सबसे पहला ट्वीट किया था, जिसमें भाजपा विधायक पर दुष्कर्म करने और मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी मुकदमा न लिखने का जिक्र था। 18 जनवरी से ट्वीट का शुरू हुआ सिलसिला चार अप्रैल 2018 तक जारी रहा।
पीड़िता के चाचा ने भाई के साथ हुई मारपीट से संबधित भी एक ट्वीट मुख्यमंत्री को की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। हालांकि अब मामले ने तूल पकड़ने पर सरकार हर स्तर पर जांच करा रही है।
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18 जनवरी 2017 से चार अप्रैल 2018 तक उसके चाचा ने मुख्यमंत्री को 107 ट्वीट किए। हर ट्वीट में उसने न्याय की गुहार लगाई गई। इसके बाद भी सुनवाई नहीं हुई। पीड़िता का आरोप है कि विधायक पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए उसने सबसे पहले माखी थाने में तहरीर दी।
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पुलिस ने तहरीर बदलकर मुकदमा दर्ज किया और विधायक का नाम बाहर कर दिया गया। उसने डीएम और एसपी को भी प्रार्थना पत्र दिया। फिर भी सुनवाई नहीं हुई। इस पर उसने मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंच शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से उसे जांच का आश्वाशन मिला, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
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मामला एक ही गांव का होने से उस पर समझौता करने का दबाव भी बनाया गया। पुलिस ने उसे कई बार धमकाया भी, जिसकी शिकायत पीड़िता के चाचा ने ट्विटर के माध्यम से मुख्यमंत्री से की थी। भतीजी को न्याय दिलाने के लिए चाचा ने सोशल मीडिया का सहारा लिया।
18 जनवरी 2017 को सबसे पहला ट्वीट किया था, जिसमें भाजपा विधायक पर दुष्कर्म करने और मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी मुकदमा न लिखने का जिक्र था। 18 जनवरी से ट्वीट का शुरू हुआ सिलसिला चार अप्रैल 2018 तक जारी रहा।
पीड़िता के चाचा ने भाई के साथ हुई मारपीट से संबधित भी एक ट्वीट मुख्यमंत्री को की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। हालांकि अब मामले ने तूल पकड़ने पर सरकार हर स्तर पर जांच करा रही है।
प्रधानमंत्री कार्यालय से मिला था सुरक्षा का भरोसा
भाजपा विधायक पर आरोप लगाने वाली युवती ने छह माह पहले खुद को और परिजनों को जान का खतरा बताते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा। पत्र का संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय और तत्कालीन जिलाधिकारी को उचित कार्रवाई के निर्देश दिए।
सके बाद भी परिवार को सुरक्षा नहीं दिलाई गई। इस बीच पीड़िता के पिता की पिटाई से मौत हो गई। पीड़िता के पत्र पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यकारी सचिव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पीड़ित परिवार को मदद दिलाने को कहा गया था।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने उन्नाव जिलाधिकारी को पत्र भेजकर कार्रवाई के निर्देश दिए। हालांकि मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस बीच पीड़िता और विधायक परिवार के बीच तनाव बढ़ता ही चला गया। पीड़िता के पिता पर मांखी थाने में कई मुकदमे लिखे गए।
सके बाद भी परिवार को सुरक्षा नहीं दिलाई गई। इस बीच पीड़िता के पिता की पिटाई से मौत हो गई। पीड़िता के पत्र पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यकारी सचिव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पीड़ित परिवार को मदद दिलाने को कहा गया था।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने उन्नाव जिलाधिकारी को पत्र भेजकर कार्रवाई के निर्देश दिए। हालांकि मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस बीच पीड़िता और विधायक परिवार के बीच तनाव बढ़ता ही चला गया। पीड़िता के पिता पर मांखी थाने में कई मुकदमे लिखे गए।
पीड़िता पर भी लगाए आरोप
बांगरमऊ विधायक पर आरोप लगाने वाली किशोरी को भी कटघरे में खड़ा करने की कोशिशें तेज हो ई हैं। बुधवार सुबह विधायक के गांव की ही एक महिला ने मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंच पीड़िता पर बेटे को जबरन दुष्कर्म के मामले में फंसाने का आरोप लगाया।
महिला का कहना है कि उसका पति सेना में नौकरी करता है। युवती ने उसके बेटे पर दुष्कर्म का झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। अब वही विधायक को झूठे मामले में फंसाने का प्रयास कर रही है। महिला ने यह भी बताया कि युवती उसके बेटे के साथ जबरन शादी करने का दबाव उसके परिवार पर डाल रही थी।
महिला का कहना है कि उसका पति सेना में नौकरी करता है। युवती ने उसके बेटे पर दुष्कर्म का झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। अब वही विधायक को झूठे मामले में फंसाने का प्रयास कर रही है। महिला ने यह भी बताया कि युवती उसके बेटे के साथ जबरन शादी करने का दबाव उसके परिवार पर डाल रही थी।
उन्नाव मामला डराने वाला, निष्पक्ष जांच हो : एमनेस्टी
वैश्विक मानवाधिकार समूह एमनेस्टी ने कहा कि यूपी के उन्नाव का गैंगरेप मामला काफी डराने वाली तस्वीर पेश कर रहा है। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस मामले में कथित तौर पर सत्ताधारी दल के विधायक पर आरोप हैं। साथ ही पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत भी हो चुकी है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया की कार्यक्रम निदेशक अस्मिता बासु ने योगी आदित्यनाथ सरकार से इस संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के नोटिस का जवाब देने की अपील की है। साथ ही कहा कि प्रदेश सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दोषियों को कानून के घेरे में लाया जाए।
एमनेस्टी को ओर से जारी बयान के अनुसार, आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज करने में उत्तर प्रदेश पुलिस कथित विफलता, दुष्कर्म पीड़िता और उसके परिवार की प्रताड़ना और पुलिस हिरासत में उसके पिता की मौत एक दिल दहलाने वाली तस्वीर पेश कर रही है।
उन्होंने कहा, इसकी तुरंत, निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और अधिकारियों को पीड़िता व उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाने चाहिए ताकि उन पर आगे अत्याचार न हो। एनएचआरसी ने मंगलवार को यूपी सरकार को नोटिस भेजा था। इस मामले में सूबे के पुलिस प्रमुख से विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा था।
एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया की कार्यक्रम निदेशक अस्मिता बासु ने योगी आदित्यनाथ सरकार से इस संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के नोटिस का जवाब देने की अपील की है। साथ ही कहा कि प्रदेश सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दोषियों को कानून के घेरे में लाया जाए।
एमनेस्टी को ओर से जारी बयान के अनुसार, आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज करने में उत्तर प्रदेश पुलिस कथित विफलता, दुष्कर्म पीड़िता और उसके परिवार की प्रताड़ना और पुलिस हिरासत में उसके पिता की मौत एक दिल दहलाने वाली तस्वीर पेश कर रही है।
उन्होंने कहा, इसकी तुरंत, निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और अधिकारियों को पीड़िता व उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाने चाहिए ताकि उन पर आगे अत्याचार न हो। एनएचआरसी ने मंगलवार को यूपी सरकार को नोटिस भेजा था। इस मामले में सूबे के पुलिस प्रमुख से विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा था।