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14 सितंबर तक मजार की बाउंड्री गिराने का दिया अल्टीमेटम
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सलाट गांव में मजार का निरीक्षण करते डीएफओ
- फोटो : MAHOBA
14 सितंबर तक मजार की बाउंड्री गिराने का दिया अल्टीमेटम
-बिरयानी मामले में डीएफओ ने किया मजार व बाउंड्री का निरीक्षण
-जांच के बाद ध्वस्त कराई जाएगी मजार की बाउंड्री
अमर उजाला ब्यूरो
महोबा। सालट गांव में बिरयानी खाने के बाद मच रहे बवाल के बाद रविवार को प्रभागीय वनाधिकारी रामजी राय ने गांव पहुंचकर मजार और बाउंड्री का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वन विभाग की जमीन में बाउंड्री पाई गई। डीएफओ के आदेश पर वन क्षेत्रधिकारी चरखारी ने नोटिस जारी कर 14 सितंबर तक मजार की बाउंड्री गिराने के आदेश दिए हैं। बाउंड्री न हटाए जाने पर विभाग बाउंड्री को ध्वस्त कर निर्माणकर्ता के खिलाफ कार्रवाई करेगा।
डीएफओ ने बताया कि जांच दौरान पता चला है कि दो साल पहले मजार की बाउंड्री बनाई गई है लेकिन मजार काफी पुराना है। बाउंड्री वन विभाग की भूमि पर बनाई गई है। इसकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। दो साल पहले बनाई गई बाउंड्री अतिक्रमण की श्रेणी में आती है। ग्रामीणों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि बाउंड्री करीब दो साल पहले ही बनाई गई लेकिन मजार बहुत पुराना है। मजार कब बना इसकी जानकारी भी ग्रामीण नहीं दे पाए।
उर्स के मौके पर एक समुदाय को बिरयानी खिलाने के बाद चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 43 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए थे। विधायक के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज किया गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद दोनों समुदाय के लोग एकसाथ आ गए हैं। मजार से 300 मीटर की दूरी पर वन विभाग की पौधशाला बनी हुई है। जिससे यह स्पष्ट होता है कि बाउंड्री वन विभाग की जमीन पर बनी है।
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इंसेट
मजार कब बनी किसी को पता नहीं
ग्रामीण छुन्ना और राजकुुमार कहते हैं कि मजार बहुत पुरानी है। उनके माता-पिता ने भी बचपन से मजार बनी देखी है। ग्रामीणों को यह जानकारी नहीं है कि बाबा कौन थे। करीब छह साल पहले से मजार पर उर्स कार्यक्रम होने के बाद लोगों की आस्था ज्यादा बढ़ गई है और हर साल उर्स में खर्च होने वाले पैसों के लिए ग्रामीण भी चंदा करके उर्स का इंतजाम करते हैं।
इंसेट
14 सितंबर तक बाउंड्री गिराने के निर्देश
चरखारी। ग्राम सालट में वन विभाग की भूमि में मजार की बाउंड्री बनाने पर वन क्षेत्राधिकारी चरखारी ने उर्स कार्यक्रम के आयोजक कल्लू पुत्र पीर मोहम्मद को नोटिस जारी कर अवैध रूप से बनाई बाउंड्री को 14 सितंबर तक गिरा ले अन्यथा कि स्थिति में उनके विरुद्घ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
इंसेट
वन विभाग ने मजार की बाउंड्री गिराने का आदेश दिया है जबकि मजार भी वन विभाग की जमीन पर बना है। विभाग के इस फैसले से संतुष्ट नहीं हूं। लेखपालों द्वारा जमीन का पूरा विवरण निकलवाया जाएगा। अगर मजार बहुत पुराना है तो वन विभाग के दस्तावेजों में दर्ज होगा। मजार की समिति के पास उसके साक्ष्य अवश्य होंगे। वन विभाग के अधिकारियों से भी इस संदर्भ में बात करेेंगे।
बृजभूषण राजपूत
विधायक, चरखारी
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-बिरयानी मामले में डीएफओ ने किया मजार व बाउंड्री का निरीक्षण
-जांच के बाद ध्वस्त कराई जाएगी मजार की बाउंड्री
अमर उजाला ब्यूरो
महोबा। सालट गांव में बिरयानी खाने के बाद मच रहे बवाल के बाद रविवार को प्रभागीय वनाधिकारी रामजी राय ने गांव पहुंचकर मजार और बाउंड्री का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वन विभाग की जमीन में बाउंड्री पाई गई। डीएफओ के आदेश पर वन क्षेत्रधिकारी चरखारी ने नोटिस जारी कर 14 सितंबर तक मजार की बाउंड्री गिराने के आदेश दिए हैं। बाउंड्री न हटाए जाने पर विभाग बाउंड्री को ध्वस्त कर निर्माणकर्ता के खिलाफ कार्रवाई करेगा।
डीएफओ ने बताया कि जांच दौरान पता चला है कि दो साल पहले मजार की बाउंड्री बनाई गई है लेकिन मजार काफी पुराना है। बाउंड्री वन विभाग की भूमि पर बनाई गई है। इसकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। दो साल पहले बनाई गई बाउंड्री अतिक्रमण की श्रेणी में आती है। ग्रामीणों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि बाउंड्री करीब दो साल पहले ही बनाई गई लेकिन मजार बहुत पुराना है। मजार कब बना इसकी जानकारी भी ग्रामीण नहीं दे पाए।
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उर्स के मौके पर एक समुदाय को बिरयानी खिलाने के बाद चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 43 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए थे। विधायक के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज किया गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद दोनों समुदाय के लोग एकसाथ आ गए हैं। मजार से 300 मीटर की दूरी पर वन विभाग की पौधशाला बनी हुई है। जिससे यह स्पष्ट होता है कि बाउंड्री वन विभाग की जमीन पर बनी है।
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मजार कब बनी किसी को पता नहीं
ग्रामीण छुन्ना और राजकुुमार कहते हैं कि मजार बहुत पुरानी है। उनके माता-पिता ने भी बचपन से मजार बनी देखी है। ग्रामीणों को यह जानकारी नहीं है कि बाबा कौन थे। करीब छह साल पहले से मजार पर उर्स कार्यक्रम होने के बाद लोगों की आस्था ज्यादा बढ़ गई है और हर साल उर्स में खर्च होने वाले पैसों के लिए ग्रामीण भी चंदा करके उर्स का इंतजाम करते हैं।
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14 सितंबर तक बाउंड्री गिराने के निर्देश
चरखारी। ग्राम सालट में वन विभाग की भूमि में मजार की बाउंड्री बनाने पर वन क्षेत्राधिकारी चरखारी ने उर्स कार्यक्रम के आयोजक कल्लू पुत्र पीर मोहम्मद को नोटिस जारी कर अवैध रूप से बनाई बाउंड्री को 14 सितंबर तक गिरा ले अन्यथा कि स्थिति में उनके विरुद्घ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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वन विभाग ने मजार की बाउंड्री गिराने का आदेश दिया है जबकि मजार भी वन विभाग की जमीन पर बना है। विभाग के इस फैसले से संतुष्ट नहीं हूं। लेखपालों द्वारा जमीन का पूरा विवरण निकलवाया जाएगा। अगर मजार बहुत पुराना है तो वन विभाग के दस्तावेजों में दर्ज होगा। मजार की समिति के पास उसके साक्ष्य अवश्य होंगे। वन विभाग के अधिकारियों से भी इस संदर्भ में बात करेेंगे।
बृजभूषण राजपूत
विधायक, चरखारी