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कानपुर: ऑनलाइन फर्जी फर्म खोल ठगने वाले दो गिरफ्तार, दोनों शातिरों का हाथ गुरुग्राम में हुई चार करोड़ की ठगी में भी था
Sat, 14 Aug 2021 10:51 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 14 Aug 2021 10:51 PM IST
सार
डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि एफआईआर दर्ज कराने वाले दीपक गुप्ता कैरेबियन ओवर सीज कंपनी के डायरेक्टर हैं। उन्होंने एलईडी व अन्य उपकरणों की खरीद के लिए इंडिया मार्ट नाम की वेबसाइट पर सर्च किया था।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
क्राइम ब्रांच ने वेबसाइट पर फर्जी फर्म खोलकर सस्ते इलेक्ट्रॉनिक आइटम बेचने के नाम पर ठगने वाले गैंग के दो गुर्गों को पकड़ा है। इन्होंने 26 जुलाई को स्वरूप नगर निवासी दीपक गुप्ता से 28 हजार रुपये की ठगी की थी। कुछ माह पहले गुरुग्राम में हुई चार करोड़ की ठगी में भी ये दोनों नामजद हैं।
डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि एफआईआर दर्ज कराने वाले दीपक गुप्ता कैरेबियन ओवर सीज कंपनी के डायरेक्टर हैं। उन्होंने एलईडी व अन्य उपकरणों की खरीद के लिए इंडिया मार्ट नाम की वेबसाइट पर सर्च किया था। वेबसाइट ने उपकरणों की खरीद के लिए कई सारे कंपनियों के नंबर व नाम उन्हें दिखाए।
एक ही ब्रांड का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण विशटेल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में सबसे कम दाम पर मिलने पर उन्होंने दिए नंबर पर संपर्क किया। ठगों ने उनसे कंपनी के बताए हुए खातों में दो बार में कुल 27,456 रुपये ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद उन्हें ठगी का पता चला।
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डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि एफआईआर दर्ज कराने वाले दीपक गुप्ता कैरेबियन ओवर सीज कंपनी के डायरेक्टर हैं। उन्होंने एलईडी व अन्य उपकरणों की खरीद के लिए इंडिया मार्ट नाम की वेबसाइट पर सर्च किया था। वेबसाइट ने उपकरणों की खरीद के लिए कई सारे कंपनियों के नंबर व नाम उन्हें दिखाए।
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एक ही ब्रांड का इलेक्ट्रॉनिक उपकरण विशटेल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में सबसे कम दाम पर मिलने पर उन्होंने दिए नंबर पर संपर्क किया। ठगों ने उनसे कंपनी के बताए हुए खातों में दो बार में कुल 27,456 रुपये ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद उन्हें ठगी का पता चला।
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क्राइम ब्रांच ने इन खातों की पड़ताल की तो वो मूलरूप से कुशीनगर निवासी विकास कुमार श्रीवास्तव व मूलरूप से प्रतापगढ़ निवासी पंकज पाल के नाम पर निकले। दोनों ही वर्तमान में नोएडा में रहकर लोगों को अभी भी चूना लगा रहे थे। क्राइम ब्रांच ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। खुलासा करने वाली टीम को प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
कम पढ़े लिखे होने के बाद भी ठगने में माहिर
गिरफ्तार पंकज पाल के पिता अरविंद पाल नोएडा विकास प्राधिकरण में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। उसने इंटर तक पढ़ाई की है। जबकि, विकास कुमार हाईस्कूल तक पढ़ा है। उसके पिता प्राइवेट नौकरी करते हैं। कम पढ़े लिखे होने के बाद भी दोनों लोगों को ठगने में माहिर हैं।
कम पढ़े लिखे होने के बाद भी ठगने में माहिर
गिरफ्तार पंकज पाल के पिता अरविंद पाल नोएडा विकास प्राधिकरण में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। उसने इंटर तक पढ़ाई की है। जबकि, विकास कुमार हाईस्कूल तक पढ़ा है। उसके पिता प्राइवेट नौकरी करते हैं। कम पढ़े लिखे होने के बाद भी दोनों लोगों को ठगने में माहिर हैं।
गुरुग्राम में चार करोड़ की ठगी में शामिल
डीसीपी क्राइम ने पड़ताल कर बताया कि दोनों ने गुरुग्राम में सेकेंड हैंड कार बेचने वाले विवेक राठी ( कार पवेलियन प्राइवेट लिमिटेड) से चार करोड़ की ठगी की थी। गुरुग्राम पुलिस ने उनके तीन साथियों में नोएडा निवासी अंकित सिंह, दिल्ली निवासी शिवम सिंह व सालारपुर नोएडा निवासी अमरजीत उर्फ अमर को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पंकज और विकास के विषय में जानकारी जुटाने के लिए क्राइम ब्रांच ने गुरुग्राम जेल में जाकर पकड़े गए शातिरों से भी पूछताछ की थी।
किराये पर लेते थे खाता तो खुद के खातों में क्यों डलवाई रकम ?
डीसीपी क्राइम ने बताया कि शातिरों ने पूछताछ में बताया कि लोगों से पैसा मंगाने के लिए वो खातों को पांच से 10 परसेंट किराये पर लेते थे। खाताधारक से एटीएम कार्ड लेकर उसका पासवर्ड बदल देते थे। ऐसे में सवाल इस बात का उठता है कि स्वरूप नगर में दीपक गुप्ता से उन्होंने रकम अपने खातों में क्यों ट्रांसफर करवाई। शातिर होने के बाद भी उनकी इतनी बड़ी चूक किसी के गले न उतरने वाली है। वहीं, गिरफ्तार किए गए पंकज और विकास ने बताया कि उन्होंने खुद अंकित को पांच प्रतिशत कमीशन पर दिया था।
डीसीपी क्राइम ने पड़ताल कर बताया कि दोनों ने गुरुग्राम में सेकेंड हैंड कार बेचने वाले विवेक राठी ( कार पवेलियन प्राइवेट लिमिटेड) से चार करोड़ की ठगी की थी। गुरुग्राम पुलिस ने उनके तीन साथियों में नोएडा निवासी अंकित सिंह, दिल्ली निवासी शिवम सिंह व सालारपुर नोएडा निवासी अमरजीत उर्फ अमर को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पंकज और विकास के विषय में जानकारी जुटाने के लिए क्राइम ब्रांच ने गुरुग्राम जेल में जाकर पकड़े गए शातिरों से भी पूछताछ की थी।
किराये पर लेते थे खाता तो खुद के खातों में क्यों डलवाई रकम ?
डीसीपी क्राइम ने बताया कि शातिरों ने पूछताछ में बताया कि लोगों से पैसा मंगाने के लिए वो खातों को पांच से 10 परसेंट किराये पर लेते थे। खाताधारक से एटीएम कार्ड लेकर उसका पासवर्ड बदल देते थे। ऐसे में सवाल इस बात का उठता है कि स्वरूप नगर में दीपक गुप्ता से उन्होंने रकम अपने खातों में क्यों ट्रांसफर करवाई। शातिर होने के बाद भी उनकी इतनी बड़ी चूक किसी के गले न उतरने वाली है। वहीं, गिरफ्तार किए गए पंकज और विकास ने बताया कि उन्होंने खुद अंकित को पांच प्रतिशत कमीशन पर दिया था।