Triple murder case: तीन को मारा, पुलिस नहीं ढूंढ पाई हत्यारा, सभी बरी
Jalaun News: मामले में पुलिस ने जांच के लिए आलाकत्ल देर से भेजा था। फॉरेंसिक रिपोर्ट में सूख खून गया था।
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तिहरे हत्याकांड की गुत्थी नौ साल बाद भी अनसुलझी है। इसकी वजह कहीं न कहीं पुलिस की लापरवाही और गड़बड़ जांच रिपोर्ट है। पुलिस की पूछताछ में दोनों आरोपियों ने जुर्म स्वीकार कर लिया आलाकत्ल भी बरामद करवा दिया। इसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने में देर कर दी गई। तीन लोगों की हत्या जैसा गंभीर मामला होने के बाद भी पुलिस साल भर तक वादी की गवाही ही नहीं करा पाई। गवाहों की कमी सुबूत न जुटा पाने का नतीजा यह हुआ कि दो आरोपी बृहस्पतिवार को कोर्ट से बरी हो गए। इन्हें सिर्फ सुबूत मिटाने व लूट का माल बरामद मिलने के आरोप में दोषी पाते हुए तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई। सजा यह अवधि वह पहले ही जेल में काट चुके हैं।
झांसी जिले के मोहल्ला खंडेराव गेट नंबर-2 निवासी बबलू ने शहर कोतवाली के मोहल्ला विजय नगर निवासी बहन अभिलाषा तिवारी व बहनोई सुरेंद्र तिवारी व भांजे कार्तिक की हत्या की रिपोर्ट 21 नवंबर 2016 दर्ज कराई थी। इसमें भांजे की बहू नेहा, ससुरालीजन अंजनी, ससुर ओमबाबू व एक अन्य को आरोपी बनाया था। आरोप था कि इन लोगों ने मिलकर उनकी बहन, बहनोई और भांजे की कुल्हाड़ी व हंसिया से हत्या कर दी व रुपये लूट लिए।
पुलिस की जांच में नेहा, अंजनी, ओमबाबू व एक अन्य के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। इस पर पुलिस ने विवेचना से उनका नाम हटा दिया। वहीं, विवेचना के दौरान ग्वालियर निवासी सोनू यादव व बृजेश पटेल के नाम सामने आए थे। पुलिस ने इन दोनों आरोपियों को पकड़कर जेल भेज दिया।
आरोपियों के पास से पुलिस ने आलाकत्ल व लूट के रुपये भी बरामद कर लिए थे। पुलिस ने इन दोनों के खिलाफ 27 जून 2017 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। कोर्ट में ट्रायल शुरू हुआ तो पुलिस ने एक भी चश्मदीद गवाह नहीं पेश कर सकी। ट्रायल के दौरान ही वादी बबलू की मौत हो गई। कोर्ट में उसके बयान भी नहीं कराए गए।
ट्रायल के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने भी पुलिस की कार्रवाई और कमियों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दलील दी थी कि पुलिस ने वारदात के दौरान पंचनामा कोतवाली में ही तैयार कर लिया। आलाकत्ल बरामद होने के बाद उसे देर से फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा। यही नहीं नौ साल चले ट्रायल के दौरान पुलिस फिंगर प्रिंट की रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल नहीं कर सकी।
गुरुवार को विशेष न्यायाधीश (डकैती कोर्ट) डॉ. अवनीश कुमार ने फाइल का अवलोकन कर दोनों अधिवक्ताओं की बहस व गवाहों व साक्ष्यों के आधार पर हत्या व लूट में ब्रजेश व सोनू को दोष मुक्त करार दिया। दोनों को घटना में सबूत मिटाने व लूट का माल बरामद करने का दोषी पाते हुए तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई। सजा की यह अवधि दोनों आरोपी पहले ही जेल में काट चुके थे इसलिए इन्हें बृहस्पतिवार को बरी कर दिया गया। तीन लोगों के हत्यारों को न पकड़ पाने पर पुलिस की जांच पर सवाल उठ रहे हैं। एक आरोपी सोनू 2024 से जमानत पर है जबकि दूसरा अब तक जेल में था।