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ब्लू व्हेल गेम का चक्रव्यूहः लिंक शेयर करने का टास्क सबसे खतरनाक, टीचर की सजगता से बची एक जान

Mon, 11 Sep 2017 10:18 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Mon, 11 Sep 2017 10:18 AM IST
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trap of Blue Whale Game true story of kanpur student
टीचर जिसने सुसाइड नोट लिखने वाले छात्र को पकड़ा, पीली शर्ट में सुसाइड नोट लिखने वाला छात्र - फोटो : अमर उजाला
देश-विदेश में चर्चा का विषय बने ब्लू व्हेल गेम का चक्रव्यूह ऐसा है कि लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। दरअसल इस खेल को खेलने वाले सबसे ज्यादा उस उम्र के युवा और बच्चे हैं जिन्हें अच्छे-बुरे की समझ नहीं है।
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लोगों की भावनाओं से खेलकर उन्हें मौत के द्वार तक पहुंचाने वाला ये खेल देश में तो बैन है लेकिन अभी भी अलग-अलग नामों से ये खेल कई लोग खेल रहे हैं। उन्हें पता भी नहीं है कि जिस खेल को पूरा करने के लिए हर दिन बड़ी से बड़ी चुनौतियां पूरी करने की जिद में वो अपनी मौत को दावत दे रहे हैं। 
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कानपुर बर्रा में एक शिक्षक की सजगता से ब्लू व्हेल गेम के चक्रव्यूह में फंसे 11वीं के छात्र सुशील कुमार कनौजिया को तो बचा लिया गया लेकिन अभी दर्जनों छात्र इसके चंगुल में फंसे हुए हैं। इसका खुलासा खुद सुशील ने किया है। सुशील के मुताबिक उसके स्कूल और कोचिंग के कई छात्र इस गेम को खेल रहे हैं। दोनों ही जगह बस इसी गेम के बारे में चर्चा होती है।
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उसने बताया कि उसे भी साथी छात्र ने ही इस गेम को खेलने के लिए उकसाया था और उसे लिंक भी भेजा था। छात्र के इस खुलासे से स्कूल के साथ ही कोचिंग के शिक्षकों के भी होश उड़ गए हैं। बच्चों को गेम से दूर रखने के लिए परिजनों से संपर्क करने में जुट गए हैं। 
 

शिक्षक ने पकड़ लिया था सुसाइड नोट

trap of Blue Whale Game true story of kanpur student
सुशील का दोस्त उत्कर्ष
कानपुर जरौली में रहने वाला सुशील सिंचाई विभाग के कर्मचारी हरि नारायण का बेटा है। सुशील तीन भाई और एक बहन में तीसरे नंबर का है। वह जरौली स्थित सरदार पटेल इंटर कॉलेज में 11वीं का छात्र है और मोहल्ले की ही एक कोचिंग में पढ़ता है। गेम के टास्क के तहत स्कूल में बैठकर सुसाइड नोट लिखे जाने के दौरान एक शिक्षक ने इसे पकड़ लिया था।

परिजनों के मुताबिक सुशील के पास एंड्रायड फोन नहीं है लेकिन स्कूल और कोचिंग के दोस्तों से इस गेम के बारे में इतना सुन चुका था कि उसने घर में ट्यूशन पढ़ाने आने वाले शिक्षक अतुल के मोबाइल पर गेम को डाउनलोड कर खेलने लगा था। इसके बाद वह कोचिंग में पढ़ने वाले एक दोस्त के मोबाइल पर गेम खेल रहा था। परिजन अब सुशील की काउंसलिंग करा रहे हैं। सुशील का कहना है कि वह अब बेहतर महसूस कर रहा है। वह दोबारा इस गेम नहीं खेलेगा।


 

छात्र ही एक दूसरे को गेम खेलने के लिए उकसा रहे है

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सुसाइड नोट लिखने वाले छात्र के घरवाले
सुशील के मुताबिक यह गेम स्कूल के हर छात्र की जुबान पर है। वे एक दूसरे को गेम खेलने के लिए उकसाते हैं। सुशील के मुताबिक स्कूल में तो मोबाइल पर प्रतिबंध है। इसलिए छात्र-छात्राएं कोचिंग में मोबाइल लेकर आते हैं। वे कोचिंग पढ़ने के बाद पार्क या अन्य किसी शांत जगह पर बैठकर गेम खेलते हैं। इनको देखकर ही वह भी इस गेम को खेलने लगा। 
 

लिंक को शेयर करने का भी टास्क 

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छात्र सुशील जिसने लिखा था सुसाइड नोट
पहले यह गेम प्ले स्टोर में उपलब्ध था लेकिन अब हटा दिया गया है। अब यह लिंक से खोला जा रहा है। इस गेम में एक बार यह भी टास्क है कि गेम के लिंक को साथियों को शेयर करें। इस तरह यह गेम छात्र-छात्राओं के मोबाइल पर पहुंच रहा है।
 

सीसीटीवी कैमरों से छात्रों पर नजर रखी जा रही

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डेमो पिक
सरदार पटेल स्कूल के प्रबंधक अरुण पटेल के मुताबिक छात्र-छात्राओं के स्कूल में मोबाइल लाने पर प्रतिबंध है। इसका सख्ती से पालन हो, इसलिए क्लास में सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए गए हैं। इससे बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। 
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