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पितरों के ऋण से मुक्ति पाने का आज विशेष योग
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कानपुर देहात। सर्व पितृ अमावस्या पर इस बार ग्रह नक्षत्रों का गज्जछाया शुभ योग बन रहा है। इसे पितरों के श्राद्ध व तर्पण के लिए बेहद अच्छा माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में श्राद्ध या तर्पण करने पर पितर अति प्रसन्न होते हैं। बुधवार को सूर्य और चंद्रमा शाम 4 बजकर 34 मिनट तक हस्त नक्षत्र में रहेंगे। अब ये योग दोबारा आठ साल बाद 2029 में बनेगा।
जिला पौरोहित्य प्रशिक्षक आचार्य दुर्गेश द्विवेदी ने बताया कि गज्जछाया योग में श्राद्ध या तर्पण करने से पितर खूब आशीर्वाद देते हैं। सूर्य की सहस्त्र किरणों में से जो सबसे प्रमुख है उसका नाम अमा है। उस अमा नामक प्रधान किरण के तेज से सूर्य त्रिलोक को प्रकाशित करते हैं। उसी अमा में सर्व पितृ अमावस्या पर चंद्रदेव निवास (वस्य) करते हैं। इसलिए इसे अमावस्या कहते हैं। इसमें पितरों को विदा करने का विशेष फल मिलता है।
अमावस्या पर श्राद्ध जरूरी
जो व्यक्ति अपने पितरों (पूर्वजों) के देहांत की तिथि के अनुसार श्राद्धकर्म नहीं कर पाए हैं। वह इस अमावस्या तिथि को पितरों के निर्मित पिंडदान, तर्पण व श्राद्धकर्म कर सकते हैं।
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ऐसे करें पितरों की विदाई
अमावस्या के दिन विशेष तर्पण एवं भोज्य पदार्थों को ग्रहण करते हुए अपने वंशजों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद देते हुए पितृ लोक प्रस्थान करेंगे। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान सभी पितर वायु रूप में धरती पर आते हैं। पितरों को अमावस्या के दिन विदाई दी जाती है और वे अपने लोक चले जाते हैं। पुराणों में कहा गया है कि अश्विन महीने की अमावस्या पर पितृ पिंडदान व तिलांजलि चाहते हैं। यदि उन्हें यह नहीं मिलता है तो वे अतृप्त होकर ही चले जाते हैं।
पांच तरह की मिठाई से करें पीपल की पूजा
पितृ अमावस्या पर पीपल के पत्तों पर पांच तरह की मिठाई रखकर पीपल की पूजा करें। पितरों से प्रार्थना करें कि वह हमेशा आप पर आशीर्वाद बनाए रखें। पितर संतुष्ट होकर अपने लोक जाएंगे तो आप सुखमय रहेंगे। ऐसी मान्यता है कि मिठाई रखकर पीपल की पूजा से पितृ प्रसन्न होते हैं।
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जिला पौरोहित्य प्रशिक्षक आचार्य दुर्गेश द्विवेदी ने बताया कि गज्जछाया योग में श्राद्ध या तर्पण करने से पितर खूब आशीर्वाद देते हैं। सूर्य की सहस्त्र किरणों में से जो सबसे प्रमुख है उसका नाम अमा है। उस अमा नामक प्रधान किरण के तेज से सूर्य त्रिलोक को प्रकाशित करते हैं। उसी अमा में सर्व पितृ अमावस्या पर चंद्रदेव निवास (वस्य) करते हैं। इसलिए इसे अमावस्या कहते हैं। इसमें पितरों को विदा करने का विशेष फल मिलता है।
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अमावस्या पर श्राद्ध जरूरी
जो व्यक्ति अपने पितरों (पूर्वजों) के देहांत की तिथि के अनुसार श्राद्धकर्म नहीं कर पाए हैं। वह इस अमावस्या तिथि को पितरों के निर्मित पिंडदान, तर्पण व श्राद्धकर्म कर सकते हैं।
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ऐसे करें पितरों की विदाई
अमावस्या के दिन विशेष तर्पण एवं भोज्य पदार्थों को ग्रहण करते हुए अपने वंशजों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद देते हुए पितृ लोक प्रस्थान करेंगे। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान सभी पितर वायु रूप में धरती पर आते हैं। पितरों को अमावस्या के दिन विदाई दी जाती है और वे अपने लोक चले जाते हैं। पुराणों में कहा गया है कि अश्विन महीने की अमावस्या पर पितृ पिंडदान व तिलांजलि चाहते हैं। यदि उन्हें यह नहीं मिलता है तो वे अतृप्त होकर ही चले जाते हैं।
पांच तरह की मिठाई से करें पीपल की पूजा
पितृ अमावस्या पर पीपल के पत्तों पर पांच तरह की मिठाई रखकर पीपल की पूजा करें। पितरों से प्रार्थना करें कि वह हमेशा आप पर आशीर्वाद बनाए रखें। पितर संतुष्ट होकर अपने लोक जाएंगे तो आप सुखमय रहेंगे। ऐसी मान्यता है कि मिठाई रखकर पीपल की पूजा से पितृ प्रसन्न होते हैं।