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यहां मौजूद है हजारों साल पुरानी मानव सभ्यता, पुरातत्व की टीम ने फिर खंगाले राज
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 04 Oct 2017 11:08 AM IST
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चित्रकूट में मौजूद पुरातत्व विभाग की टीम
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की तपोस्थली चित्रकूट की पावन धरती भारत के मानचित्र पर धार्मिक केंद्र के रूप में तो प्रसिद्द ही थी लेकिन अब बड़े पुरातात्विक स्थलों के रूप में भी स्थान बनाने जा रही है । इसका सबूत है चित्रकूट की धरती पर भारतीय पुरातत्व विभाग के लगातार तीन दौरे, जो आने वाले समय में निःसन्देह चित्रकूट के लिए ऐतिहासिक होंगे ।
पुरातत्व विभाग की टीम चित्रकूट पहुंची। यहां के सरहट और उसके आस पास मौजूद कई शैलाश्रयों का क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी (इलाहाबाद मंडल) डॉ. रामनरेश पाल ने अपनी टीम के साथ निरीक्षण किया । इस मौके पर इन शैलाश्रयों के सरंक्षण हेतु कई वर्षों से संघर्षरत युवा पत्रकार अनुज हनुमत ने पुरातत्व विभाग की टीम को इससे सम्बंधित कई प्रमुख दस्तावेज भी सौंपे । सरहट व उसके आसपास मौजूद शैलाश्रयों का निरीक्षण करने आये इलाहाबाद मंडल के क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. राम नरेश पाल ने बताया कि इन सभी शैलाश्रयों में मौजूद शैलचित्रों की आकृति और बनावट देखने पर यह मध्यपाषाणकाल के लगते हैं । लेकिन जब तक इनकी जाँच नही हो जाती तब तक कुछ भी कहना मुश्किल है लेकिन इतना स्पस्ट है कि ये शैलचित्र पाषाणकाल के हैं और अगर इन स्थानों में विधिवत जाँच पड़ताल और उत्खनन हो तो और भी कई आश्चर्यजनक जानकारियां सामने आ सकती हैं । उन्होंने बताया कि जल्दी ही इनके सरंक्षण हेतु कार्यवाही की जायेगी ।
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पुरातत्व विभाग की टीम चित्रकूट पहुंची। यहां के सरहट और उसके आस पास मौजूद कई शैलाश्रयों का क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी (इलाहाबाद मंडल) डॉ. रामनरेश पाल ने अपनी टीम के साथ निरीक्षण किया । इस मौके पर इन शैलाश्रयों के सरंक्षण हेतु कई वर्षों से संघर्षरत युवा पत्रकार अनुज हनुमत ने पुरातत्व विभाग की टीम को इससे सम्बंधित कई प्रमुख दस्तावेज भी सौंपे । सरहट व उसके आसपास मौजूद शैलाश्रयों का निरीक्षण करने आये इलाहाबाद मंडल के क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. राम नरेश पाल ने बताया कि इन सभी शैलाश्रयों में मौजूद शैलचित्रों की आकृति और बनावट देखने पर यह मध्यपाषाणकाल के लगते हैं । लेकिन जब तक इनकी जाँच नही हो जाती तब तक कुछ भी कहना मुश्किल है लेकिन इतना स्पस्ट है कि ये शैलचित्र पाषाणकाल के हैं और अगर इन स्थानों में विधिवत जाँच पड़ताल और उत्खनन हो तो और भी कई आश्चर्यजनक जानकारियां सामने आ सकती हैं । उन्होंने बताया कि जल्दी ही इनके सरंक्षण हेतु कार्यवाही की जायेगी ।
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दो टीमें निरीक्षण के लिए इस क्षेत्र में आ चुकी
चित्रकूट में मौजूद शिलाचित्र
आपको बता दें कि इससे पहले भी दो टीमें निरीक्षण के लिए इस क्षेत्र में आ चुकी हैं । भारतीय पुरात्तव विभाग की पहली टीम ने उपनिदेशक डॉ. आर सिन्हा के नेतृत्व में चित्रकूट जिले के मानिकपुर तहसील के सरहट स्थित पुरापाषाणकालीन शैलचित्रों का निरीक्षण किया ।दरअसल युवा पत्रकार अनुज हनुमत ने सरहट स्थित इन शैलचित्रों को प्रकाश में लाने का कार्य किया और फिर उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को प्रार्थना पत्र लिखकर इस सम्बन्ध में जल्द से जल्द उचित कार्यवाही की मांग की । इसके बाद पीएमओ ने जल्द ही पत्र को संज्ञान में लेते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम को भेजा ।
डॉ सिन्हा के नेतृत्व मानिकपुर आई पुरातत्व विभाग की टीम ने इन स्थानों का सघन निरीक्षण किया । अनुज हनुमत के अनुसार भारतीय पुरातत्व विभाग की टीम ने कहा कि ये हजारों साल पुराने शैलचित्र भीमबैठका से भी बड़ी खोज हो सकते हैं ।उनके अनुसार डॉ सिन्हा ने कहा कि इनका विकास करने में भारतीय पुरातत्व विभाग अपनी पूरी शक्ति लगा देगा । जानकारी के लिए आपको बता दें कि भले ही पुरातत्व विभाग ने अपने इन दौरों को स्थानीय मीडिया से दूर रखा हो लेकिन विभाग इन मुद्दों पर काफी गंभीरता से प्रयासरत है ।
डॉ सिन्हा के नेतृत्व मानिकपुर आई पुरातत्व विभाग की टीम ने इन स्थानों का सघन निरीक्षण किया । अनुज हनुमत के अनुसार भारतीय पुरातत्व विभाग की टीम ने कहा कि ये हजारों साल पुराने शैलचित्र भीमबैठका से भी बड़ी खोज हो सकते हैं ।उनके अनुसार डॉ सिन्हा ने कहा कि इनका विकास करने में भारतीय पुरातत्व विभाग अपनी पूरी शक्ति लगा देगा । जानकारी के लिए आपको बता दें कि भले ही पुरातत्व विभाग ने अपने इन दौरों को स्थानीय मीडिया से दूर रखा हो लेकिन विभाग इन मुद्दों पर काफी गंभीरता से प्रयासरत है ।
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प्राचीनतम शैलचित्र भारी संख्या में मौजूद
चित्रकूट में मौजूद पुरातत्व विभाग की टीम
पत्रकारिता के छात्र और इन शैलचित्रकों का अध्ययन कर रहे अनुज हनुमत ने इन हजारों साल पुराने शैलचित्रों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि चित्रकूट जिले से तीस किलोमीटर दूर मानिकपुर के पास सरहट नामक स्थान पर प्राचीनतम शैलचित्र भारी संख्या में मौजूद हैं। ये तीस हजार साल पुराने बताए जाते हैं। उन्होंने कहा कि पहले मेरा ये महज कुछ चित्रों का समूह बस है लेकिन इनका पूरा अध्ययन करने के बाद पता लगा की ये तो पाठा की पुरापाषाणकालीन संस्कृति है जो बहुत बड़े क्षेत्र में फ़ैली हुई है । ऐसे ही सरहट के पास बांसा चूहा, खांभा, चूल्ही में और भी ज्यादा संख्या में इस तरह के शैलचित्र मिलते हैं। सरहट के 20 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में करपटिया में 40 शिलाश्रयों का समूह दर्शनीय है।
भीम बैठका के शैलचित्रों जैसे ही हैं ये चित्र
चित्रकूट में मौजूद शिलाचित्र
अनुज हनुमत ने बताया कि सरहट और उसके आस पास के स्थानों पर जो शैलचित्र पाये गये हैं वो भी हूबहू भीम बैठका के शैलचित्रों जैसे ही हैं। यानि कि भीमबैठका और सरहट के शैलचित्रों में काफी सामानता है । इस कारण ये भी हजारों साल पुरानी संस्कृति हुई ।भीमबैठका के चित्रों में प्रयोग किये गए खनिज रंगों में मुख्य रूप से गेरुआ और लाल रंग है ।
उन्होंने कहा कि इस पाठा संस्कृति के अवशेष इसलिए भी नष्ट हो सकते है क्योंकि इससे एक किमी दूर ही खनन माफियो द्वारा अवैध रूप से वोल्डरों का खनन जारी है । इसलिये सरकार इसे तुरन्त सरंक्षित क्षेत्र घोषित करें । वैसे इन शैल चित्रों के माध्यम से आने वाली पीढ़ी एक नई कला को जन्म दे सकती है । यह खोज युवा पीढ़ी की खोज है जिसने ये साबित कर दिया की किताबों में लिखे पुरातात्विक ध्वंसावशेष आज भी जीवित अवस्था में है ।
उन्होंने कहा कि इस पाठा संस्कृति के अवशेष इसलिए भी नष्ट हो सकते है क्योंकि इससे एक किमी दूर ही खनन माफियो द्वारा अवैध रूप से वोल्डरों का खनन जारी है । इसलिये सरकार इसे तुरन्त सरंक्षित क्षेत्र घोषित करें । वैसे इन शैल चित्रों के माध्यम से आने वाली पीढ़ी एक नई कला को जन्म दे सकती है । यह खोज युवा पीढ़ी की खोज है जिसने ये साबित कर दिया की किताबों में लिखे पुरातात्विक ध्वंसावशेष आज भी जीवित अवस्था में है ।
किसानों-मजदूरों को फांसी दी जाती थी
चित्रकूट में मौजूद पुरातत्व विभाग की टीम
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की दूसरी टीम भी संघर्षशील युवा पत्रकार एवं मानिकपुर विकास मोर्चा के संस्थापक अनुज हनुमत के द्वारा पीएमओ को प्रेषित किये गये पत्र के कारण चित्रकूट की पावन धरती पर आई । इस टीम ने भारतीय पुरातत्व विभाग के उप रिसर्च निदेशक एके तिवारी के नेतृत्व में मानिकपुर स्थित पुराने थाने का निरीक्षण किया । दरअसल, मानिकपुर तहसील के अंतर्गत ही मानिकपुर नगर में ब्रिटिशकालीन समय का एक ऐसा सैकड़ो पुराना थाना है जहाँ लोगो की मानें तो किसानों - मजदूरों को फांसी दी जाती थी । अनुज हनुमत और उनकी टीम चाहती है कि इस स्थान को सरकार सरंक्षित करके 'शहीद स्थल' के रूप में विकसित कर क्योंकि यहाँ से स्थानीय लोगों के संघर्ष की यादें जुडी हैं । अनुज हनुमत के अनुसार अगर समय रहते इसे सरंक्षित नही किया गया तो आने वाले कुछ वर्षों में यह नष्ट हो जायेगा ।
दरअसल, पिछले एक वर्ष के अंदर पुरातत्व विभाग द्वारा ताबड़तोड़ दौरे किये जा चुके हैं जिसके बाद हम यह मान सकते हैं कि धर्मनगरी चित्रकूट में पर्यटन के विकास हेतु पुरातत्व विभाग लगातार सक्रिय है । लेकिन एक सच यह भी है कि फिलहाल अभी तक ASI द्वारा इन स्थानों पर मौजूद शैलचित्रों के सरंक्षण हेतु कोई भी ठोस कदम नही उठाया गया है । अब राज्य सरकार और सूबे के पर्यटन विभाग से आशा हाउ । बहरहाल एक प्रमुख बात यह भी है कि अनुज हनुमत द्वारा इन स्थानों केसरंक्षण हेतु कई बार प्रधानमंत्री , पर्यटन मंत्री और मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखे गए हैं लेकिन अभी तक कुछ नही हुआ है ।
दरअसल, पिछले एक वर्ष के अंदर पुरातत्व विभाग द्वारा ताबड़तोड़ दौरे किये जा चुके हैं जिसके बाद हम यह मान सकते हैं कि धर्मनगरी चित्रकूट में पर्यटन के विकास हेतु पुरातत्व विभाग लगातार सक्रिय है । लेकिन एक सच यह भी है कि फिलहाल अभी तक ASI द्वारा इन स्थानों पर मौजूद शैलचित्रों के सरंक्षण हेतु कोई भी ठोस कदम नही उठाया गया है । अब राज्य सरकार और सूबे के पर्यटन विभाग से आशा हाउ । बहरहाल एक प्रमुख बात यह भी है कि अनुज हनुमत द्वारा इन स्थानों केसरंक्षण हेतु कई बार प्रधानमंत्री , पर्यटन मंत्री और मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखे गए हैं लेकिन अभी तक कुछ नही हुआ है ।