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Kanpur News: ओटीपी की जगह हैप्पी कोड पूछकर शातिर कर रहे थे ठगी
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कानपुर। आईपीएल की तैयारी कर रहे दिल्ली के क्रिकेटर विवेक शर्मा और पंजाब के रेसलर अनुज तोमर ने क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर लोगों से ठगी की है। उन्होंने ओटीपी की जगह पीड़ितों से कोड और हैप्पी कोड पूछकर वारदात की। यह जानकारी क्राइम ब्रांच की साइबर सेल को मिली है। उन्होंने गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश तेज कर दी है। उसे दिल्ली, चंडीगढ़, महाराष्ट्र और राजस्थान की पुलिस ठगी में पहले पकड़ चुकी है।
गुजैनी निवासी सुनील कुमार खन्ना की ठगी की रिपोर्ट पर साइबर सेल ने मोहाली से अनुज तोमर और दिल्ली से विवेक शर्मा को गिरफ्तार कर गुरुवार को जेल भेजा था। उनके पास से थार कार, मोबाइल, लैपटॉप, 1.23 लाख का बैट, क्रिकेट किट समेत कई महंगी वस्तुएं बरामद कीं। पूछताछ में आरोपियों ने गिरोह के मास्टरमाइंड के बारे में जानकारी दी।
साइबर सेल प्रभारी शिवकुमार शर्मा ने बताया कि गिरोह में तीनों का काम बंटा हुआ था। विवेक शर्मा और अनुज तोमर कॉल करके लोगों को फंसाते थे। शिकार की डिटेल और उसके बारे में जानकारियां मास्टरमाइंड देता था। उसका कार्य फर्जी सिम हासिल कर उसकी मदद से ठगी करना था। आरोपी ओटीपी की जगह कोड या हैप्पी कोड पूछते थे। इससे लोग अनजान में ही अपना ओटीपी दे देते थे।
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दूसरे राज्यों की पुलिस से मांगी डिटेल
मास्टरमाइंड की तलाश में क्राइम ब्रांच के साइबर सेल ने दिल्ली और हरियाणा पुलिस से जानकारी मांगी है। वह दोनों आरोपियों की तरह ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं है लेकिन उसको ठगी करने का ज्यादा अनुभव है। मास्टरमाइंड पहले भी कई बार पकड़ा जा चुका है। वारदात के लिए किराये का कमरा लेकर रहता है और कुछ समय बाद दूसरे शहर निकल जाता है।
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गुजैनी निवासी सुनील कुमार खन्ना की ठगी की रिपोर्ट पर साइबर सेल ने मोहाली से अनुज तोमर और दिल्ली से विवेक शर्मा को गिरफ्तार कर गुरुवार को जेल भेजा था। उनके पास से थार कार, मोबाइल, लैपटॉप, 1.23 लाख का बैट, क्रिकेट किट समेत कई महंगी वस्तुएं बरामद कीं। पूछताछ में आरोपियों ने गिरोह के मास्टरमाइंड के बारे में जानकारी दी।
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साइबर सेल प्रभारी शिवकुमार शर्मा ने बताया कि गिरोह में तीनों का काम बंटा हुआ था। विवेक शर्मा और अनुज तोमर कॉल करके लोगों को फंसाते थे। शिकार की डिटेल और उसके बारे में जानकारियां मास्टरमाइंड देता था। उसका कार्य फर्जी सिम हासिल कर उसकी मदद से ठगी करना था। आरोपी ओटीपी की जगह कोड या हैप्पी कोड पूछते थे। इससे लोग अनजान में ही अपना ओटीपी दे देते थे।
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दूसरे राज्यों की पुलिस से मांगी डिटेल
मास्टरमाइंड की तलाश में क्राइम ब्रांच के साइबर सेल ने दिल्ली और हरियाणा पुलिस से जानकारी मांगी है। वह दोनों आरोपियों की तरह ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं है लेकिन उसको ठगी करने का ज्यादा अनुभव है। मास्टरमाइंड पहले भी कई बार पकड़ा जा चुका है। वारदात के लिए किराये का कमरा लेकर रहता है और कुछ समय बाद दूसरे शहर निकल जाता है।