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Kanpur News: मूर्ति के लिए आपस में लड़ने की जरूरत नहीं

Sun, 26 Oct 2025 12:23 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 26 Oct 2025 12:23 AM IST
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There is no need to fight over the idol.
कानपुर। शहर में गणेश शंकर विद्यार्थी की मूर्ति को लेकर राजनीतिक दलों के बीच विवाद चल रहा है। मामले को तूल पकड़ता देख लेखक कपिल मृदुल ने विद्यार्थी की जयंती पर एक पत्र साझा कर उनकी पीड़ा को अपने शब्दों में बयां किया है। पत्र से यह संदेश दिया गया है कि कानपुर वालों को उनकी मूर्ति के लिए आपस में लड़ने की जरूरत नहीं है।
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पत्र में लिखा है कि प्रताप प्रेस की बंदी और उसकी इमारत की बदहाली देख कर अब दुख नहीं अफसोस होता है, काश वह बच जाता तो मेरी तो नहीं आजाद, भगत सिंह जैसे कई क्रांतिवीरों की निशानी आगामी पीढ़ियों के लिए रह पाती। इसका दुख नहीं है कि मेरे अंतिम स्थल चौबेगोला में मेरी निशानी नहीं बची। दुख इस बात का भी नहीं कि मेरे नाम वाले मेडिकल कॉलेज में शायद ही कभी कोई मुझे याद करता हो। सच कहूं तो मेरे दुख का कारण है मेरी खुद की मूर्ति जो अब शहर में राजनीति की वजह बन गई है। इसी 13 अक्तूबर की दोपहर में मेरे नाम को ढाल बनाकर दूसरे नेताओं के नाम की नारेबाजी हो रही है। मुझे लोग एक-दूसरे से लड़ने को तैयार दिखे। क्या यह मेरा शहर है? कानपुर वालों मुझे अपनी कोई मूर्ति या स्मारक नहीं चाहिए। मैंने मूर्तियों और नामों पर दशकों तक जलता समाज देखा है। अब और नहीं। मेरे प्यारे कानपुर वालों बस एक गुजारिश है कि मुझे नाम और मूर्ति तक सीमित न करें। अगर मेरे लिए कुछ करना हो तो युवाओं को रोजगार दिलाओ। जानता हूं यह कर पाना बहुत मुश्किल है तो कम से कम मेरे नाम पर राजनीति न करो। यही मेरी जयंती पर का तोहफा भी होगा और सच्ची श्रद्धांजलि भी।
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