फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   then Gandhiji had reached Abdul Hafeez's house, died due to being stuck in traffic during the procession

एक्सक्लूसिव: तब गांधीजी पहुंच गए थे अब्दुल हफीज के घर, जुलूस के दौरान ट्रैफिक में फंसकर हुई थी मौत

Mon, 28 Jun 2021 11:28 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Mon, 28 Jun 2021 11:28 AM IST
सार

जब गांधी जी को अब्दुल हफीज नामक व्यक्ति की मृत्यु की सूचना मिली तो उन्होंने तत्काल स्वागत समारोह और जुलूस रद्द करवा दिया। वह इस कदर दुखी थे कि स्वदेशी भंडार के उद्घाटन की औपचारिकता भर की। वहां न भाषण हुआ और न ही स्वागत।

विज्ञापन
then Gandhiji had reached Abdul Hafeez's house, died due to being stuck in traffic during the procession
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी - फोटो : gandhi.gov.in

विस्तार

कोई सौ साल पहले महात्मा गांधी कानपुर आए थे, तब भी स्वागत जुलूस के दौरान ट्रैफिक में फंसने से अब्दुल हफीज नामक व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी। गांधीजी उसकी मृत्यु से इस कदर व्यथित हुए कि तत्काल स्वागत कार्यक्रम रद्द करवा दिया और पहुंच गए अब्दुल के घर। इस घटना का जिक्र महात्मा गांधी ने अपनी आत्मकथा में भी किया है।
विज्ञापन


बात 21 अप्रैल 1920 की है। इसमें गांधीजी ने लिखा है, ‘दिल्ली से मुझे प्रयाग तो जाना ही था। वहां से मोतीलाल से मिलकर लौट रहा था, तभी कानपुर जाने का आग्रह किया गया। कानपुर रास्ते में पड़ता है। बम्बई (मुंबई) की तरह कानपुर भी कपड़ा मिलों का केंद्र है। यहां हसरत मोहानी साहब के विशेष प्रयास से स्वदेशी भंडार खोला गया, जिसका उद्घाटन करना था।
विज्ञापन


इस मौके पर हजारों लोग एकत्र हुए थे। मेरे पहुंचने से पहले अली भाई पहुंच चुके थे, सम्मान में बहुत बड़ा जुलूस निकाला गया था।’ भीड़ इस कदर थी कि यातायात संभालना मुश्किल हो गया और एक गाड़ी का घोड़ा बिचक गया। घोड़े की लात पास खड़े अब्दुल हफीज की छाती पर लगी और वह उसी ठौर ढेर हो गया। अली भाई गाड़ी से उतरे और एक खाट मंगवाकर उसका शव उसमें रखा।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस बीच गांधीजी आ गए और उन्हें स्टेशन पर ही यह दुखद सूचना मिली। गांधीजी ने तत्काल स्वागत समारोह और जुलूस रद्द करवा दिया। वह इस कदर दुखी थे कि स्वदेशी भंडार के उद्घाटन की औपचारिकता भर की। वहां न भाषण हुआ और न ही स्वागत। इसके बाद उन्होंने कहा कि उन्हें उस जगह ले जाया जाए, जहां अब्दुल का शव रखा है।


गांधीजी वहां शोक का माहौल देख बेहद भावुक हो गए। गांधीजी ने अब्दुल के परिजनों को ढांढस बंधाया और नजीर भी पेश की कि आम नागरिक की मौत कितनी मायने रखती है। उस वक्त तो गांधीजी भी बड़ी शख्सियत थे। गुलामी का दौर था, लेकिन उनकी हैसियत किसी वीवीआइपी से कम न थी। शायद उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि आजाद भारत में वीआईपी कल्चर कितना हॉबी हो जाएगा कि आम नागरिक की जान की कोई कीमत ही नहीं होगी।

प्रस्तुति : शैलेश अवस्थी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed